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खंडवा-इंदौर हाईवे पर दर्दनाक हादसा, आंधी में गिरे पेड़ से टकराई बाइक; 4 महीने पहले हुई शादी, युवक की मौत

खंडवा-इंदौर हाईवे पर छैगांवमाखन थाना क्षेत्र के ग्राम दोंदवाड़ा के पास शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। आंधी के कारण सड़क पर गिरे पेड़ से एक बाइक टकरा गई। हादसे में 22 वर्षीय युवक सावन मालाकार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसकी पत्नी घायल हो गई। पारिवारिक कार्यक्रम से लौट रहे थे पति-पत्नी जानकारी के मुताबिक, सावन मालाकार अपनी पत्नी के साथ बड़वाह से एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होकर खंडवा लौट रहा था। परिजनों ने बताया कि दोनों की शादी महज 4 महीने पहले ही हुई थी। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। अंधेरे में दिखाई नहीं दिया पेड़ परिजनों के अनुसार, सावन निवासी गणेश तलाई, खंडवा अपनी बाइक से घर लौट रहा था। इसी दौरान तेज आंधी के कारण हाईवे पर एक पेड़ गिर गया था। रात का अंधेरा होने की वजह से सावन को सड़क पर पड़ा पेड़ दिखाई नहीं दिया और बाइक सीधे उससे जा टकराई। सिर में गंभीर चोट लगने से गई जान टक्कर इतनी जोरदार थी कि सावन बाइक से उछलकर सिर के बल सड़क पर जा गिरा। उसके सिर में गंभीर चोट आई और ज्यादा खून बहने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में उसकी पत्नी को भी चोटें आई हैं। घायल पत्नी हाईवे पर मांगती रही मदद हादसे के बाद घायल पत्नी अपने पति को उठाने की कोशिश करती रही। उसने राहगीरों से मदद भी मांगी, लेकिन रात का समय होने के कारण हाईवे पर ट्रैफिक बहुत कम था। पति को बचाने की कोशिश में वह खुद भी खून से लथपथ हो गई। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा शव शनिवार दोपहर जिला अस्पताल स्थित मेडिकल कॉलेज में सावन के शव का पोस्टमार्टम किया गया। हादसे की खबर मिलते ही परिजन और रिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में शामिल होगी JCC(J), अमित जोगी बोले- राजनीति में ‘झेंगुरा’ जैसी जिजीविषा जरूरी

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने घोषणा की है कि वह नई दिल्ली के जंतर-मंतर में आयोजित होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होगी। पार्टी का दावा है कि वह देश की पहली मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है, जिसने CJP के आंदोलन का समर्थन किया है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग JCC(J) ने कहा कि यह प्रदर्शन राष्ट्रीय परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में किया जा रहा है। आंदोलन के जरिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी। पार्टी का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होना जरूरी है। अमित जोगी का बड़ा बयान पार्टी अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा कि वे कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े हैं, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में पारंपरिक दलों के लिए टिके रहना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा, “आज के भारत में सिर्फ कांग्रेसी होना काफी नहीं है। राजनीति में टिके रहने के लिए कॉकरोच जैसी जिजीविषा भी चाहिए।” ‘झेंगुरा’ बनकर पहुंचेंगे जंतर-मंतर अमित जोगी ने छत्तीसगढ़ी संदर्भ देते हुए कहा कि राज्य में कॉकरोच को ‘झेंगुरा’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी 6 जून को जंतर-मंतर में कॉकरोच नहीं, बल्कि गर्व के साथ ‘झेंगुरा’ बनकर पहुंचेगी। छात्रों के मुद्दों पर समर्थन JCC(J) ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उसका CJP के साथ जुड़ाव केवल परीक्षा अनियमितताओं और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों तक सीमित है। हालांकि पार्टी ने भविष्य में समान विचारधारा वाले संगठनों के साथ मिलकर काम करने के संकेत भी दिए हैं। तीसरे राजनीतिक विकल्प की बात अमित जोगी ने कहा कि युवाओं के बीच भाजपा और कांग्रेस से अलग तीसरे राजनीतिक विकल्प की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने माना कि राजनीतिक दलों से गलतियां हुई हैं और ऐसे जन आंदोलन आत्ममंथन का मौका देते हैं। उन्होंने कहा कि जनता की भावनाओं को समझना और उनका सम्मान करना जरूरी है। आंदोलन राजनीतिक दलों को आईना दिखाने का काम करते हैं और सुधार के लिए यह जरूरी भी है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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रायपुर में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के जोनल ऑफिस में भीषण आग, डेढ़ घंटे बाद पाया गया काबू

Central Bank of India के रायपुर स्थित जोनल ऑफिस में शनिवार सुबह भीषण आग लग गई। यह घटना बॉम्बे मार्केट इलाके की है। सुबह करीब 9 बजे बंद पड़े ऑफिस से अचानक धुआं उठता देखकर राहगीरों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया। करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे। शॉर्ट सर्किट की आशंका शुरुआती जांच में आग लगने की सही वजह सामने नहीं आई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि शॉर्ट सर्किट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग मामले की जांच कर रहे हैं। महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नुकसान की आशंका आग बैंक के जोनल ऑफिस में लगी थी, इसलिए वहां रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों और अन्य सामान के जलने की आशंका जताई जा रही है। बैंक प्रबंधन नुकसान का आकलन करने में जुटा हुआ है। ऑफिस बंद होने से टली बड़ी घटना राहत की बात यह रही कि घटना के समय ऑफिस बंद था। इसी वजह से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। सुरक्षा के लिए इलाका किया गया सील एडीसीपी मध्य तारकेश्वर पटेल ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई थी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आग लगने वाले इलाके को कुछ समय के लिए सील कर दिया गया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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ABVP ने ICFAI विश्वविद्यालय के कुलपति को हटाने की मांग की, जांच रिपोर्ट में गंभीर आरोपों का दावा

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के कुलपति शिवदयाल पांडे को पद से हटाने की मांग की है। परिषद ने राज्यपाल और कुलाध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट में कुलपति के खिलाफ लगे आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना गया है। मानसिक उत्पीड़न और लैंगिक भेदभाव के आरोप ABVP का कहना है कि कुलपति पर मानसिक उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव और प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। परिषद के मुताबिक विश्वविद्यालय के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति से मर्यादित और निष्पक्ष व्यवहार की उम्मीद की जाती है। ऐसे आरोप उच्च शिक्षा संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। जांच समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आया परिषद के अनुसार छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कुलपति के आचरण को अव्यावसायिक और पद की गरिमा के खिलाफ बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आरोपों को प्रथम दृष्टया प्रमाणित माना गया है। राज्यपाल से की गई कार्रवाई की मांग ABVP ने राज्यपाल और कुलाध्यक्ष से मांग की है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कुलपति के खिलाफ तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जाए। परिषद ने उन्हें पद से हटाने के साथ ही विश्वविद्यालय में महिला प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की भी मांग की है। छात्र नेताओं ने उठाए सवाल प्रदेश सहमंत्री प्रथम राव फूटाने ने कहा कि जब जांच समिति गंभीर आरोपों की पुष्टि कर चुकी है, तो विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने के लिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है। वहीं जिला संयोजक रूपेश कुर्रे ने कहा कि शिक्षा संस्थान केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों के भी केंद्र होते हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर कुम्हारी-पाटन भाग संयोजक डे साहब साहू ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और महिला सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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गुना में पहली बार होगा पंचमुखी पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव, 5 इंद्र-5 कुबेर समेत दिखेंगे दुर्लभ दृश्य

गुना में जल्द ही जैन समाज का ऐतिहासिक पंचमुखी पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। यह भव्य धार्मिक आयोजन मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के सानिध्य में होगा। खास बात यह है कि जैन इतिहास में पहली बार ऐसा पंचमुखी पंचकल्याणक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सभी प्रमुख पात्रों की संख्या पांच-पांच होगी। महोत्सव में 5 कुबेर, 5 यज्ञ नायक, 5 ईशान इंद्र और 5 सनत कुमार इंद्र शामिल होंगे। इसके अलावा भगवान के माता-पिता के रूप में 5 सौभाग्यशाली जोड़े बनाए जाएंगे। आयोजन के दौरान 5 नीलांजना नृत्य, 5 दीक्षाएं और 5 आहार जैसे दुर्लभ दृश्य भी देखने को मिलेंगे। मुनि सुधासागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुना का यह पंचकल्याणक बेहद अलौकिक और विशेष होगा। उन्होंने कहा कि उनके सानिध्य में अब तक देश में ऐसा आयोजन कहीं नहीं हुआ है। जैसे पंचमुखी रुद्राक्ष का विशेष महत्व होता है, उसी तरह यह पंचमुखी पंचकल्याणक भी ऐतिहासिक साबित होगा। मुनिश्री ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ गुना ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और विश्व के कल्याण का माध्यम बनेगा। उन्होंने संकेत दिए कि इस दौरान इतनी मूर्तियों को सूर्य मंत्र दिया जाएगा कि संभव है कुछ नई मुनि दीक्षाएं भी हों। उन्होंने श्रद्धालुओं से अभी से मंत्र जाप शुरू करने का आह्वान किया। इस दौरान अंचल के कमलश्री परिवार ने अपना निजी सीमंधर जिनालय मंदिर सकल जैन समाज को समर्पित कर दिया। यह मंदिर अब बजरंगगढ़ कमेटी के अंतर्गत संचालित होगा। मुनिश्री ने परिवार को मंगल आशीर्वाद भी दिया। महोत्सव की तैयारियों के तहत शनिवार सुबह शहर में प्रभातफेरी निकाली गई। यात्रा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई नसियांजी पहुंची। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के विरोध में भोपाल में पैदल मार्च आज

राजधानी भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर विरोध तेज हो गया है। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ संयुक्त रूप से पैदल मार्च निकालने का ऐलान किया है। यह पैदल मार्च शुक्रवार शाम 4:30 बजे जहांगीराबाद स्थित जिंसी चौकी से शुरू होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव वापस लेने की मांग करेंगे। स्वतंत्रता सेनानी का अपमान बताया जमीअत उलेमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली देश के महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला ने विदेशों में रहकर भारत की आजादी की लड़ाई को मजबूत किया और देश की पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री की भूमिका निभाई थी। ऐसे व्यक्तित्व के नाम को हटाने का प्रयास स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का अपमान है। नए विश्वविद्यालय खोलने की मांग मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने कहा कि प्रदेश को नए और विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों की जरूरत है, न कि पुराने संस्थानों के नाम बदलने की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसी नए नाम से संस्थान स्थापित करना चाहती है तो नए विश्वविद्यालय खोले जाएं, लेकिन ऐतिहासिक पहचान और विरासत से जुड़े संस्थानों के नाम नहीं बदले जाने चाहिए। प्रस्ताव वापस लेने की मांग विरोध कर रहे संगठनों ने सरकार से कार्य परिषद द्वारा पारित नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को तुरंत निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह फैसला भोपाल की ऐतिहासिक पहचान और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर सीधा आघात है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। नागरिकों से शामिल होने की अपील आयोजकों ने शहरवासियों, छात्र-छात्राओं और समाज के सभी वर्गों से पैदल मार्च में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक नाम का मुद्दा नहीं, बल्कि इतिहास और विरासत को बचाने की लड़ाई है। भोपाल और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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इंदौर में खूंखार कुत्ते का आतंक, 40 से ज्यादा लोगों को काटा, अस्पताल स्टाफ भी घायल

मध्य प्रदेश के इंदौर में शुक्रवार को एक आवारा कुत्ते ने जमकर आतंक मचाया। सांवेर रोड इलाके में कुत्ते ने डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टूडेंट्स, मरीज, सिक्योरिटी गार्ड और राहगीरों समेत 40 से ज्यादा लोगों को काटकर घायल कर दिया। पीड़ितों में 16 से अधिक लोग अरबिंदो अस्पताल से जुड़े बताए जा रहे हैं। घटना की शुरुआत सुबह करीब 8 बजे अरबिंदो अस्पताल परिसर से हुई। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार कुत्ता पिछले हिस्से से अस्पताल में घुसा और सबसे पहले स्टाफ पर हमला किया। इसके बाद वह सांवेर रोड और आसपास के कई इलाकों में घूमता रहा और लोगों को काटता गया। कई इलाकों में फैला दहशत का माहौल प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुत्ता अरबिंदो अस्पताल से निकलकर रेवती रेंज, बरदरी गांव, एलएनसीटी कॉलेज, रेनेसा कॉलेज, नरसिंह मुंजी कॉलेज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच गया। लगातार हो रहे हमलों के कारण इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों, छात्रों और कर्मचारियों में भय का माहौल है। कई लोग अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं, जबकि अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। नगर निगम ने चलाया अभियान घटना के बाद शनिवार को नगर निगम की दो टीमें अरबिंदो अस्पताल पहुंचीं और कुत्तों को पकड़ने का अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने घेराबंदी कर अब तक 23 कुत्तों को पकड़ा है। हालांकि, वह कुत्ता अब तक पकड़ में नहीं आया है जिसने 40 से ज्यादा लोगों पर हमला किया था। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी हमले में घायल लोगों का इलाज अरबिंदो अस्पताल और अन्य चिकित्सा संस्थानों में किया गया। सभी को एंटी रेबीज वैक्सीन और जरूरी उपचार दिया गया। इलाज कराने वालों में डॉ. स्मृति, डॉ. अक्षिता, सचिन राजपूत, अंजनी शर्मा, सीमा, शोभा, परिणीता, कुसुम, प्रणव गुप्ता, गोविंदा, विष्णु, अफसर, राजीव धाकड़ और आर्यन समेत कई लोग शामिल हैं। रोज सामने आ रहे 200 डॉग बाइट केस शहर में डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। शासकीय हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक (लाल अस्पताल) के प्रभारी डॉ. रुपेंद्र पटेल के मुताबिक, इंदौर में रोजाना करीब 200 लोग डॉग बाइट के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों और अस्पताल प्रबंधन ने नगर निगम से मांग की है कि हमला करने वाले कुत्ते को जल्द पकड़कर लोगों को राहत दी जाए। इंदौर और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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Monsoon

Goa में Monsoon की एंट्री, Kerala में Heavy Rain Alert; MP और छत्तीसगढ़ को अभी इंतजार

देश के कई हिस्सों में लोग तेज गर्मी और उमस से परेशान हैं, लेकिन अब राहत की खबर सामने आ रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon) ने Goa में एंट्री कर ली है और इसके साथ ही बारिश की गतिविधियां तेज होने लगी हैं। हालांकि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लोगों को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि मौसम विभाग ने इन राज्यों में मानसून देर से पहुंचने का अनुमान जताया है। उधर Kerala में लगातार हो रही भारी बारिश ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है और सुरक्षा को देखते हुए स्कूल बंद कर दिए गए हैं। Kerala में बारिश का कहर, Wayanad-Kasaragod में Alert Kerala के Wayanad और Kasaragod जिलों में पिछले 24 घंटों से लगातार तेज बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने इन इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखने का फैसला लिया है। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रेकिंग और पर्यटन गतिविधियों पर भी अस्थायी रोक लगा दी गई है। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें। Goa पहुंचा Monsoon, मौसम हुआ सुहाना अरब सागर में बने अनुकूल मौसमीय सिस्टम की वजह से मानसून Goa तक पहुंच चुका है। बारिश शुरू होने के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी तेजी से आगे बढ़ेगा। Goa के बीच और पर्यटन स्थलों पर भी बारिश का असर साफ दिखाई देने लगा है। MP-Chhattisgarh में मानसून की एंट्री में देरी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में फिलहाल प्री-मानसून एक्टिविटी देखने को मिल रही है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रायपुर और दुर्ग समेत कई शहरों में बादल छाने, तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश का दौर जारी है। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार इन राज्यों में मानसून की आधिकारिक एंट्री सामान्य तारीख से कुछ दिन देर से हो सकती है। अगले कुछ दिनों तक आंधी, बिजली गिरने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। किसानों की बढ़ी चिंता, बारिश का इंतजार खरीफ फसलों की बुवाई का समय नजदीक आने के साथ किसानों की नजरें मानसून पर टिकी हुई हैं। अच्छी बारिश खेती के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है। कई किसान अब मानसून की स्थायी बारिश शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि बुवाई का काम समय पर शुरू हो सके। वहीं शहरों में रहने वाले लोग भी लगातार बढ़ रही गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जून के दूसरे सप्ताह से मध्य भारत में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। फिलहाल पूरे देश में मानसून की चाल पर नजर बनी हुई है और आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज से काफी अहम माने जा रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Twisha से समर्थ ने पूछा था- ‘तुम प्रेग्नेंट कैसे हो सकती हो, यह बच्चा किसका है?’

Twisha से समर्थ ने पूछा था- ‘तुम प्रेग्नेंट कैसे हो सकती हो, यह बच्चा किसका है?’

बहुचर्चित प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन विवाद मामले में अब जांच एजेंसियों का फोकस Twisha और समर्थ के बीच हुई बातचीत पर आ गया है। सूत्रों के मुताबिक, मामले की जांच कर रही सीबीआई को कुछ ऐसे चैट और बातचीत के सबूत मिले हैं, जिनमें समर्थ ने ट्विशा से सवाल किया था कि वह प्रेग्नेंट कैसे हो सकती है और यह बच्चा आखिर किसका है। बताया जा रहा है कि इसी विवाद के बाद दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। अब सीबीआई इस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रेग्नेंसी टर्मिनेट कराने को लेकर आखिर क्या परिस्थितियां बनीं और इसके पीछे किसका कितना दबाव या भूमिका थी। सूत्रों के अनुसार, जांच में सामने आया है कि प्रेग्नेंसी की जानकारी मिलने के बाद समर्थ काफी नाराज था। उसने ट्विशा से कई सवाल किए थे। यही बातचीत अब जांच का अहम हिस्सा बन गई है। सीबीआई डिजिटल सबूत, चैट रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स खंगाल रही है। मामले से जुड़े लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि क्या किसी तरह का मानसिक दबाव बनाया गया था या फिर कोई साजिश रची गई थी। इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है। लोग रिश्तों में भरोसे, जिम्मेदारी और महिलाओं के अधिकारों को लेकर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। वहीं, परिवार से जुड़े लोग अभी खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई साफ हो पाएगी। फिलहाल सभी डिजिटल और मेडिकल रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री पर MP सरकार का बड़ा प्लान, कचरा हटने के बाद जमीन के नए उपयोग की तैयारी

Bhopal यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री पर MP सरकार का बड़ा प्लान, कचरा हटने के बाद जमीन के नए उपयोग की तैयारी

भोपाल की Union Carbide Factory, Bhopal को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और दीर्घकालिक प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। कचरे के सुरक्षित निपटान की प्रक्रिया के बाद अब सरकार की नजर फैक्ट्री की जमीन के मैनेजमेंट और भविष्य के उपयोग पर है। यह संकेत खुद मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने हाल ही में दिए हैं। 🔴 क्या है सरकार का नया प्लान? सरकारी योजना के मुताबिक, सबसे पहले फैक्ट्री परिसर में मौजूद जहरीले कचरे को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से हटाया जा रहा है। इसके बाद इस पूरी जमीन को एक व्यवस्थित योजना के तहत विकसित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस क्षेत्र को: जैसे विकल्पों के लिए इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है।
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Rally: दिवाली से पहले रैली टालने की मांग, दिल्ली के कारोबारियों को ₹10,000 करोड़ के नुकसान का डर

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही दिल्ली के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। दुकानदारों को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी तेज होगी और कारोबार को अच्छा फायदा मिलेगा। इसी बीच कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली के व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में बड़ी रैली के कारण ट्रैफिक डायवर्जन, रास्तों पर बैरिकेडिंग और आवाजाही में परेशानी हुई, तो कारोबार प्रभावित हो सकता है। CTI ने आशंका जताई है कि इससे करीब 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। Rahul Gandhi को क्यों लिखी गई चिट्ठी? CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया है। व्यापारी संगठन चाहता है कि कार्यक्रम 10 नवंबर यानी भैया दूज के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी और कारोबार सामान्य रूप से चलता रहे। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली उनके लिए साल का सबसे अहम कारोबारी समय होता है। इस दौरान केवल दिल्ली के ग्राहक ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग थोक खरीदारी करने पहुंचते हैं। अगर सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई, तो दुकानदारों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। दिवाली पर Delhi में कितने करोड़ का कारोबार? दिल्ली के बाजारों में दिवाली के दौरान कपड़े, सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट आइटम और सजावटी सामान की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल और प्रॉपर्टी जैसे क्षेत्रों में भी खरीदारी होती है। CTI के अनुमान के मुताबिक, धनतेरस के दौरान दिल्ली में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। व्यापारियों को डर है कि अगर त्योहार के व्यस्त दिनों में यातायात बाधित हुआ, तो दुकानों तक पहुंचने वाले ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है। यही वजह है कि संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रमों की तारीख तय करते समय व्यापारियों की परेशानी को भी ध्यान में रखा जाए। रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों पर असर की आशंका रामलीला मैदान के आसपास और मध्य दिल्ली में कई बड़े कारोबारी इलाके हैं। चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, खारी बावली और दरियागंज जैसे बाजारों में त्योहारों के समय काफी भीड़ रहती है। इन बाजारों में दिल्ली के अलावा दूसरे शहरों से भी व्यापारी सामान खरीदने आते हैं। ऐसे में ट्रैफिक डायवर्जन या रास्तों पर पाबंदियां लगने से माल की ढुलाई और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, रैली के कारण किन रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा या किन इलाकों में विशेष पाबंदियां लगेंगी, इस बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पहले भी कारोबार प्रभावित होने का दावा CTI ने दावा किया है कि अक्टूबर में दिल्ली के कुछ इलाकों में रैलियों, मार्च और यातायात संबंधी व्यवधानों के कारण कारोबारियों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन ने आशंका जताई है कि दिवाली के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा बनी, तो व्यापारियों को और परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस नुकसान के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसे व्यापारी संगठन के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। 2025 में दिवाली पर हुई थी ₹75,000 करोड़ की बिक्री पिछले साल भी दिवाली के मौके पर दिल्ली के बाजारों में बड़े कारोबार की उम्मीद जताई गई थी। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, 2025 में दिल्ली में दिवाली की बिक्री करीब 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान था। इसी वजह से इस साल भी व्यापारी त्योहारों के दौरान बाजारों में अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार के समय बाजारों तक आसान पहुंच बनाए रखना जरूरी है, ताकि ग्राहकों को खरीदारी में परेशानी न हो। 1 नवंबर की Rally को लेकर अब क्या होगा? कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे उठा रहा है। दूसरी ओर, व्यापारी संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रम और त्योहारों के कारोबार के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे किसी भी पक्ष को अनावश्यक परेशानी न हो। फिलहाल, CTI ने राहुल गांधी से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। रैली की तारीख बदली जाएगी या कार्यक्रम 1 नवंबर को ही होगा, इस पर कांग्रेस के आधिकारिक फैसले का इंतजार है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस व्यापारियों की अपील पर क्या फैसला लेती है। अगर रैली की तारीख में बदलाव होता है, तो इससे दिवाली के दौरान दिल्ली के बाजारों में आवाजाही और कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता कम हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Update 4 दिन की गिरावट से निवेशकों को झटका, ₹20 लाख करोड़ से ज्यादा घटा मार्केट कैप

शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए बीते चार कारोबारी दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब ₹20.79 लाख करोड़ की कमी आई। Sensex और Nifty में कमजोरी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बाजार एक बार फिर गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में इस कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसी वजहें बताई जा रही हैं। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। Sensex-Nifty में गिरावट से निवेशकों की बढ़ी चिंता शुक्रवार को BSE Sensex 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 में 87.65 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,600 के आसपास बंद हुआ। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिन्होंने इन शेयरों में पैसा लगा रखा है। लगातार गिरावट के कारण बाजार की धारणा कमजोर हुई है। हालांकि, बाजार में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, इसका अनुमान केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर लगाना सही नहीं होगा। 4 दिन में ₹20.79 लाख करोड़ की संपत्ति घटी शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल मार्केट कैप पर दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 16 अक्टूबर को करीब ₹472.62 लाख करोड़ था। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग ₹451.83 लाख करोड़ रह गया। इस तरह चार कारोबारी दिनों में करीब ₹20,78,774 करोड़ की कमी दर्ज की गई। यानी लगभग ₹20.79 लाख करोड़ का बाजार मूल्य घट गया। यहां एक बात समझना जरूरी है। मार्केट कैप में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने इतनी रकम नकद गंवा दी। शेयरों की कीमत घटने से कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है। इसी वजह से इस आंकड़े को निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में आई कमी के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा। आखिर क्यों गिर रहा है Share Market? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए अहम संकेत माना जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी अनिश्चितता पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं, तो तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव आने की आशंका रहती है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। इसका असर शेयरों की खरीद-बिक्री और बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। Foreign Investors की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार की चाल केवल विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं करती। घरेलू निवेश, कंपनियों के नतीजे और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। Midcap और Smallcap शेयरों में ज्यादा दबाव गिरावट के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन शेयरों में उतार-चढ़ाव अक्सर अधिक हो सकता है, इसलिए बाजार में घबराहट बढ़ने पर इनमें बिकवाली तेज हो जाती है। ऐसे में जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर ज्यादा हैं, उन्हें अपने निवेश के जोखिम को समझना जरूरी है। आगे कैसा रहेगा शेयर बाजार? अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सप्ताह पर रहेगी। बाजार की दिशा तय करने में कई कारक अहम होंगे, जिनमें कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया के हालात, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी बाजारों के संकेत और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसले भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, तनाव बढ़ने और बिकवाली जारी रहने पर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल किसी निश्चित दिशा का दावा करना जल्दबाजी होगी। Investors के लिए क्या है जरूरी? शेयर बाजार में गिरावट देखकर घबराना स्वाभाविक है, खासकर तब जब पोर्टफोलियो की वैल्यू लगातार कम हो रही हो। लेकिन ऐसे समय में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय निवेश से जुड़े बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की मौजूदा गिरावट देखकर किसी शेयर को खरीदने या बेचने का फैसला करना उचित नहीं है। निष्कर्ष: भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी दिनों के दौरान करीब ₹20.79 लाख करोड़ के बाजार मूल्य में आई कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां फिलहाल बाजार के लिए अहम संकेत हैं। आने वाले दिनों में बाजार किस दिशा में जाएगा, यह इन परिस्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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