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MP Waqf Board: पहली बार वक्फ बोर्ड में 2 हिंदू सदस्यों की नियुक्ति, मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला

MP Waqf Board: पहली बार वक्फ बोर्ड में 2 हिंदू सदस्यों की नियुक्ति, मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के वक्फ बोर्ड को लेकर एक अहम फैसला लिया है। पहली बार दो हिंदू सदस्यों को वक्फ बोर्ड में शामिल किया गया है। सरकार ने मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव को बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है। पहली बार हुआ ऐसा फैसला मध्य प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है जब वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को नियुक्त किया गया है। सरकार का कहना है कि बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। कौन हैं नए सदस्य? सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार: दोनों की नियुक्ति के बाद बोर्ड के कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका रहने की उम्मीद जताई जा रही है। फैसले को लेकर शुरू हुई चर्चा सरकार के इस निर्णय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समर्थकों का कहना है कि इससे बोर्ड के कामकाज में विविधता और पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं, विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस फैसले पर सवाल भी उठाए हैं। हालांकि, सरकार ने इसे प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया निर्णय बताया है। वक्फ बोर्ड क्या करता है? वक्फ बोर्ड का मुख्य कार्य वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन, संरक्षण और उनके उचित उपयोग की निगरानी करना होता है। इसके अलावा धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए बनाई गई वक्फ संपत्तियों के संचालन से जुड़े मामलों पर भी बोर्ड काम करता है।
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Khamenei Funeral: 13 देशों ने अंतिम संस्कार से बनाई दूरी, क्या Trump के दबाव का असर? जानिए पूरा मामला

Khamenei Funeral: 13 देशों ने अंतिम संस्कार से बनाई दूरी, क्या Trump के दबाव का असर? जानिए पूरा मामला

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 13 देशों ने इस समारोह में अपने शीर्ष प्रतिनिधि नहीं भेजे, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या इसके पीछे अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति या कूटनीतिक दबाव का असर है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि इन देशों ने केवल अमेरिकी दबाव की वजह से दूरी बनाई। क्यों चर्चा में है यह मामला? रिपोर्ट्स के अनुसार, कई देशों ने अंतिम संस्कार में उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि अमेरिका की ईरान नीति और पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों का इस फैसले पर असर पड़ा हो सकता है। क्या वाकई Trump का दबाव था? अब तक अमेरिका की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिसमें यह कहा गया हो कि देशों पर अंतिम संस्कार में शामिल न होने का दबाव बनाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश का प्रतिनिधिमंडल भेजना या न भेजना उसके अपने कूटनीतिक, सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े निर्णयों पर भी निर्भर करता है। इसलिए इसे केवल एक कारण से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। किन देशों ने दूरी बनाई? मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि 13 देशों ने उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि नहीं भेजे। हालांकि, सभी देशों की आधिकारिक सूची और उनके फैसले के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। कई देशों ने अभी तक इस विषय पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। मध्य पूर्व की राजनीति पर असर ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। ऐसे में खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कूटनीतिक संकेतों को भी वैश्विक राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में विभिन्न देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं इस मुद्दे को और स्पष्ट कर सकती हैं।
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PoK में पाकिस्तानी फोर्स ने लोगों पर गोलियां चलाईं:पाकिस्तान सरकार के खिलाफ 40 हजार प्रदर्शनकारी जुटे थे; कई लोग घायल

इस्लामाबाद/मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान तनाव बढ़ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए, जिसके बाद सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति बन गई। इस दौरान कथित तौर पर फायरिंग हुई, जिसमें कई लोगों के घायल होने की खबर है। 40 हजार से ज्यादा लोग प्रदर्शन में शामिल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सरकार की नीतियों के विरोध में करीब 40 हजार प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर रैली निकाली और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। फायरिंग में कई लोगों के घायल होने की खबर प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने पर सुरक्षा बलों द्वारा गोली चलाए जाने के दावे किए जा रहे हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं। हालांकि, घायलों की आधिकारिक संख्या अभी तक जारी नहीं की गई है। इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है और हालात पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। सरकार की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार इस घटना को लेकर पाकिस्तान सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है। वहीं, स्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों के आधार पर मामले की अलग-अलग जानकारियां सामने आ रही हैं।
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MP Weather Update: मध्य प्रदेश में मानसून का रौद्र रूप, छिंदवाड़ा में 67 मिमी और मंडला में 54 मिमी बारिश, कई जिलों में अलर्ट

MP Weather Update: मध्य प्रदेश में मानसून का रौद्र रूप, छिंदवाड़ा में 67 मिमी और मंडला में 54 मिमी बारिश, कई जिलों में अलर्ट

भोपाल: मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा बारिश छिंदवाड़ा में 67 मिमी और मंडला में 54 मिमी रिकॉर्ड की गई। लगातार हो रही बारिश से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कई क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई है। इन जिलों में हुई अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, छिंदवाड़ा और मंडला के अलावा बालाघाट, सिवनी, जबलपुर, डिंडोरी, नरसिंहपुर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। लगातार बारिश के कारण कई नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। कुछ इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने से किसानों को राहत भी मिली है। अगले 48 घंटे रहेंगे अहम भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में अगले 48 घंटों तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। खासकर पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जिलों में बारिश का असर अधिक देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण प्रदेश में लगातार बारिश का दौर बना हुआ है। प्रशासन अलर्ट मोड पर भारी बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि तेज बारिश के दौरान नदी-नालों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें तथा मौसम विभाग की सलाह का पालन करें।
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Uddhav Thackeray vs BJP: मंदिर दान विवाद पर उद्धव का हमला, हिंदुत्व के मुद्दे पर सरकार को घेरा

Uddhav Thackeray vs BJP: मंदिर दान विवाद पर उद्धव का हमला, हिंदुत्व के मुद्दे पर सरकार को घेरा

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिली है। Uddhav Thackeray ने मंदिर दान विवाद को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए हिंदुत्व के एजेंडे पर भी निशाना साधा। भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि मंदिरों से जुड़े दान और प्रबंधन को लेकर सरकार की भूमिका पारदर्शी नहीं है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे जनता का ध्यान असली समस्याओं से भटकाया जा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच Bharatiya Janata Party की ओर से भी जवाबी बयान आने की संभावना है, जिससे राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है। हिंदुत्व के मुद्दे पर बढ़ी बहस उद्धव ठाकरे ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदुत्व को लेकर जो बातें की जाती हैं, उनका ज़मीनी स्तर पर पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने पारदर्शिता और धार्मिक संस्थानों के सही प्रबंधन की मांग की। राजनीतिक माहौल और गरमाया इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।
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महिला टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराकर सातवीं बार खिताब जीता।

महिला टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराकर सातवीं बार खिताब जीता।

ICC Women’s T20 World Cup Final में ऑस्ट्रेलिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को हराकर एक बार फिर इतिहास रच दिया। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने रिकॉर्ड 7वीं बार खिताब अपने नाम कर लिया है। फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने दबाव के बावजूद बेहतरीन खेल दिखाते हुए मैच पर पकड़ बनाए रखी और जीत हासिल की। इंग्लैंड की कोशिशें नाकाम England women’s cricket team ने मुकाबले में वापसी की पूरी कोशिश की, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की मजबूत गेंदबाजी और सधी हुई बल्लेबाजी के आगे टीम टिक नहीं पाई। ऑस्ट्रेलिया का ऐतिहासिक प्रदर्शन Australia women’s cricket team ने एक बार फिर साबित किया कि वह महिला टी20 क्रिकेट की सबसे मजबूत टीमों में से एक है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया और फाइनल में जीत के साथ अपना दबदबा कायम रखा।
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World Badminton Day 2026: पी.वी. सिंधु ऐतिहासिक उपलब्धि के करीब, भारत को फिर गर्व का मौका

World Badminton Day 2026: पी.वी. सिंधु ऐतिहासिक उपलब्धि के करीब, भारत को फिर गर्व का मौका

भारत की स्टार शटलर PV Sindhu एक बार फिर सुर्खियों में हैं। विश्व बैडमिंटन दिवस के मौके पर सिंधु एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब पहुंच गई हैं, जिससे भारतीय खेल जगत में खुशी की लहर है। लगातार शानदार प्रदर्शन से बनी प्रेरणा पी.वी. सिंधु ने अपने करियर में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर भारत को कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गौरवान्वित किया है। उनकी मेहनत, फिटनेस और खेल के प्रति समर्पण उन्हें दुनिया की शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ियों में शामिल करता है। भारतीय फैंस में उत्साह उनकी इस नई उपलब्धि को लेकर देशभर के खेल प्रेमियों में उत्साह देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर भी फैंस उन्हें बधाइयां दे रहे हैं और उनके आगे के मैचों के लिए शुभकामनाएं भेज रहे हैं। आगे की राह पर नजर अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि पी.वी. सिंधु आने वाले टूर्नामेंट्स में इस उपलब्धि को किस तरह आगे बढ़ाती हैं। उम्मीद की जा रही है कि वह एक बार फिर भारत के लिए बड़ा इतिहास रच सकती हैं।
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IMD Rain Alert: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और ओडिशा समेत कई राज्यों में Heavy Rain की चेतावनी

IMD Rain Alert: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और ओडिशा समेत कई राज्यों में Heavy Rain की चेतावनी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा समेत देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है। कई इलाकों में तेज बारिश की संभावना IMD के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में लगातार बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ आंधी, बिजली गिरने और जलभराव की स्थिति भी बन सकती है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन और राहत एजेंसियां अलर्ट पर भारी बारिश की चेतावनी के बाद संबंधित राज्यों के प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। संभावित बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। लोगों के लिए IMD की सलाह मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी ताजा अपडेट पर नजर रखें, नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें तथा खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा करने से बचें। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की भी सलाह दी गई है।
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Trump-Iran Tension: ट्रम्प के बयान से बढ़ा तनाव, ईरान का पलटवार; खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब

Trump-Iran Tension: ट्रम्प के बयान से बढ़ा तनाव, ईरान का पलटवार; खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि यदि वे चाहते तो सिर्फ एक सैन्य हमले में ईरान की पूरी शीर्ष नेतृत्व (Leadership) को खत्म किया जा सकता था। ट्रम्प के इस बयान के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “तुम्हारे पास न सभ्यता है और न ही सम्मान।” इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में लाखों लोगों की मौजूदगी ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ट्रम्प का बड़ा दावा डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के पास इतनी सैन्य ताकत है कि जरूरत पड़ने पर ईरान की शीर्ष नेतृत्व को एक ही हमले में खत्म किया जा सकता था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कदम नहीं उठाया गया। ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है और इसे अमेरिका-ईरान रिश्तों में बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है। ईरान का पलटवार ट्रम्प के बयान पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि ऐसे बयान गैर-जिम्मेदाराना हैं और इससे क्षेत्र में शांति प्रभावित होती है। ईरान की ओर से कहा गया कि “तुम्हारे पास न सभ्यता है, न सम्मान और न ही अंतरराष्ट्रीय मूल्यों की समझ।” तेहरान ने अमेरिका पर तनाव बढ़ाने का आरोप भी लगाया। खामेनेई के अंतिम संस्कार में लाखों लोगों की भीड़ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में देशभर से लाखों लोग पहुंचे। राजधानी तेहरान की सड़कों पर भारी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने अपने नेता को अंतिम विदाई दी और कई स्थानों पर शोक सभाएं भी आयोजित की गईं। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरे कार्यक्रम पर दुनिया की नजर बनी रही। दुनिया की बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प के बयान और ईरान की प्रतिक्रिया के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ सकता है। पहले से ही मध्य पूर्व कई संघर्षों का सामना कर रहा है, ऐसे में दोनों देशों की ओर से आने वाले बयान वैश्विक राजनीति पर असर डाल सकते हैं।
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Wimbledon 2026: 21 साल की ईला ने चैंपियन स्वियातेक को हराकर रचा बड़ा उलटफेर, 3 साल बाद लिया हार का बदला

Wimbledon 2026: 21 साल की ईला ने चैंपियन स्वियातेक को हराकर रचा बड़ा उलटफेर, 3 साल बाद लिया हार का बदला

विंबलडन 2026 में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। 21 वर्षीय ईला ने पूर्व चैंपियन इगा स्वियातेक को हराकर टूर्नामेंट की सबसे चर्चित जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ईला ने तीन साल पहले मिली हार का हिसाब भी बराबर कर लिया। यह मुकाबला शुरुआत से अंत तक रोमांचक रहा, जिसमें युवा खिलाड़ी ने आत्मविश्वास और शानदार खेल का प्रदर्शन किया। 3 साल पहले मिली थी हार करीब तीन साल पहले ईला को स्वियातेक के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। उस मुकाबले के बाद स्वियातेक ने उन्हें सलाह दी थी कि “जो भी करो, 100 प्रतिशत देना।” ईला ने इस सलाह को अपनी प्रेरणा बनाया और लगातार अपने खेल में सुधार करती रहीं। विंबलडन में शानदार प्रदर्शन इस बार विंबलडन में ईला ने बेहतरीन सर्विस, दमदार रिटर्न और संयमित खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने पूरे मैच के दौरान स्वियातेक पर दबाव बनाए रखा और महत्वपूर्ण मौकों का पूरा फायदा उठाया। उनकी जीत को टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। स्वियातेक ने की ईला की तारीफ हार के बाद इगा स्वियातेक ने ईला के प्रदर्शन की सराहना की और कहा कि उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ खेला। उन्होंने युवा खिलाड़ी को आगे के मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
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AAP

Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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