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Rajasthan एथेनॉल प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसा, Hanumangarh में आगजनी व बवाल

Rajasthan के हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा तनाव सोमवार को अचानक बढ़ गया। कई दिनों से विरोध कर रहे किसानों ने टिब्बी इलाके में हुई महापंचायत के बाद फैक्ट्री साइट की ओर कूच किया। भीड़ बड़ी थी, गुस्सा भी उतना ही। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान आगे बढ़ते गए और देखते-देखते माहौल बिगड़ गया। कैसे भड़की हिंसा? प्रदर्शन के बीच कुछ लोगों ने फैक्ट्री की दीवार गिरा दी। उसके बाद भीड़ में मौजूद उग्र समूह ने निर्माणाधीन परिसर में खड़े दर्जनों वाहनों को आग लगा दी। रिपोर्टों के मुताबिक 10 से 16 वाहन— जिनमें पुलिस की जीपें, मशीनें और निजी गाड़ियाँ शामिल थीं — जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए।स्थिति तेजी से बिगड़ती देखकर पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू-गैस और रबर बुलेट तक का इस्तेमाल करना पड़ा। इस झड़प में कई किसान, पुलिसकर्मी और आसपास मौजूद लोग घायल हो गए। क्यों भड़का इतना विरोध? किसानों का कहना है कि एथेनॉल फैक्ट्री उनके खेतों, भूजल और हवा—तीनों को नुकसान पहुंचा सकती है। उनका डर साफ है: किसानों का तर्क है कि “विकास ज़रूरी है, लेकिन हमारी ज़िंदगी और खेत किस कीमत पर?” फैक्ट्री और प्रशासन का पक्ष फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि यह प्रोजेक्ट Zero Liquid Discharge Technology पर आधारित है, जिसमें गंदा पानी रिसने का खतरा नहीं होगा। कंपनी दावा करती है कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।प्रशासन भी यही कहता है कि सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाएगा। लेकिन ग्रामीणों का भरोसा टूट चुका है—उन्हें लगता है कि वादों की बजाय व्यवहार ज्यादा मायने रखता है। घटना के बाद क्या बदलाव हुए? हिंसा रोकने के लिए जिला प्रशासन ने तुरंत: माहौल अभी भी तनावपूर्ण है, लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है। आगे क्या? स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या फैक्ट्री से ज्यादा बातचीत की कमी है। किसानों को लगता है कि उनकी चिंता को गंभीरता से नहीं लिया गया।यदि कंपनी और प्रशासन, किसानों को पारदर्शिता के साथ भरोसा दिलाए—पर्यावरण परीक्षण, पानी की खपत, कचरा प्रबंधन और स्थानीय रोजगार पर स्पष्ट लिखित गारंटी दे—तो माहौल शांत हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Fire हादसा Thailand में लूथरा ब्रदर्स हिरासत में, हथकड़ी में पहली तस्वीर सामने

गोवा (Goa) में 6 दिसंबर 2025 की रात शुरू हुई एक पार्टी कुछ ही मिनटों में दर्द और अफरा-तफरी का सबसे बड़ा हादसा बन गई। अर्पोरा स्थित Birch by Romeo Lane नाइटक्लब में लगी आग ने 25 लोगों की जान ले ली—कुछ पर्यटक, कुछ कर्मचारी, और कुछ वे लोग जो बस एक खुशगवार रात बिताने आए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—इतना बड़ा क्लब बिना सुरक्षा इंतज़ाम के कैसे चल रहा था? आग कैसे फैली — चंद सेकंड में मची तबाही प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार क्लब के अंदर चल रहे फायर-शो के दौरान एक चिंगारी ने सजावट में लगी ज्वलनशील सामग्री को पकड़ लिया।आग तेजी से फैली और धुआँ इतना घना था कि बाहर निकलने का रास्ता ढूँढना भी मुश्किल हो गया। क्लब में: ये सभी बातें बाद में पुलिस और प्रशासन की शुरुआती रिपोर्ट में सामने आईं। हादसे के बाद असली सवाल: मालिक कहाँ गायब हो गए? क्लब के मालिक सौरभ लुथरा और गौरव लुथरा पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज हुई।लेकिन जांच शुरू होते ही दोनों भाई भारत छोड़कर थाईलैंड पहुँच चुके थे।उनकी फ्लाइट रात में ही बुक कराई गई, जब गोवा में लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस भागदौड़ ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय लोगों तक सभी में गुस्सा बढ़ गया। पासपोर्ट रद्द — सरकार का बड़ा एक्शन गोवा (Goa) पुलिस ने विदेश मंत्रालय (MEA) को दोनों भाइयों के पासपोर्ट रद्द करने की सिफारिश की।सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पासपोर्ट सस्पेंड/इम्पाउंड कर दिए। इसका मतलब साफ है—वह देश से बाहर हैं तो भी वापस लाए जा सकते हैं, और भारत लौटे बिना बचना असंभव है। Interpol का Blue Corner Notice भी जारी किया गया है। प्रशासन की सख़्त कार्रवाई — अवैध निर्माण पर बुलडोज़र हादसे के बाद प्रशासन ने क्लब से जुड़े सभी निर्माणों की जांच शुरू की।कई हिस्सों को अवैध पाया गया, जिन पर कार्रवाई करते हुए बुलडोज़र चलाया गया। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ऐलान किया कि: लोगों की प्रतिक्रिया — सिर्फ दुख नहीं, गुस्सा भी स्थानीय लोग, पर्यटक और क्लब इंडस्ट्री से जुड़े लोग एक ही बात कह रहे हैं:अगर सुरक्षा नियम लागू होते, तो 25 परिवार आज उजड़ते नहीं। कई लोग क्लब के पुराने वीडियो साझा कर रहे हैं, जिनमें भीड़ भरे माहौल में सुरक्षा इंतज़ामों की कमी साफ दिखती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Surya Kant

CJI Surya Kant Remarks on Rohingya 44 Former Judges का जोरदार समर्थन और विवाद

दिसंबर 2025 में भारत की सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़े एक मामले ने सुर्खियां बटोरीं। इस मामले में Chief Justice of India (CJI) Surya Kant की टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। कोर्ट ने रोहिंग्या प्रवासियों के कानूनी दर्जे और भारत में उनकी स्थिति पर सवाल उठाए, जिससे कुछ पूर्व न्यायाधीश और कानूनी विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई। क्या हुआ था: CJI की टिप्पणी सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की पीठ ने पूछा कि क्या ऐसे लोग, जो भारत में अनधिकृत रूप से आए हैं, उन्हें “रेड कार्पेट” बिछाकर स्वागत करना चाहिए। इस पर कई पूर्व जजों और वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि इस तरह के सवाल शरणार्थियों की गरिमा और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ हैं। उनके अनुसार, कोर्ट को ऐसे मामलों में संवैधानिक और मानवाधिकार दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। 44 Former Judges का समर्थन इस विवाद के जवाब में 44 पूर्व न्यायाधीशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर CJI सूर्यकांत के खिलाफ “motivated campaign” को गलत बताया। उनके प्रमुख बिंदु थे: पूर्व जजों ने जोर देकर कहा कि अदालत का काम संवैधानिक दायित्व और मानव गरिमा दोनों को ध्यान में रखकर न्याय करना है। क्यों है यह विवाद महत्वपूर्ण यह मामला सिर्फ एक टिप्पणी का विवाद नहीं है। यह मानवाधिकार, राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन पर सवाल खड़ा करता है। भारत में शरणार्थियों के लिए कोई स्थायी कानून नहीं है, इसलिए अदालतें इस पर निर्णय लेते समय संवेदनशीलता और विवेक दोनों दिखाती हैं। साथ ही, यह विवाद यह भी दिखाता है कि: CJI सूर्यकांत के विवादित बयान और 44 पूर्व जजों के समर्थन ने एक बार फिर न्यायपालिका में संतुलन, स्वतंत्रता और संवैधानिक जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। यह मामला हमें याद दिलाता है कि शरणार्थियों और प्रवासियों के साथ न्याय करते समय मानवता, संवैधानिक अधिकार और कानूनी विवेक को एक साथ रखना कितना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Australia

Australia Social Media Rules बच्चों पर Facebook, Instagram, TikTok Ban

Australia में 10 दिसंबर 2025 से एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ है। अब 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना सकते। यह नियम किसी छोटे शहर या राज्य में नहीं, बल्कि पूरे देश में लागू हुआ है। इसे दुनिया का पहला ऐसा कदम माना जा रहा है जहां एक सरकार ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर इतनी सख्ती से नियंत्रण कर रही है। क्यों लिया गया यह फैसला? कई सालों से विशेषज्ञ और माता-पिता एक ही बात कह रहे थे— “सोशल मीडिया बच्चों के दिमाग और आत्मविश्वास पर असर डाल रहा है।” इसी चिंता के बीच सरकार ने कानून बनाया। उद्देश्य साफ है: सरकार का कहना है कि बड़े प्लेटफ़ॉर्म बच्चों से मुनाफा कमाते हैं, लेकिन जिम्मेदारी नहीं लेते। नया नियम यही संतुलन बदलने की कोशिश है। किन प्लेटफ़ॉर्म्स पर बैन? प्रतिबंध सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप्स पर लागू है: अगर कोई प्लेटफ़ॉर्म नियम तोड़ता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। लाखों अकाउंट बंद: बच्चों की मिलीजुली प्रतिक्रिया नियम लागू होते ही लाखों किशोरों के अकाउंट बंद या हटाए गए।बहुत से बच्चों ने आखिरी पोस्ट डाले: “मुझे दोस्तों की याद आएगी।”“ये अंत जैसा लग रहा है, लेकिन शायद अच्छा भी हो।” किसी ने राहत की सांस ली, तो किसी को गुस्सा आया।पर एक बात स्पष्ट थी — यह बदलाव छोटा नहीं है। माता-पिता क्या कह रहे हैं? कुछ माता-पिता ने राहत महसूस की: “कम फोन, ज्यादा पढ़ाई… शायद अब घर में शांति होगी।” दूसरी तरफ कुछ परिवार चिंतित भी हैं: “कई बच्चे ऑनलाइन मदद और दोस्ती पाते हैं। पूरी तरह बैन करना सही तो नहीं लगता।” यह द्वंद्व पूरे देश में देखा जा रहा है। क्या इससे बच्चे छुपकर इंटरनेट इस्तेमाल करेंगे? विशेषज्ञों को डर है: यानी, समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती — बस दिशा बदलती है। क्या यह दुनिया के लिए उदाहरण बनेगा? दुनिया भर की नजरें अब ऑस्ट्रेलिया पर हैं। किसी भी तरह, यह कदम डिजिटल दुनिया के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट है। आगे क्या? अगले महीनों में देखा जाएगा: सच यह है:सोशल मीडिया सिर्फ ऐप नहीं है—यह आज के बच्चों का सामाजिक जीवन भी है।उसके दरवाज़े बंद करना आसान है, लेकिन उसकी जगह क्या आएगा — यह बड़ा सवाल है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Goa

Goa Night Club Fire गोवा क्लब हादसा, 25 मौतें Luthra Brothers फरार, Ajay Gupta Arrest

गोवा (Goa) की सर्द रात, तेज़ संगीत, भरी भीड़ और अचानक उठती आग।6 दिसंबर 2025 की वह रात कभी नहीं भूली जाएगी।अर्पोरा के मशहूर नाइट क्लब ‘Birch by Romeo Lane’ में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते 25 जिंदगियाँ छीन लीं।यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही की दर्दनाक कहानी बन गया। आग कैसे लगी? जांच के शुरुआती निष्कर्षों में सामने आया कि: धुआँ इतनी तेजी से फैला कि कई लोग भाग ही नहीं पाए।आँखों के सामने जलती हुई ज़िंदगियाँ —जो बाहर निकले, उनकी आवाज़ आज भी कांपती है। क्लब का मालिक कौन? इस नाइट क्लब का संचालन Luthra Brothers – सौरभ और गौरव लूथरा करते थे।उनके साथ Ajay Gupta और Surinder Khosla भी पार्टनर बताए जाते हैं। हादसे के तुरंत बाद: Ajay Gupta Arrest – पहली प्रतिक्रिया दिल्ली में पुलिस ने Ajay Gupta को हिरासत में लिया।उनका कहना था: “मैं सिर्फ पार्टनर हूँ… मैं कुछ नहीं जानता।” लेकिन जांच टीम के पास ऐसे कागज़ हैं जिनसे पता चलता है कि मालिकाना हिस्सेदारी तीनों के पास थी और लाइसेंस के मामले में गंभीर सवाल हैं। उनके खिलाफ Look Out Circular पहले से जारी था। सरकार की सख्त कार्रवाई हादसे के बाद गोवा सरकार तुरंत हरकत में आई: यह कार्रवाई सिर्फ गोवा तक सीमित नहीं रही —उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी अपने यहाँ सुरक्षा जांच शुरू कर दी। मानवीय पहलू: अंदर कैसा था? बचे हुए लोग बताते हैं: कई परिवारों ने एक साथ अपने लोग खो दिए।हंसी और संगीत की जगह अब सन्नाटा और सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल: ज़िम्मेदार कौन? यह हादसा सिर्फ आग की वजह से नहीं हुआ।बड़ी वजहें थीं: लोग पूछ रहे हैं: आगे क्या? अब सबकी नज़रें हैं: हादसा बहुत कुछ बदल सकता है।ब्रेकिंग न्यूज़ के पीछे असली कहानी है — खोई हुई जिंदगियाँ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Election Commission under Pressure? राहुल बोले BJP फायदा उठा रही है, संस्थाएँ Neutral नहीं रहीं

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि देश की अहम संस्थाएँ आज पहले जितनी स्वतंत्र नहीं रह गईं। राहुल गांधी का आरोप है कि RSS सभी प्रमुख संस्थाओं पर नियंत्रण चाहता है और इसी दिशा में लगातार कदम बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि Election Commission को भी “कब्जे में लेने की कोशिश” हो रही है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। राहुल गांधी का मानना है कि अगर चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ेगा, तो इसका सीधा असर लोकतंत्र पर पड़ेगा। “चुनाव आयोग तटस्थ नहीं दिख रहा” – राहुल गांधी राहुल गांधी के मुताबिक चुनाव लोकतंत्र की रीढ़ होते हैं। उन्होंने कहा कि: “अगर संस्थाएँ neutral नहीं रहेंगी, तो देश में free and fair elections कैसे होंगे? जब Election Commission पर दबाव होगा, तो विपक्ष के लिए मैदान बराबर नहीं रहेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में भाजपा को फायदा दिलाने के लिए संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या आयोग की तरफ से कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है। लोकतंत्र की चिंता जताई राहुल गांधी ने कहा कि संस्थाओं का उद्देश्य संविधान की रक्षा करना है, न कि किसी संगठन या पार्टी की सुविधा देना। उनका कहना है: “संस्थाएँ strong और independent रहनी चाहिए। तभी लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा।” उन्होंने मीडिया, एजेंसियों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष की अपील – “देश को जागरूक रहना होगा” राहुल गांधी ने नागरिकों, सोशल संगठनों और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NDA

PM Modi NDA Meeting Highlights बिहार की जीत पर नई Energy और Big Plans

बिहार चुनाव के शानदार नतीजों के बाद संसद भवन में हुई NDA Parliamentary Party Meeting पूरी तरह उत्साह और भरोसे के माहौल में हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक में खुलकर कहा कि बिहार की जीत ने उन्हें “नई ऊर्जा और नया आत्मविश्वास” दिया है। उन्होंने सांसदों को याद दिलाया कि जनता ने उन्हें केवल वोट नहीं दिया, बल्कि उम्मीदें दी हैं, और इन उम्मीदों को पूरा करने के लिए अब तेज़ और साफ काम की ज़रूरत है। बिहार में NDA की जीत: भरोसे की कहानी बिहार में NDA की जीत: भरोसे की कहानी हाल ही में हुए चुनावों में NDA ने 243 में से 202 सीटें प्राप्त कीं। यह नतीजे दिखाते हैं कि लोगस्थिरता चाहते हैंविकास चाहते हैंऔर गठबंधन पर भरोसा करते हैं बैठक में बिहार के सभी सांसद मौजूद रहे। माहौल उत्साहपूर्ण था – किसी पार्टी के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि जीत की चमक थी। PM Modi का साफ संदेश: अनुशासन पहले अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने एक बात बहुत स्पष्ट कही: “अनुशासन ही हमारी ताक़त है। नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।” यह संदेश सिर्फ चेतावनी नहीं था, बल्कि दिशा भी था।उन्होंने कहा कि अब प्रदर्शन और परिणाम ही सबसे बड़ा पैमाना होंगे। Action और Accountability: सरकार का अगला फोकस बैठक में यह भी सामने आया कि इन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, ₹830 करोड़ से अधिक की राशि तुरंत जारी किए जाने का उल्लेख किया गया। यह बताता है कि केंद्र जनता से जुड़े फैसलों में देर नहीं करना चाहता। NDA Unity: BJP + JDU का तालमेल बिहार की राजनीति में एक समय अनिश्चितता थी, लेकिन अब तस्वीर साफ है। नीतीश कुमार सरकार को चलाते हैंबीजेपी अधिक सक्रिय और मज़बूत भूमिका में दिख रही है PM मोदी ने सहयोगी दलों को इशारे में याद दिलाया कि Parliament + Meeting: दो मोर्चों पर सक्रिय PM उसी दिन संसद में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर भी विशेष चर्चा चल रही थी।PM Modi दोनों जगह मौजूद रहे। यह दिखाता है कि राजनीतिक ज़िम्मेदारी और संसदीय परंपरा – दोनों को वे बराबर महत्व देते हैं। आगे क्या? विकास की रफ्तार बढ़ेगी बैठक का सार एक ही था: काम, काम और सिर्फ काम। आने वाले महीनों में सब तेज़ होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री का संदेश सरल था: “जनता ने हमें प्रेम दिया है। अब हमारी बारी है कि हम परिणाम दें।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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असीम मुनीर

Indo-Pak Border Alert असीम मुनीर बोले – हमला हुआ तो जवाब और तेज़ होगा

पाकिस्तान के चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेन्स फ़ोर्सेज़ (CDF) और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने हाल ही में एक बयान दिया जिसने Indo-Pak संबंधों में फिर से हलचल पैदा कर दी। उन्होंने कहा कि अगर भारत कोई भी “आक्रामक कदम” उठाता है, तो पाकिस्तान की प्रतिक्रिया “तेज़, सख़्त और प्रभावी” होगी। यह बयान सिर्फ़ सैन्य चेतावनी नहीं, बल्कि एक राजनैतिक संकेत भी माना जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान की सेना एक नए ढांचे में काम करना शुरू कर चुकी है। New Defence System: तीनों सेनाओं की संयुक्त कमान हाल में हुए सैन्य सुधारों के बाद: अब एक ही unified command के तहत काम करेंगी। इसका leadership असीम मुनीर के पास है। इसे पाकिस्तान में historic change कहा जा रहा है।विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे: निर्णय लेने की स्पीड बढ़ेगीऑपरेशन में तालमेल बेहतर होगासीमा सुरक्षा मजबूत होगी यानी अगर कोई तनाव बढ़ा, तो प्रतिक्रिया ज़्यादा संगठित और तेज़ हो सकती है। असीम मुनीर ने क्या कहा? अपने Address में मुनीर ने मुख्य बातें कही: उनका स्वर confident था, और संदेश साफ – आवाज़ उठाओगे तो जवाब तैयार है। India की प्रतिक्रिया कैसी रही? भारत की तरफ़ से इस बयान को ज़्यादातर नेताओं ने political rhetoric बताया।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस तरह के बयान पाकिस्तान की कमज़ोर स्थिति दिखाते हैं। अन्य analysts ने सुझाव दिया कि भारत को: military strengthborder securitydiplomatic strategy पर ध्यान रखना चाहिए, और बिना वजह तनाव नहीं बढ़ाना चाहिए। Why This Matters: यह सिर्फ़ बयान नहीं, संकेत भी है दक्षिण एशिया में स्थिति संवेदनशील है। दोनों देश: ऐसे में किसी भी उकसावे से हालत बिगड़ सकती है। लेकिन एक मानवीय पहलू भी है – सीमा के दोनों तरफ़ लोग शांति चाहते हैं।लोगों की पहली इच्छा होती है: यही कारण है कि हर बड़े बयान के पीछे चिंता भी छिपी रहती है। Future Perspective: आगे क्या होगा? कुछ चीजें देखने लायक होंगी: क्या Pakistan border पर deployment या drill बढ़ाता है?भारत की कूटनीति क्या रुख लेती है?क्या global powers mediation में आएंगी? अगर दोनों देश संवाद करें, तो tension कम हो सकता है।लेकिन अगर बयानबाज़ी बढ़ी, तो हालात खतरनाक भी हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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7वें दिन भी 250+ flight रद्द, IndiGo पर लोगों की परेशानी

7वें दिन भी 250+ flight रद्द, IndiGo पर लोगों की परेशानी

IndiGo का संकट सातवें दिन भी थमा नहीं — आज देशभर में 250 से भी ज़्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं। लाखों यात्री अपने गंतव्य के लिए फंसे हुए हैं, सामान और रिफंड की स्थिति अभी तक अनिश्चित। Supreme Court of India ने सुनवाई से किया इनकार यात्रियों ने रद्द उड़ानों और देरी से हुए नुकसान के लिए चाही थी तुरंत न्याय — लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम एयरलाइन नहीं चलाते, इसलिए सुनवाई नहीं करेंगे।” यह कहकर अदालत ने मामले को अस्वीकृत कर दिया, जिससे यात्रियों की उम्मीदें टूट गईं। यात्री परेशान — लंबा इंतजार, रिफंड का इंतज़ार, और भविष्य अनिश्चित इस संकट ने न सिर्फ यात्रियों को प्रभावित किया है, बल्कि उन परिवारों को भी परेशानी में डाला है, जो अचानक मिले या लौटने वाले थे। समस्या की जड़ — सिर्फ रद्द उड़ान नहीं, प्रणाली में खामियां विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल एक-दो दिन की नहीं है। इंडिगो में पायलट और क्रू की कमी, नई ड्यूटी नियमों का जल्दबाजी में लागू होना, और शेड्यूलिंग में घबराहट — इन सब कारणों ने मिलकर आज का संकट खड़ा किया है। कई यात्रियों ने बताया कि देरी-रद्दीकरण और खराब व्यवस्था ने उनकी ज़िंदगियाँ प्रभावित कर दी हैं — ऐसा लग रहा है कि कोई भविष्य का भरोसा नहीं है। अब आगे क्या? — जवाबदेही, सुधार और यात्रियों की आवाज़ हमें उम्मीद है कि इंडिगो-संकट जितनी भी बड़ी हो — लेकिन न्याय, पारदर्शिता और सुधार की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vande Mataram

Vande Mataram Special Session वंदे मातरम् के 150 साल संसद में आवाजें और भावनाएँ

देश की संसद में सोमवार का दिन इतिहास की यादों से भरा रहा। वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर लोकसभा में स्पेशल डिस्कशन (Special Discussion) रखा गया, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। हर वक्ता के लिए यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि आजादी की भावना और भारतीय पहचान का प्रतीक था। 150 Years of Vande Mataram: भावनाएँ, इतिहास और बहस जब पीएम मोदी ने बोलना शुरू किया, सदन शांत था। उन्होंने कहा कि इस गीत ने आज़ादी की लड़ाई में नवीन ऊर्जा दी और भारतीयों के दिलों में स्वाभिमान जगाया।बहस के दौरान कई बार इस बात का जिक्र आया कि वंदे मातरम् के नारे से अंग्रेजों की कफन कस जाती थी, और इसके सुर स्वतंत्रता सेनानियों को हिम्मत देते थे। विपक्ष की तरफ से राहुल गांधी और अन्य सांसदों ने भी विचार रखे।उनका कहना था कि गीत की महत्ता पर कोई सवाल नहीं, लेकिन किसी भी नागरिक को इसे गाने के लिए मजबूर करना, संविधान की भावना से मेल नहीं खाता। विवाद क्यों? इसे लेकर देश में हमेशा दो दृष्टिकोण रहे हैं: समर्थन में चिंता में कई नेताओं ने कहा कि प्यार और सम्मान मजबूरी से नहीं आते।यह ऐसा गीत है जिसे दिल से गाया जाए तो ही उसकी सुंदरता सामने आती है। 10 घंटे की चर्चा, पर सवाल वही पूरे दिन चली चर्चा के बाद भी सवाल वही रहा —क्या वंदे मातरम् को Compulsory बनाना चाहिए? अधिकांश वक्ताओं ने स्वीकार किया कि: संसद में यह बार-बार कहा गया कि भारत की ताकत उसकी विविधता (Diversity) है।यही वह देश है जहां कई धर्म, भाषाएँ और विचार एक साथ चलते हैं। Human Touch: भावनाओं में भी नीति छुपी है बहुत से सांसदों के चेहरे पर भावनाएँ साफ थीं।जब उन्होंने अपने बचपन की स्मृतियाँ, स्कूल की परेड या स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम याद किए, तो लगा कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जुड़ाव भी है। एक वरिष्ठ सांसद ने कहा: “जब पहली बार मैंने इसे स्कूल में गाया, मुझे लगा कि मैं सच में भारत मां के लिए कुछ कर रहा हूँ। आज भी वही अहसास जीवित है।” इस तरह की छोटी बातें बहस को मानवीय स्पर्श देती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MI vs CSK: वानखेड़े में संजू सैमसन का तूफान, 101 रन की धमाकेदार पारी से बनाया यूनिक रिकॉर्ड

MI vs CSK: वानखेड़े में संजू सैमसन का तूफान, 101 रन की धमाकेदार पारी से बनाया यूनिक रिकॉर्ड

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए मुकाबले MI vs CSK में एक बार फिर क्रिकेट फैंस को बड़ा रोमांच देखने को मिला। इस मैच में संजू सैमसन ने अपनी बल्लेबाजी से पूरी तरह मैदान पर तूफान मचा दिया। उनकी शानदार पारी ने मैच का रुख ही बदल दिया। 10 चौके और 6 छक्कों से सजी पारी संजू सैमसन ने इस मैच में बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 10 चौके और 6 गगनचुंबी छक्के लगाए। उन्होंने सिर्फ कुछ ही गेंदों में गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं और दर्शकों को खूब एंटरटेन किया। 101 रनों की शानदार शतकीय पारी सैमसन ने 101 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, जो इस मैच की सबसे बड़ी खासियत रही। उनकी यह पारी टीम के लिए बेहद अहम साबित हुई और स्कोर को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। बनाया यूनिक रिकॉर्ड इस विस्फोटक पारी के साथ संजू सैमसन ने एक खास रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। वानखेड़े में उनका यह प्रदर्शन लंबे समय तक याद रखा जाएगा, क्योंकि उन्होंने दबाव में आकर बेहतरीन बैटिंग का नमूना पेश किया। वानखेड़े में फैंस का जोश हाई मैच के दौरान स्टेडियम में मौजूद फैंस लगातार सैमसन के शॉट्स पर झूमते नजर आए। हर चौका और छक्का दर्शकों के लिए किसी जश्न से कम नहीं था। मैच का रुख बदलने वाली पारी संजू सैमसन की यह पारी सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने पूरी मैच की दिशा बदल दी और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान: BJP या ममता बनर्जी, किसे मिलेगा फायदा?

पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान: BJP या ममता बनर्जी, किसे मिलेगा फायदा?

पश्चिम बंगाल में इस बार चुनावी माहौल काफी गर्म है। वोटिंग के दौरान अब तक का सबसे ज्यादा मतदान दर्ज किया गया है, जिससे राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने ज्यादा मतदान का फायदा आखिर किसे मिलेगा — भारतीय जनता पार्टी (BJP) को या फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को? रिकॉर्ड वोटिंग से बढ़ी सियासी टेंशन इस बार मतदान प्रतिशत पिछले सभी चुनावों की तुलना में ज्यादा देखा गया है। कई इलाकों में लोगों ने बड़ी संख्या में वोट डाले, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि जनता इस बार बदलाव या फिर मजबूती से वापसी के मूड में है। BJP की उम्मीदें क्या कहती हैं? BJP का मानना है कि ज्यादा मतदान उनके पक्ष में जा सकता है। पार्टी का दावा है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उन्हें अच्छा समर्थन मिल रहा है। खासकर युवा और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं पर BJP की नजर है। ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ वहीं, ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC का कहना है कि यह वोटिंग उनके जनाधार की मजबूती को दिखाती है। TMC को भरोसा है कि ग्रामीण इलाकों और महिलाओं का समर्थन उन्हें फिर से सत्ता तक पहुंचा सकता है। जनता का मूड बना सबसे बड़ा फैक्टर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ ज्यादा वोटिंग से नतीजों का अंदाजा लगाना आसान नहीं है। असली खेल यह है कि यह वोट किस दिशा में गया है — बदलाव के लिए या फिर मौजूदा सरकार को बनाए रखने के लिए। अब निगाहें नतीजों पर अब सभी की नजरें वोटों की गिनती पर टिकी हैं। नतीजे ही तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता पर कौन राज करेगा — BJP या फिर ममता बनर्जी की सरकार एक बार फिर वापसी करेगी।
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West Bengal Phase 1 & Tamil Nadu Election 2026: शाम 5 बजे तक बंपर वोटिंग, बंगाल में 89% और तमिलनाडु में 82% मतदान दर्ज

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड वोटिंग। शाम 5 बजे तक बंगाल में 89% और तमिलनाडु में 82% मतदान दर्ज, जानें पूरी अपडेट। देश में लोकतंत्र का उत्सव, रिकॉर्ड वोटिंग ने चौंकाया 23 अप्रैल 2026 को देश के दो बड़े राज्यों पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनाव के पहले चरण ने रिकॉर्ड बना दिया।शाम 5 बजे तक पश्चिम बंगाल में 89% और तमिलनाडु में 82% मतदान दर्ज किया गया, जो इस चुनाव को बेहद खास बना रहा है। सुबह से ही दिखा उत्साह, महिलाओं और युवाओं की लंबी कतारें सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग में शुरुआत से ही जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।मतदान केंद्रों के बाहर महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की लंबी कतारें नजर आईं, जिसने लोकतंत्र की ताकत को फिर साबित किया। बंगाल में छुट-पूट हिंसा के बीच भी भारी मतदान जहां एक तरफ रिकॉर्ड वोटिंग हुई, वहीं पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं।मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जैसे क्षेत्रों में झड़प, बमबाजी और राजनीतिक तनाव की खबरें आईं। इसके बावजूद सुरक्षा बलों की तैनाती के चलते मतदान प्रक्रिया जारी रही और लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। तमिलनाडु में शांतिपूर्ण मतदान, जनता का भरोसा कायम तमिलनाडु में मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हुआ।यहां 234 सीटों पर एक ही चरण में वोटिंग हो रही है और भारी मतदान ने यह संकेत दे दिया है कि जनता बदलाव या स्थिरता—जो भी चाहती है—उसे मजबूती से दर्ज कर रही है। किसके बीच है मुख्य मुकाबला? दोनों राज्यों के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। बड़े नेताओं की अपील का असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं ने मतदाताओं से ज्यादा से ज्यादा मतदान करने की अपील की थी, जिसका असर अब आंकड़ों में साफ दिख रहा है। रिकॉर्ड वोटिंग, अब नतीजों का इंतजार बंपर वोटिंग ने साफ कर दिया है कि इस बार जनता पूरी तरह सक्रिय है।अब सभी की नजरें नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि किसके हाथ में सत्ता जाएगी।
Bhopal में ‘Samarth-Bharat-Conclave 2026’: युवाओं को स्किल, स्टार्टअप और AI आधारित शिक्षा का दिया बड़ा संदेश

Bhopal में ‘Samarth-Bharat-Conclave 2026’: युवाओं को स्किल, स्टार्टअप और AI आधारित शिक्षा का दिया बड़ा संदेश

Bhopal के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘Samarth-Bharat-Conclave 2026’ में स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप और AI आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया। AISECT और Scope Global University की पहल। राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में ‘समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन AISECT और Scope Global University द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिसमें स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप और इनोवेशन को लेकर बड़े स्तर पर चर्चा हुई।र्यक्रम में मुख्य रूप से श्री संतोष चौबे (Chairman AISECT & Chancellor, Rabindranath Tagore University, Bhopal) उपस्थित रहे।वहीं विशेष अतिथि के रूप में श्री राव उदय प्रताप सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री, मध्यप्रदेश सरकार ने शिरकत की। दोनों ही नेताओं ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और स्किल आधारित शिक्षा अपनाने का संदेश दिया।कॉन्क्लेव में AI (Artificial Intelligence) और एक्सपीरिएंशियल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण MoU (समझौता) किया गया।यह MoU AISECT Group of Universities और Wadhwani Foundation के बीच हुआ, जिसका उद्देश्य इंडस्ट्री के अनुसार AI आधारित शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को मजबूत करना है। इस पहल को “विकसित भारत” की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।कार्यक्रम में Entrepreneur of the Year Awards भी दिए गए, जिनके माध्यम से नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। पुरस्कार इन श्रेणियों में प्रदान किए गए: ETC ServicesAISECT Seva KendraPlacements & ApprenticeshipSponsored Programs में Quality TrainingBrainy Bear Pre-school इन अवॉर्ड्स के जरिए उन लोगों को पहचान दी गई, जो देश में रोजगार और उद्यमिता को नई दिशा दे रहे हैं।युवाओं को मिला स्टार्टअप और रोजगार का मंत्र कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने, डिजिटल स्किल्स सीखने और नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।बताया गया कि आने वाला समय स्किल और इनोवेशन का है, जहां केवल डिग्री नहीं बल्कि कौशल ही सफलता की कुंजी बनेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
MI vs CSK

Mumbai Indians vs Chennai Super Kings आज का मैच बना फैंस के लिए सबसे बड़ा सरप्राइज

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में आज क्रिकेट फैंस को एक बार फिर से सबसे बड़े मुकाबलों में से एक देखने को मिलने वाला है। Mumbai Indians (MI) और Chennai Super Kings (CSK) के बीच यह भिड़ंत सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि भावनाओं, प्रतिष्ठा और पुराने राइवलरी की टक्कर है। फैंस के बीच इस मुकाबले को लेकर खासा उत्साह है, क्योंकि MI और CSK जब भी आमने-सामने आते हैं, मैच आखिरी ओवर तक रोमांच बनाए रखता है। MI vs CSK: क्यों खास है यह मुकाबला? Mumbai Indians और Chennai Super Kings को IPL की दो सबसे सफल और बड़ी टीमों में गिना जाता है। आज का मैच प्रीव्यू आज के मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। पिच रिपोर्ट और मैच कंडीशन पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जा रही है, जिससे बड़ा स्कोर देखने को मिल सकता है। कौन है आज का फेवरेट? अगर मौजूदा फॉर्म और टीम बैलेंस की बात करें तो: इसलिए यह कहना मुश्किल है कि जीत किसके हाथ लगेगी, मुकाबला पूरी तरह 50-50 है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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