भारी तबाही मचाने वाला चक्रवाती तूफान Cyclone Montha मंगलवार शाम आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के तटीय इलाके में लैंडफॉल कर चुका है। काकीनाड़ा और कलिंगपट्टनम (Kakinada–Kalingapatnam) के बीच यह तूफान समुद्र तट से टकराया, जहां हवाओं की रफ्तार 90 से 110 km/h तक रही।भारत मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि Cyclone Montha अब कमजोर होकर “Cyclonic Storm” में तब्दील हो गया है, लेकिन इसके प्रभाव से Andhra, Odisha, Telangana, MP, UP और Rajasthan में भारी बारिश जारी है। Cyclone Montha Landfall के बाद स्थिति लैंडफॉल के बाद आंध्र प्रदेश के कई तटीय जिलों—पूर्वी गोदावरी, कृष्णा, पश्चिम गोदावरी और काकीनाड़ा—में बिजली आपूर्ति ठप है और पेड़ गिरने से सड़कों पर जाम लग गया।IMD ने कहा है कि तूफान के कमजोर पड़ने के बावजूद अगले 24 घंटे तक Heavy Rainfall और Thunderstorm का खतरा बना रहेगा। 1 की मौत, 40,000 से ज्यादा लोग शेल्टर में शिफ्ट आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के मकानगुडेम गांव में एक व्यक्ति की मौत तब हुई जब तेज़ हवाओं में पेड़ गिर गया।राज्य सरकार ने अब तक 40,000 से ज्यादा लोगों को राहत शिविरों (Relief Camps) में पहुंचाया है।ओडिशा के गंजाम, गजपति, कोरापुट जिलों में लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। Rain Alert: कई राज्यों में भारी बारिश Cyclone Montha का असर अब ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया है।IMD ने चेतावनी दी है कि बुधवार और गुरुवार को इन राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) हो सकती है। किसानों को बड़ा नुकसान (Crop Damage Report) सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, Cyclone Montha से आंध्र प्रदेश में लगभग Power & Transport प्रभावित IMD Weather Update: अभी भी खतरा बरकरार IMD ने नए अपडेट में कहा है कि Cyclone Montha धीरे-धीरे कमजोर होकर Deep Depression में बदल सकता है, लेकिन इसके बाद भी कई राज्यों में बारिश और तूफान का असर रहेगा।Red Alert जारी किया गया है — Climate Change और Cyclone की बढ़ती आवृत्ति मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के बढ़ते तापमान की वजह से बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की संख्या और तीव्रता बढ़ी है।Cyclone Montha भी उसी का परिणाम है, जिसने कुछ ही घंटों में “Deep Depression” से “Severe Cyclone” का रूप ले लिया। Cyclone Montha ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत के तटीय इलाकों में आपदा प्रबंधन और Early Warning System को और मजबूत करने की जरूरत है।सरकारें राहत कार्य में जुटी हैं, लेकिन असली चुनौती अब फसलों के नुकसान और पुनर्वास की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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