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नाबालिग छात्रा को अश्लील मैसेज और शादी का दबाव, पीटी टीचर पर भाई को छात्रों से पिटवाने का आरोप

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्वामी आत्मानंद स्कूल के एक पीटी टीचर पर नाबालिग छात्रा को अश्लील मैसेज भेजने और शादी के लिए दबाव बनाने का आरोप लगा है। आरोप है कि परिजनों की समझाइश के बावजूद शिक्षक की हरकतें नहीं रुकीं। शनिवार को छात्रा के भाई के दोबारा समझाने पहुंचने पर विवाद बढ़ गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इसके बाद शिक्षक ने हाईस्कूल के कुछ छात्रों से छात्रा के भाई की लोहे की रॉड से पिटाई करवा दी। हमले में युवक के हाथ में चोट आई है। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी ने भी मामले की जांच के लिए टीम गठित की है। मामला रघुनाथनगर थाना क्षेत्र का है। पीटी टीचर पर अश्लील मैसेज भेजने का आरोप जानकारी के मुताबिक, आरोपी पीटी टीचर का नाम संदीप गुप्ता (28) है। वह स्वामी आत्मानंद स्कूल में पदस्थ है। वहीं, कथित पीड़ित छात्रा 10वीं कक्षा में पढ़ती है। आरोप है कि शिक्षक मोबाइल मैसेज के जरिए छात्रा से बातचीत करता था और उसे अश्लील मैसेज भेजता था। परिजनों के मुताबिक, शिक्षक छात्रा पर शादी करने का दबाव भी बना रहा था। छात्रा ने परेशान होकर इसकी जानकारी अपने परिवार को दी। इसके बाद परिजनों ने शिक्षक को समझाकर छात्रा से इस तरह की बातचीत नहीं करने को कहा। समझाने पहुंचे भाई से विवाद परिजनों का आरोप है कि समझाइश के बाद भी शिक्षक की हरकतें जारी रहीं। इसके बाद 15 अगस्त को छात्रा का भाई शिक्षक को समझाने स्कूल पहुंचा। बातचीत के दौरान दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इसके बाद शिक्षक ने स्कूल परिसर में मौजूद हाईस्कूल के कुछ छात्रों को छात्रा के भाई की पिटाई करने के लिए कहा। छात्रों से रॉड से पिटाई कराने का आरोप पीड़ित पक्ष के अनुसार, छात्रों ने युवक के साथ मारपीट की और लोहे की रॉड से हमला किया। इस घटना में उसके हाथ में चोट आई है। घटना के बाद परिवार ने पुलिस से शिकायत की और शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस मोबाइल मैसेज और दूसरे सबूतों की कर रही जांच शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में छात्रा और शिक्षक के बीच हुए मोबाइल मैसेज, मारपीट की घटना, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों को शामिल किया जा रहा है। वहीं, शिक्षा विभाग की ओर से भी मामले की विभागीय जांच के लिए टीम गठित की गई है। जांच पूरी होने के बाद आरोपों की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। परिजनों का आरोप- पहले भी की थी शिकायत पीड़ित परिवार का कहना है कि शिक्षक की कथित हरकतों को लेकर पहले भी आपत्ति जताई गई थी और उसे समझाया गया था। उनका आरोप है कि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं होने के कारण विवाद बढ़ गया। फिलहाल पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों स्तर पर मामले की जांच जारी है।
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67 इंटरनेशनल मेडल जीतने वाले पैरा आर्म रेसलर श्रीमंत झा बोले- नौकरी नहीं मिली तो मेडल नीलाम कर दूंगा

भिलाई। जिस बेटे को देश के लिए मेडल जीतने के काबिल बनाने के लिए मां ने अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया और पिता ने मजदूरी कर उसकी पढ़ाई, डाइट और जिम का खर्च उठाया, आज वही बेटा सरकारी मदद के इंतजार में आर्थिक संकट से जूझ रहा है। छत्तीसगढ़ के पैरा आर्म रेसलर श्रीमंत झा ने कहा है कि अगर इस बार भी उन्हें शहीद राजीव पांडे पुरस्कार और सरकारी नौकरी नहीं मिली, तो वह अपने 67 इंटरनेशनल मेडल नीलाम कर देंगे। उनका कहना है कि नीलामी से मिलने वाली रकम से माता-पिता का कर्ज चुकाएंगे और छोटा कारोबार शुरू करेंगे। श्रीमंत ने यह बात 15 अगस्त को दुर्ग बटालियन में आयोजित मुख्य समारोह में सम्मानित किए जाने के बाद कही। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम अरुण साव ने उनका सम्मान किया। मेडल नीलाम कर कर्ज चुकाने की बात श्रीमंत ने कहा कि उन्होंने करीब 15 साल के खेल करियर में भारत के लिए 67 इंटरनेशनल मेडल जीते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक शहीद राजीव पांडे पुरस्कार और सरकारी नौकरी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि अगर इस बार भी सरकार की ओर से मदद नहीं मिली तो वह अपने 67 इंटरनेशनल मेडल सरकार को सौंपकर उनकी नीलामी करने का कदम उठाएंगे। इससे मिलने वाली राशि से माता-पिता का कर्ज चुकाने और छोटा कारोबार शुरू करने की योजना है। श्रीमंत ने खेल छोड़ने की बात भी कही है। मां ने मंगलसूत्र गिरवी रखा, पिता ने मजदूरी कर उठाया खर्च श्रीमंत ने बताया कि उनके खेल करियर को आगे बढ़ाने में उनके माता-पिता ने काफी संघर्ष किया। उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए मां ने अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया था। वहीं, पिता ने मजदूरी करके बेटे की पढ़ाई, डाइट और जिम का खर्च उठाया। परिवार को उम्मीद थी कि श्रीमंत देश के लिए मेडल जीतेंगे और आगे उन्हें सरकारी नौकरी मिलेगी, जिससे घर की आर्थिक स्थिति सुधर सकेगी। इसी उम्मीद में परिवार पर कर्ज बढ़ता चला गया। कई साल से पुरस्कार के लिए कर रहे आवेदन श्रीमंत के मुताबिक, वह कई वर्षों से शहीद राजीव पांडे पुरस्कार के लिए आवेदन कर रहे हैं। हर बार अपनी खेल उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा किया, लेकिन अब तक उन्हें यह सम्मान नहीं मिला। उनका कहना है कि 67 अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने के बावजूद उन्हें राज्य का यह खेल सम्मान और सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। 2032 पैरालंपिक में गोल्ड जीतना है सपना श्रीमंत का सपना 2032 पैरालंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। पैरा आर्म रेसलिंग को पैरालंपिक में शामिल किए जाने की उम्मीद के बीच वह इसकी तैयारी कर रहे थे। हालांकि, परिवार की आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज ने उनके सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी मिलने से उनके 15 साल के संघर्ष और माता-पिता के त्याग को सम्मान मिलेगा। विश्व नंबर-3 और एशिया नंबर-1 होने का दावा भिलाई निवासी श्रीमंत झा जन्म से दिव्यांग हैं। करीब 15 साल के खेल करियर में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। श्रीमंत के अनुसार, उन्होंने अब तक 67 इंटरनेशनल मेडल जीते हैं और वह पैरा आर्म रेसलिंग में विश्व में नंबर-3 तथा एशिया में नंबर-1 रह चुके हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि उनकी खेल उपलब्धियों और मेरिट को देखते हुए उन्हें शहीद राजीव पांडे पुरस्कार के साथ सरकारी नौकरी दी जाए।
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राष्ट्रपति पदक से सम्मानित रामावतार सिंह और पुरस्कार विजेता अर्चना धुरंधर की सेवा को सलाम

रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पुलिस विभाग के दो अधिकारियों की सेवा और उपलब्धियां खास चर्चा में हैं। एक ओर रामावतार सिंह हैं, जिन्हें विशेष सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया है। उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में VIP सुरक्षा, चुनाव और कानून-व्यवस्था जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वहीं दूसरी ओर रायपुर शहर की एकमात्र महिला टीआई अर्चना धुरंधर हैं। महिलाओं और अवयस्क बच्चों से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निराकरण और पारिवारिक विवादों में सुलह कराने के लिए उन्हें राज्यपाल पुरस्कार और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार मिल चुका है। नक्सल प्रभावित इलाकों में VIP मूवमेंट बड़ी चुनौती रामावतार सिंह ने अपने सेवाकाल में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी ड्यूटी की। उनका कहना है कि ऐसे इलाकों में VIP मूवमेंट सामान्य शहरों की तुलना में काफी चुनौतीपूर्ण होता है। सुरक्षा के लिए पहले से विस्तृत प्लानिंग करनी पड़ती है। VIP के रूट, फोर्स की तैनाती, जवानों के ठहरने की व्यवस्था और पूरे सुरक्षा बंदोबस्त की मॉनिटरिंग तक कई स्तरों पर तैयारी की जाती थी। नक्सल गतिविधियों वाले क्षेत्रों में रूट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी होता था। उन्होंने बताया कि VIP ड्यूटी सिर्फ सड़क पर जवान तैनात करने तक सीमित नहीं होती। कार्यक्रम स्थल, आने-जाने वाले रास्तों और आसपास के इलाकों का आकलन कर फोर्स की जरूरत और उसकी तैनाती तय की जाती है। चुनाव और कानून-व्यवस्था में भी निभाई जिम्मेदारी रामावतार सिंह ने निर्वाचन ड्यूटी के दौरान भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। चुनाव के समय संवेदनशील इलाकों और मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है। उनके लंबे सेवाकाल में VIP बंदोबस्त, निर्वाचन ड्यूटी और कानून-व्यवस्था समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। इन्हीं विशेष सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। सम्मानित अधिकारियों की सूची में उनका नाम सबसे ऊपर रहा, जिसे उन्होंने गर्व का पल बताया। महिलाओं और बच्चों के मामलों में भरोसा सबसे जरूरी अर्चना धुरंधर का पुलिसिंग का क्षेत्र अलग है। वह महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम करती हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की बात धैर्य से सुनना और उसे भरोसा दिलाना सबसे जरूरी होता है। कई महिलाएं और बच्चे डर या परेशानी की स्थिति में थाने पहुंचते हैं। ऐसे में पहले उन्हें सहज किया जाता है। इसके बाद पूरी बात सुनकर कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाती है। अर्चना के मुताबिक, जब शिकायतकर्ता को यह भरोसा होता है कि उसकी समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है, तब वह अपनी बात खुलकर बता पाता है। 4 साल की बच्ची का मामला आज भी याद अर्चना ने अपने सेवाकाल के एक मामले को याद करते हुए बताया कि 2011 में राजनांदगांव में महिला चौकी प्रभारी रहते हुए उनके पास 4 साल की बच्ची से रेप का मामला आया था। मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्ची को सुरक्षित बचाया गया और आरोपी को सजा दिलाई गई। अर्चना के मुताबिक, वह बच्ची आज भी उनके करीब है। वह इस मामले को अपने सेवाकाल की सबसे संतोषजनक उपलब्धियों में मानती हैं। उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि बच्ची को समय पर न्याय मिला और आरोपी को सजा हुई। 2008 से पुलिस सेवा में हैं अर्चना अर्चना धुरंधर वर्ष 2008 से सब इंस्पेक्टर के रूप में पुलिस सेवा में हैं। वह अपने पुरस्कारों का श्रेय वरिष्ठ अधिकारियों, सहकर्मियों, कर्मचारियों और काउंसलर्स की पूरी टीम को देती हैं। उनके अनुसार, राज्यपाल पुरस्कार और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार महिलाओं और अवयस्क बच्चों की शिकायतों के त्वरित निराकरण तथा पारिवारिक विवादों में सुलह कराने के कार्य के लिए दिए गए हैं। दो अलग जिम्मेदारियां, लक्ष्य एक- सेवा रामावतार सिंह और अर्चना धुरंधर की जिम्मेदारियां भले अलग रही हों, लेकिन दोनों के काम का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा और उन्हें न्याय दिलाना रहा है। रामावतार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा, VIP मूवमेंट और चुनाव जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं, जबकि अर्चना ने महिलाओं और बच्चों की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुना और उनके समाधान के लिए काम किया। एक अधिकारी को विशेष सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक मिला, तो दूसरी अधिकारी को महिलाओं और बच्चों के मामलों में उल्लेखनीय कार्य के लिए राज्यपाल और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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सिम्स के इंटर्न डॉक्टरों ने बढ़ाया स्टाइपेंड मांगा, विधायक अमर अग्रवाल से की मुलाकात

बिलासपुर: बिलासपुर के सिम्स में कार्यरत इंटर्न डॉक्टरों ने मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शहर विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता अमर अग्रवाल से मुलाकात की। डॉक्टरों ने अपनी मांगों और समस्याओं से जुड़ा ज्ञापन विधायक को सौंपकर सरकार के सामने उनकी बात रखने का आग्रह किया। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल प्रदेशभर में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की ओर से इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग की जा रही है। इसी कड़ी में सिम्स के इंटर्न डॉक्टर भी अपनी मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और रोजमर्रा की जरूरतों के अनुरूप नहीं है। इसलिए इसमें उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए। विधायक को सौंपा ज्ञापन इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने विधायक अमर अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं। उन्होंने स्टाइपेंड बढ़ाने समेत अन्य मांगों का ज्ञापन सौंपा और सरकार के स्तर पर मामले को उठाने का अनुरोध किया। स्वास्थ्य और वित्त मंत्री से बात करेंगे विधायक अमर अग्रवाल ने डॉक्टरों की मांग को गंभीरता से लेते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वह स्वास्थ्य मंत्री और वित्त मंत्री से मुलाकात कर इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग उनके सामने रखेंगे। विधायक ने कहा कि सरकार समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुन रही है। उन्होंने डॉक्टरों और अन्य पेशेवरों के हितों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता की बात कही।
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रायपुर में विशाल तिरंगा यात्रा, भारत माता के जयकारों से गूंजा शहर; बच्चों ने थामा 1 KM लंबा तिरंगा

रायपुर: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को राजधानी रायपुर में विशाल तिरंगा यात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में भाजयुमो और भाजपा कार्यकर्ता हाथों में तिरंगा लेकर बाइक रैली में शामिल हुए। इस दौरान पूरे रास्ते भारत माता के जयकारों और देशभक्ति के नारों से माहौल गूंजता रहा। बाइक रैली से हुई तिरंगा यात्रा की शुरुआत तिरंगा यात्रा की शुरुआत पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम के सामने से हुई। रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक राजेश मूणत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता बाइक लेकर रैली में शामिल हुए। बाइक रैली राजधानी के प्रमुख मार्गों से होते हुए भारत माता चौक, गुढ़ियारी पहुंची। रास्तेभर कार्यकर्ता तिरंगा लहराते हुए भारत माता के जयकारे लगाते रहे। बच्चों ने निकाली 1 किलोमीटर लंबी तिरंगा पदयात्रा तिरंगा यात्रा में बाइक रैली के साथ रामनगर क्षेत्र के स्कूली बच्चों और शिक्षकों की पदयात्रा भी आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों ने करीब एक किलोमीटर लंबा तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारों के साथ मार्च किया। बाइक रैली के बाद राजेश मूणत भी बच्चों के साथ पदयात्रा में शामिल हुए। यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ी लोक संगीत और पारंपरिक लोकनृत्य भी देखने को मिले। इससे आयोजन में देशभक्ति के साथ स्थानीय संस्कृति की झलक भी नजर आई। भारत माता चौक पर हुई आरती शाम करीब 6 बजे भारत माता चौक पर तिरंगा यात्रा का समापन हुआ। यहां पंडितों की मौजूदगी में विधि-विधान से मां भारती की आरती की गई। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग आरती में शामिल हुए। ‘तिरंगे के सम्मान में निकाली यात्रा’ कार्यक्रम के दौरान राजेश मूणत ने कहा कि यह यात्रा तिरंगे के सम्मान, मां भारती के प्रति समर्पण और अखंड स्वतंत्रता की कामना के लिए निकाली गई है। उन्होंने कहा कि देश और तिरंगे के सम्मान से जुड़ा आयोजन किसी एक व्यक्ति का निजी कार्यक्रम नहीं हो सकता। इसमें हर व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे रामायण की गिलहरी के योगदान जैसा पवित्र बताया।
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बिलासपुर रेलवे का सख्त अभियान: एक दिन में 342 बेटिकट यात्री पकड़े, 2.64 लाख का जुर्माना वसूला

बिलासपुर रेलवे मंडल ने बिना टिकट यात्रा और ट्रेनों में बेवजह चेन पुलिंग की घटनाओं पर सख्ती तेज कर दी है। गुरुवार को बिलासपुर रेलवे स्टेशन और यहां से गुजरने वाली ट्रेनों में चलाए गए विशेष नाका टिकट चेकिंग अभियान के दौरान 342 यात्री बिना टिकट या अनियमित टिकट के साथ यात्रा करते पकड़े गए। इनसे कुल 2.64 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। एक दिन में 342 मामलों में कार्रवाई वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनुराग कुमार सिंह के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान में वाणिज्य निरीक्षक, मुख्य टिकट निरीक्षक और टीटीई स्टाफ ने संयुक्त रूप से जांच की। कार्रवाई के दौरान: कुल मिलाकर 342 मामलों में लगभग 2.64 लाख रुपये की पेनाल्टी वसूली गई। अप्रैल से जुलाई तक 667 चेन पुलिंग के मामले बिलासपुर रेलवे मंडल ने ट्रेनों में बिना कारण अलार्म चेन खींचने की घटनाओं पर भी सख्त कार्रवाई की है। मंडल रेल प्रबंधक राकेश रंजन के मार्गदर्शन और वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त सौरभ कुमार के नेतृत्व में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने अप्रैल से जुलाई के बीच 667 मामलों में कार्रवाई की। इन मामलों में रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत दोषियों पर कार्रवाई करते हुए न्यायालय के माध्यम से 3.20 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। बिना वजह चेन खींचना है दंडनीय अपराध रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को चेतावनी दी है कि बिना किसी वैध कारण के ट्रेन की अलार्म चेन खींचना कानूनन अपराध है। रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत दोषी पाए जाने पर: यात्रियों से रेलवे की अपील रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले वैध टिकट अवश्य खरीदें। स्टेशन परिसर में प्रवेश के लिए प्लेटफॉर्म टिकट का उपयोग करें तथा रेलवे परिसर को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करें। गंदगी फैलाने, धूम्रपान करने और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। रेलवे, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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जेल से रिहा होने के बाद सम्मानपुर पहुंचे डॉ. अजय यादव, प्रभावित परिवारों को कानूनी मदद का भरोसा

रायपुर। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख डॉ. अजय यादव जेल से रिहा होने के बाद सीधे रायपुर जिले के नकटी (सम्मानपुर) गांव पहुंचे। यहां उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, क्षतिग्रस्त मकानों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान डॉ. यादव ने कहा कि संगठन प्रभावित 77 परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगा और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का रुख भी करेगा। प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहने का दावा डॉ. अजय यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी शुरुआत से ही सम्मानपुर के ग्रामीणों के साथ खड़ी रही है। उनका आरोप है कि जब तक संगठन के प्रमुख पदाधिकारी आंदोलन में सक्रिय थे, तब तक मकानों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि उनके और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के अध्यक्ष अमित बघेल के जेल जाने के बाद प्रशासन ने 77 परिवारों के मकानों को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। कानूनी रिपोर्ट तैयार करने का दावा बैठक के दौरान संगठन ने दावा किया कि पूरे मामले पर एक विस्तृत कानूनी प्रतिवेदन तैयार किया गया है। संगठन के अनुसार, इसमें राजस्व रिकॉर्ड, ग्राम सभा के प्रस्ताव, शासन के दिशा-निर्देश और सुप्रीम कोर्ट के संबंधित निर्णयों का अध्ययन किया गया है। संगठन का कहना है कि यदि ग्राम सभा के अधिकारों की अनदेखी हुई है या कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्रवाई की गई है, तो मामले की न्यायिक समीक्षा कराई जाएगी। मुफ्त कानूनी सहायता देने की घोषणा छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने प्रभावित परिवारों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। संगठन ने कहा कि जरूरत पड़ने पर न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी और मुकदमे का पूरा खर्च भी संगठन वहन करेगा। इसके साथ ही ध्वस्तीकरण से जुड़े आदेशों, नोटिसों और राजस्व रिकॉर्ड की वैधानिक जांच कराने की भी मांग की जाएगी। पुनर्वास और मुआवजे तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान डॉ. अजय यादव ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि प्रभावित ग्रामीणों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन की प्रमुख मांगें छत्तीसगढ़ की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ की दो बेटियां जूनियर एशिया कप-2026 में दिखाएंगी दम, भारतीय हॉकी टीम में मधु सिदार और गीता यादव का चयन

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है कि खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (KISCE), बिलासपुर की दो महिला हॉकी खिलाड़ी मधु सिदार और गीता यादव का चयन जूनियर एशिया कप-2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। दोनों खिलाड़ी आगामी 30 अगस्त से 13 सितंबर तक चीन के मोकी में आयोजित होने वाले टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। दोनों खिलाड़ियों के चयन पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए बेहतर प्रदर्शन की कामना की है। किसान परिवार की बेटी हैं मधु सिदार जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड स्थित पोंगरो गांव की रहने वाली मधु सिदार किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके माता-पिता खेती-किसानी करते हैं। मधु ने अपने खेल करियर में सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप, स्कूल नेशनल और इंटर जोन चैंपियनशिप जैसी कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। उन्होंने रायपुर में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। अप्रैल 2026 से वह बेंगलुरु में भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हैं। गीता यादव को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव कबीरधाम जिले के बोडला की रहने वाली गीता यादव ने हॉकी की शुरुआती ट्रेनिंग कोच शिवा चौहान से ली थी। गीता इससे पहले नीदरलैंड, बेल्जियम, अर्जेंटीना तथा इंग्लैंड-स्कॉटलैंड दौरे पर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अब जूनियर एशिया कप-2026 के लिए टीम में चयन के साथ उन्हें एक और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। खेल विभाग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और संचालक तनुजा सलाम ने भी दोनों खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी हैं। वर्तमान में दोनों खिलाड़ी बिलासपुर स्थित प्रदेश की पहली आवासीय खेल अकादमी में वरिष्ठ प्रशिक्षक राकेश टोप्पो और हेड कोच अजीत लकड़ा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं। छत्तीसगढ़ की इन दोनों खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन राज्य के खेल विकास और प्रतिभाओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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रायपुर में भारत ग्रुप के खिलाफ सामूहिक शिकायत, रोजगार और बायबैक के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप

रायपुर। राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित वॉलफोर्ट ओजोन में संचालित भारत ग्रुप के खिलाफ छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के लोगों ने सामूहिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी ने अगरबत्ती बनाने की मशीन, बायबैक गारंटी और घर बैठे रोजगार का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये वसूले, लेकिन किए गए वादे पूरे नहीं किए। पीड़ितों ने इस मामले की शिकायत जनदर्शन में कलेक्टर से की है। साथ ही कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर मंगलवार को रायपुर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय भी पहुंचे। घर बैठे कमाई का दिया गया था दावा शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कंपनी ने विज्ञापनों के माध्यम से दावा किया था कि लोग घर बैठे हर महीने 18 हजार से 60 हजार रुपये तक कमा सकते हैं। कंपनी ने भरोसा दिलाया था कि उसकी मशीन प्रतिदिन 80 से 100 किलो अगरबत्ती तैयार करेगी और तैयार उत्पाद को तय कीमत पर स्वयं खरीद लेगी। मशीन की सर्विस और रखरखाव की जिम्मेदारी भी कंपनी ने लेने का आश्वासन दिया था। मशीनों पर लाखों खर्च, उत्पादन नहीं मिलने का आरोप पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी बचत और कर्ज लेकर 1.10 लाख से 1.20 लाख रुपये तक की कीमत में मशीनें खरीदीं। आरोप है कि मशीनों का सही तरीके से इंस्टॉलेशन नहीं किया गया। कई मशीनें पूरी तरह बंद पड़ी हैं, जबकि जो मशीनें चल रही हैं, वे वादा किए गए उत्पादन के मुकाबले केवल 15 से 20 किलो तक ही अगरबत्ती बना पा रही हैं। GST बिल नहीं देने का भी आरोप शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने मशीन बेचते समय वैध GST बिल जारी नहीं किया और केवल कच्चा चालान देकर लेन-देन किया। उन्होंने इस मामले में संभावित कर अनियमितताओं की जांच कराने की मांग भी की है। कम वजन का कच्चा माल मिलने का दावा पीड़ितों का आरोप है कि कंपनी ने दस्तावेजों में जितना कच्चा माल दर्शाया, वास्तविक आपूर्ति उससे कम की गई। उनका दावा है कि कई बोरियों में 2 से 3 किलो तक वजन कम मिला। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके समर्थन में उनके पास डिजिटल कांटे से की गई तौल के फोटो और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। तैयार माल खरीदने से किया इनकार शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने तैयार अगरबत्ती वापस खरीदने का वादा पूरा नहीं किया। आरोप है कि विभिन्न कारण बताकर तैयार माल लेने से इनकार कर दिया गया, जिससे बड़ी मात्रा में उत्पाद खराब हो गया और लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। रिजेक्शन के नाम पर मनमानी कटौती करने का आरोप भी लगाया गया है। धमकी देने का भी आरोप पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने मशीनों की खराबी, कम वजन या भुगतान को लेकर सवाल उठाए, तो कंपनी के संचालकों और कर्मचारियों ने अनुबंध समाप्त करने और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। कुछ लोगों पर कथित रूप से माफीनामा लिखने का दबाव भी बनाया गया। कलेक्टर से की ये मांग शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कंपनी के वित्तीय लेन-देन और नापतौल की जांच कराने, दोषपूर्ण मशीनें वापस लेने तथा पीड़ितों की जमा राशि ब्याज और मुआवजे सहित लौटाने की मांग की है। साथ ही कंपनी के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के मामले दर्ज करने की भी मांग की गई है। फिलहाल, मामले में संबंधित अधिकारियों या कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। छत्तीसगढ़ और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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रायपुर के आरंग में महिला की संदिग्ध मौत, परिजनों ने पति पर हत्या का आरोप लगाया

रायपुर। राजधानी रायपुर से लगे आरंग क्षेत्र में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतका के परिजनों ने उसके पति पर हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मृतका की पहचान पुष्पा सोनकर के रूप में हुई है, जो आरंग के वार्ड नंबर-14 स्थित शनि मंदिर के पास रहती थीं। परिजनों का आरोप- पति का दूसरी महिला से था संबंध मृतका के पिता रामधार सोनकर ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की शादी करीब 20 वर्ष पहले भोला सोनकर से हुई थी। दोनों के चार बच्चे हैं। परिजनों का दावा है कि पिछले तीन वर्षों से भोला सोनकर का दूसरी महिला से संबंध था और उससे एक बच्चा भी है। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था। उनका आरोप है कि आरोपी पति आए दिन पुष्पा के साथ मारपीट करता था और उसे जान से मारने की धमकी भी देता था। घटना वाले दिन झगड़े का दावा परिजनों के अनुसार, घटना से एक रात पहले भोला सोनकर घर नहीं लौटा था। मृतका की बेटी का दावा है कि 31 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे वह घर पहुंचा, जिसके बाद पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद वह पुष्पा को घर के पीछे स्थित बाड़ी की ओर ले गया। बाद में सुबह करीब 8:15 बजे उसने फोन कर पुष्पा के कुएं में गिरने की सूचना परिवार को दी। इलाज के दौरान हुई मौत परिवार के मुताबिक, सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुंचे तो पुष्पा गंभीर हालत में मिलीं। उन्हें पहले आरंग के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने रायपुर रेफर कर दिया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। “तैरना जानती थी, हादसा नहीं लग रहा” मृतका के परिजनों का कहना है कि पुष्पा को तैरना आता था, इसलिए उनके अनुसार कुएं में गिरने की घटना संदिग्ध है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दूसरी महिला से संबंधों में बाधा बनने के कारण आरोपी पति ने उन्हें कुएं में धक्का दिया। पुलिस ने कहा- जांच के बाद होगी कार्रवाई मृतका के पिता, भाइयों और बेटियों ने आरंग थाने में लिखित शिकायत देकर आरोपी पति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। आरंग पुलिस ने बताया कि परिजनों का आवेदन प्राप्त हुआ है। मामले की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों तथा जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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दिवाली से पहले दिल्ली में रात को भी होगी सफाई, CM रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

दीपावली और अन्य त्योहारों को देखते हुए दिल्ली के रिहायशी इलाकों और प्रमुख बाजारों में अब रात के समय भी सफाई कराई जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक कर राजधानी की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भी कूड़े के ढेर लगे हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए तेजी से काम करने को कहा। कूड़ा नहीं उठने की शिकायतों पर CM नाराज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों से समय पर कूड़ा नहीं उठने और जगह-जगह गंदगी की शिकायतें मिल रही हैं। कुछ जोन में सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि सफाई के प्रयासों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही, सफाई व्यवस्था में किए जा रहे सुधार सड़कों और बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारी होंगे तैनात मुख्यमंत्री ने मेयर प्रवेश वाही और नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार को पूरी दिल्ली में सफाई अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सफाई कर्मचारियों की कमी है, वहां अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाए। जरूरत पड़ने पर रात में सफाई के लिए नए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाए। रात में सफाई से दिन में नहीं होगी परेशानी मुख्यमंत्री के मुताबिक, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में रात के समय सफाई कराने से दिन में लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। इससे त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी। बैठक में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, मेयर प्रवेश वाही, मुख्य सचिव राजीव वर्मा, नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

भोपाल में पहले बिक चुका प्लॉट दोबारा बेचा, 3 लाख रुपए की धोखाधड़ी का केस दर्ज

भोपाल के नीलबड़ स्थित गोरा गांव में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कमलेश राजपूत ने पहले ही बिक चुके 800 वर्गफीट के प्लॉट का दोबारा सौदा कर धर्मेंद्र कुमार शर्मा से 3 लाख रुपए एडवांस ले लिए। रजिस्ट्री कराने की तय तारीख पर आरोपी रजिस्ट्रार ऑफिस नहीं पहुंचा, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने आरोपी कमलेश राजपूत के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में नाम देखकर किया सौदा पुलिस के अनुसार, आरोपी ने प्लॉट के ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपना नाम दिखाकर धर्मेंद्र कुमार शर्मा से सौदा किया था। 800 वर्गफीट के प्लॉट की कीमत 3.30 लाख रुपए तय हुई थी। इसके बाद धर्मेंद्र ने किस्तों में आरोपी को 3 लाख रुपए एडवांस दे दिए। हालांकि, जांच में सामने आया कि आरोपी करीब दो महीने पहले ही यह प्लॉट शुभम यादव को बेच चुका था। शुभम के नाम पर प्लॉट की रजिस्ट्री भी हो चुकी थी, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं हुआ था। रजिस्ट्री कराने नहीं पहुंचा आरोपी पुलिस के मुताबिक, रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं होने का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर प्लॉट का दोबारा सौदा कर रकम ले ली। जब रजिस्ट्री कराने की तय तारीख पर आरोपी रजिस्ट्रार ऑफिस नहीं पहुंचा, तो धर्मेंद्र को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। टीटी नगर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि आरोपी ने किस तरह प्लॉट का दोबारा सौदा किया और रकम लेने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।

इंदौर में ‘Gen Z Protest 2.0’ जारी, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े युवा

इंदौर में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवाओं का आंदोलन जारी है। 5 अक्टूबर से प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने अपने आंदोलन को ‘Gen Z Protest 2.0’ नाम दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद वे अपनी मांग को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। 19 अक्टूबर को भंवरकुआं चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस ने उन्हें समय रहते हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इसके बाद उन्हें करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा गया। रिहा होने के बाद युवाओं ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से जुटने की अपील की गई थी। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में संविधान और महात्मा गांधी की तस्वीरें थीं। इसके अलावा, उन्होंने अलग-अलग संदेश लिखी तख्तियों के जरिए अपनी मांगें भी रखीं। 50-60 पुलिसकर्मियों ने हटाया, प्रदर्शनकारी का दावा प्रदर्शनकारी योगित गुप्ता के मुताबिक, 19 अक्टूबर को वह अपने 10 साथियों के साथ भंवरकुआं चौराहे पर पहुंचे थे। उनके पास पेट्रोल से भरी बोतलें थीं और वे आत्मदाह करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान करीब 50 से 60 पुलिसकर्मियों ने उन्हें बलपूर्वक वहां से हटा दिया। योगित ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें आत्मदाह करने से रोकने के बाद करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और वे अपनी मांग को लेकर आगे भी प्रदर्शन जारी रखेंगे।
Neha Bora

Neha Bora High Court: ‘न हमने कॉल दिया, न वहां गए’, CJP प्रदर्शन से किया किनारा

दिल्ली में CJP प्रदर्शन को लेकर विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। 22 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा (Neha Bora) ने साफ कहा कि उन्होंने कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन के लिए न तो कोई कॉल दिया और न ही वह वहां गई थीं। उनके इस बयान के बाद CJP प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Neha Bora की ओर से अदालत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। उनका कहना है कि जिस प्रदर्शन से उन्हें जोड़कर कार्रवाई की गई, उसमें उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। अब इस मामले में सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। Delhi High Court में नेहा बोरा ने क्या कहा? दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह वहां मौजूद नहीं थीं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष के मुताबिक, नेहा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया और उसके बाद जारी किए गए नोटिस के लिए पर्याप्त आधार नहीं बताया गया। नेहा बोरा ने अदालत में पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने की शर्त रखी गई थी। क्या है Neha Bora और CJP प्रदर्शन का पूरा मामला? यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़ा है। इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध दर्ज कराने की योजना थी। नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में उन्हें शांति बनाए रखने के लिए मुचलका देने से संबंधित नोटिस जारी किया गया। नेहा की ओर से अदालत में कहा गया कि मंडी हाउस में प्रस्तावित सभा और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन को एक ही मामला मानकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस के कदम को चुनौती देते हुए नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए हैं। CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को भी मिली राहत CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका का नाम भी चर्चा में है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर को दोनों की रिहाई का आदेश दिया गया। इसके लिए उन्हें निजी और जमानती मुचलके भरने तथा निर्धारित शर्तों का पालन करने को कहा गया। दोनों नेताओं की हिरासत और नेहा बोरा की याचिका ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। SIR Controversy: क्यों हो रहा है विरोध? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उससे जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। इसी बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से मुचलका भरवाने जैसे मुद्दे अदालत तक पहुंच गए हैं। अब आगे क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट में नेहा बोरा की ओर से पुलिस के नोटिस और हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही अहम होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि हाईकोर्ट ने नेहा बोरा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है या पुलिस का नोटिस रद्द कर दिया है। मामले में अंतिम आदेश की पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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