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भोपाल के 30 इलाकों में आज 2 से 6 घंटे तक बिजली कटौती, मेंटेनेंस के चलते रहेगी सप्लाई बाधित

भोपाल के करीब 30 इलाकों में शुक्रवार को 2 से 6 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। मध्य प्रदेश बिजली वितरण कंपनी द्वारा निर्धारित मेंटेनेंस कार्य के चलते अलग-अलग क्षेत्रों में तय समय के अनुसार बिजली बंद रहेगी। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि वे बिजली से जुड़े जरूरी काम पहले ही निपटा लें। बिजली कटौती का असर राजीव नगर, वाल्मी, भवानी धाम, आकृति ईको सिटी, सागर एवेन्यू, टेक्नोलॉजी पार्क, झील नगर, वर्धमान ग्रीन सिटी समेत कई प्रमुख इलाकों पर पड़ेगा। इन इलाकों में रहेगी बिजली बंद बिजली कंपनी ने उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि मेंटेनेंस कार्य पूरा होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी।
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इंदौर को मिला मध्यप्रदेश का पहला डबल लेयर फ्लाईओवर, CM मोहन यादव ने किया लोकार्पण

मध्यप्रदेश को गुरुवार को अपना पहला डबल लेयर फ्लाईओवर मिल गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के लवकुश चौराहा स्थित 175 करोड़ रुपये की लागत से तैयार डबल लेयर फ्लाईओवर की पहली भुजा का लोकार्पण किया। इसके साथ ही अरविंदो क्षेत्र से बाणगंगा की ओर वाहनों का आवागमन शुरू हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है और विकसित मध्यप्रदेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह फ्लाईओवर इंदौर-उज्जैन मार्ग पर बढ़ते यातायात को सुचारु बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में तेजी से अधोसंरचना का विकास हो रहा है। इस फ्लाईओवर से यात्रा का समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी, ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और लोगों को सुरक्षित व सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलेगी। तीन स्तर की यातायात व्यवस्था इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी त्रिस्तरीय यातायात व्यवस्था है। पहले स्तर पर सामान्य सड़क यातायात, दूसरे स्तर पर मौजूदा फ्लाईओवर और मेट्रो कॉरिडोर, जबकि तीसरे स्तर पर नया डबल लेयर फ्लाईओवर बनाया गया है। इससे लवकुश चौराहे पर वाहनों का दबाव काफी कम होगा। 1450 मीटर लंबा फ्लाईओवर इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) द्वारा निर्मित यह फ्लाईओवर करीब 1450 मीटर लंबा है। इसके निर्माण में 22 मीटर की ऊंचाई पर 65 मीटर लंबे और 24 मीटर चौड़े स्पान पर दो-दो 400 टन वजनी स्टील बो-स्ट्रिंग गर्डर लगाए गए हैं। परियोजना में कुल 800 टन स्टील का उपयोग किया गया है, जो इसे प्रदेश की प्रमुख इंजीनियरिंग उपलब्धियों में शामिल करता है। दूसरी भुजा अंतिम चरण में फिलहाल फ्लाईओवर की एक भुजा यातायात के लिए खोल दी गई है। दूसरी भुजा का निर्माण अंतिम चरण में है और इसके पूरा होते ही दोनों दिशाओं में यातायात पूरी तरह सुचारु हो जाएगा। सिंहस्थ-2028 को मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फ्लाईओवर केवल वर्तमान ट्रैफिक की समस्या को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों के अनुसार बनाया गया है। सिंहस्थ-2028 के दौरान इंदौर और उज्जैन के बीच श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। UCC पर भी बोले मुख्यमंत्री लोकार्पण के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (UCC) पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि UCC लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य संविधान की भावना के अनुरूप सभी को समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने UCC पर व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए करीब दो महीने तक अभियान चलाया, जिसमें साढ़े तीन करोड़ से अधिक लोगों से सुझाव लिए गए। Read More:deshharpal.com
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इंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचे

इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार रात कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर उनके आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टंट्याभील चौराहे पर पिछले कई दिनों से छात्र शिक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद इंदौर में भी आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार रात दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 25 दिनों से यह मांग उठा रही है और उन्होंने स्वयं 21 जून को भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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भोपाल में अरेरा हिल्स थाना प्रभारी और आरक्षक निलंबित, महिला से अनैतिक संबंध के आरोपों पर विभागीय जांच शुरू

भोपाल पुलिस कमिश्नर ने अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कार्रवाई एक युवक की शिकायत के बाद की गई, जिसमें थाना प्रभारी पर शिकायतकर्ता की पत्नी से कथित अनैतिक संबंध रखने, पद का दुरुपयोग करने और आरक्षक पर सहयोग करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता ने पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत के साथ कुछ कथित साक्ष्य भी सौंपे थे। प्रारंभिक परीक्षण में मामला गंभीर और दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरक्षक नंदकिशोर को थाना प्रभारी की गतिविधियों की जानकारी थी और उसने महिला पर दबाव बनाने में भी कथित भूमिका निभाई। इन आरोपों की सत्यता की जांच अब विभागीय स्तर पर की जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी सुनील शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। जांच में पुलिस आचरण नियमों के उल्लंघन, पद के दुरुपयोग और अन्य आरोपों की विस्तृत पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। डीसीपी विकास सेहवाल ने बताया कि महिला के पति की शिकायत पर प्रारंभिक जांच में दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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जबलपुर में NSUI और कांग्रेस का प्रदर्शन, वाटर कैनन से खदेड़े गए कार्यकर्ता

दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में जबलपुर में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर NSUI ने सांकेतिक अर्थी यात्रा निकाली, जबकि शाम को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मालवीय चौक पर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दोनों प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई तथा स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। अर्थी यात्रा को पुलिस ने रोका NSUI कार्यकर्ताओं की अर्थी यात्रा सिविल लाइन स्थित साईं मंदिर से शुरू होकर महाकौशल महाविद्यालय की ओर बढ़ रही थी। पुलिस ने सिविल लाइन क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली में 21 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को सरकार नजरअंदाज कर रही है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर बल प्रयोग किया जा रहा है। 48 घंटे में इस्तीफे की मांग NSUI ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं दिया गया तो NSUI, यूथ कांग्रेस और अन्य सहयोगी संगठन और बड़ा आंदोलन करेंगे। मालवीय चौक पर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन शाम को मालवीय चौक पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री के विरोध में पोस्टर जलाने की कोशिश की गई, जिसे रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने दो बार वाटर कैनन चलाकर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता मशाल लेकर अंजुमन स्कूल की ओर बढ़े, जबकि अन्य मालवीय चौक पर दोबारा एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करते रहे। कांग्रेस ने सरकार पर लगाए आरोप कांग्रेस नेता सौरभ नाटी शर्मा ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए सरकार दमनात्मक रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है तथा शिक्षा मंत्री को बचाने के लिए सरकार विपक्ष की आवाज दबा रही है। काफी देर तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पाया, हालांकि देर रात तक प्रदर्शन जारी रहा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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भोपाल महिला आयोग में रिश्तों के दो चौंकाने वाले मामले, पत्नी ने मांगा तलाक तो दूसरे केस में दोनों ने लगाए गंभीर आरोप

भोपाल में राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान वैवाहिक विवादों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने सबका ध्यान खींचा। एक मामले में सरकारी विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर बनने के बाद पत्नी ने पति पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की, जबकि दूसरे मामले में पति-पत्नी ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। 20 साल बाद पत्नी ने मांगा तलाक पहले मामले में सरकारी विभाग में कार्यरत असिस्टेंट डायरेक्टर महिला ने शादी के करीब 20 साल बाद महिला आयोग में पति के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, सुनवाई के दौरान वह स्वयं उपस्थित नहीं हुईं। सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर पति आयोग के सामने पेश हुए और कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ रहना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पत्नी बिना बताए बेटे को लेकर मायके चली गई और तब से अलग रह रही है। पति ने कहा कि दोनों का बेटा आईवीएफ तकनीक से हुआ है और यदि रिश्ते में लगातार प्रताड़ना होती तो ऐसा संभव नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि पत्नी के जाने के बाद उनकी मां को पैरालिसिस का दूसरा अटैक आया और अब इस उम्र में अकेले जीवन बिताना मुश्किल होगा। दूसरे मामले में पति-पत्नी के गंभीर आरोप दूसरे मामले में पति ने महिला आयोग के सामने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का एक अन्य महिला के साथ अवैध संबंध है और उसे अपनी जान का खतरा महसूस होता है। उसका दावा था कि इस संबंध में वह अदालत में दस्तावेज और सबूत भी प्रस्तुत कर चुका है। वहीं, पत्नी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना, मारपीट, जबरन गर्भपात कराने, निजी वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा करने और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए। महिला ने यह भी दावा किया कि उसके पति का अपनी रिश्तेदारी की एक महिला के साथ संबंध है और ससुर ने भी उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। महिला ने आयोग को बताया कि शादी के बाद से उसे लगातार प्रताड़ित किया गया और वर्तमान में उसका खर्च मायके वाले उठा रहे हैं। दूसरी ओर, पति ने पत्नी के सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों मामलों में महिला आयोग ने संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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भोपाल में AIIMS की नर्सिंग ऑफिसर ने की आत्महत्या, स्कूल से लौटे मासूम बोले- “हमें मम्मा के पास जाना है”

Bhopal: भोपाल के अवधपुरी थाना क्षेत्र स्थित सुभाष विला कॉलोनी में सोमवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई। एम्स भोपाल में कार्यरत 34 वर्षीय नर्सिंग ऑफिसर ने अपने दोनों बच्चों को स्कूल भेजने के कुछ देर बाद घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद स्कूल से लौटे आठ वर्षीय बेटे और तीन वर्षीय बेटी की मासूम पुकार—“हमें मम्मा के पास जाना है”—ने मौके पर मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। पुलिस के अनुसार, मृतका मूल रूप से तमिलनाडु की रहने वाली थीं। करीब दो महीने पहले उनके पति ने तमिलनाडु में आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद वह अपने दोनों बच्चों के साथ भोपाल आ गई थीं। उन्होंने बच्चों का स्थानीय स्कूल में दाखिला कराया था और उनकी देखभाल के लिए एक केयरटेकर भी रखा था। सोमवार सुबह बच्चों को स्कूल भेजने के बाद उन्होंने घर के एक कमरे में फांसी लगा ली। कुछ देर बाद केयरटेकर ने नाश्ता तैयार होने पर उन्हें आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां महिला फंदे से लटकी मिलीं। सूचना मिलने पर एफएसएल टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। परिजनों के तमिलनाडु से भोपाल पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा। प्रारंभिक जांच में पति की मौत के बाद महिला के मानसिक तनाव में होने की बात सामने आई है। हालांकि, आत्महत्या के कारणों की पुष्टि पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। deshharpal.comअधिक जानकारी के लिए विजिट करें:
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पश्चिमी रिंग रोड मुआवजे को लेकर किसानों का प्रदर्शन, भोपाल कूच रोका; वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप

Indore: पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर करणी सेना परिवार और किसानों का आंदोलन सोमवार को तेज हो गया। ट्रैक्टरों के साथ भोपाल कूच के लिए निकले किसानों को शिप्रा चौराहे पर पुलिस और प्रशासन ने रोक दिया, जिसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। किसानों का आरोप है कि उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों के अनुसार इस कार्रवाई में सात किसान घायल हुए। इसके बाद किसान बरलाई जागीर में धरने पर बैठ गए और देर रात तक शिप्रा-सांवेर मार्ग पर डटे रहे। आंदोलन के दौरान किसानों ने सड़क किनारे भोजन बनाया और सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना के साथ सुंदरकांड का पाठ भी किया। करणी सेना परिवार के इंदौर जिलाध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने कहा कि किसान पिछले तीन वर्षों से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को करीब 50 ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने भोपाल जा रहे थे, लेकिन उन्हें बलपूर्वक रोक दिया गया। सिसोदिया ने दावा किया कि ग्रेटर रिंग रोड परियोजना से 39 गांवों के 991 किसान प्रभावित हो रहे हैं और लगभग 4,442 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के दायरे में है। उनका आरोप है कि जहां जमीन की बाजार कीमत एक करोड़ से साढ़े तीन करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक है, वहीं किसानों को केवल 18 लाख से 42 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जा रहा है। करणी सेना के सदस्य रवींद्र कन्नौजिया ने भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने डंपर लगाकर रास्ता बंद किया और वाटर कैनन व आंसू गैस का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि आंसू गैस का एक गोला उनके पैर के पास फटा, जिससे उन्हें चोट आई। वहीं किसान राम मकवाना का दावा है कि कार्रवाई में आठ से दस किसान घायल हुए, जिनमें कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। किसानों का कहना है कि वे इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों का स्वागत है, लेकिन उपजाऊ और सिंचित जमीन के बदले उचित मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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इंदौर में भतीजे ने की ताऊ की हत्या, पुलिस को गुमराह करने के लिए रची साजिश, 48 घंटे में गिरफ्तार

इंदौर के राजनगर क्षेत्र में नशे की लत, कर्ज और पारिवारिक विवाद के चलते एक 19 वर्षीय युवक ने अपने ताऊ की चाकू मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए पड़ोसी की दीवार पर खून से सने हाथों के निशान बनाए, ताकि शक किसी और पर जाए। हालांकि पुलिस ने 48 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मृतक की पहचान 50 वर्षीय कमल कुमावत के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में आरोपी चेतन कुमावत ने हत्या की बात स्वीकार कर ली। पूछताछ में कबूला जुर्म पुलिस के अनुसार, आरोपी चेतन कुमावत पहले संयुक्त परिवार में रहता था। बंटवारे के बाद ताऊ और उसके बीच रिश्ते खराब हो गए थे। पूछताछ में उसने बताया कि वह ब्राउन शुगर का आदी है और कर्ज में डूबा हुआ था। उसने ताऊ से पैसे मांगे, लेकिन उन्होंने देने से इनकार कर दिया। डीसीपी सुनील कुमार मेहता के मुताबिक, इसी बात से नाराज होकर चेतन ने रात करीब 2:30 बजे रसोई से चाकू उठाया और सो रहे ताऊ पर ताबड़तोड़ हमला कर उनकी हत्या कर दी। हत्या के बाद रची साजिश हत्या के बाद आरोपी ने अलमारी की चाबी तलाशने के लिए मृतक की जेब खंगाली, लेकिन नकदी नहीं मिली। शक से बचने के लिए उसने जेवरात को हाथ नहीं लगाया। इसके बाद उसने अपने खून से सने हाथ पड़ोसी की दीवार पर लगाए, ताकि ऐसा लगे कि आरोपी पड़ोसी के घर की ओर भागा है। वारदात के बाद उसने खून से सने कपड़े फेंक दिए, हाथ-पैर धोए और सो गया। सुबह किया सामान्य व्यवहार सुबह आरोपी रोज की तरह काम पर चला गया, लेकिन हाथ में चोट होने के कारण वापस घर लौट आया। इसके बाद वह ताऊ के कमरे में पहुंचा और शोर मचाकर परिजनों व पड़ोसियों को बुलाया। लोगों की मदद से कमल कुमावत को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पूरे हत्याकांड का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मामले में आगे की जांच जारी है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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UCC

MP Assembly UCC Bill पेश होते ही BJP-Congress आमने-सामने, Rameshwar Sharma ने साधा निशाना

मध्य प्रदेश की राजनीति में Uniform Civil Code (UCC) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार ने विधानसभा में UCC विधेयक पेश कर दिया है, जिसके बाद प्रदेश की सियासत गर्म हो गई है। जहां बीजेपी सरकार इसे समान अधिकार और एक कानून की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसकी प्रक्रिया और जरूरत को लेकर सवाल उठाए हैं। विधानसभा में UCC Bill पेश होने के दौरान उस समय माहौल और गरमा गया, जब कांग्रेस के एक विधायक काले कपड़े पहनकर सदन पहुंचे। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस पर नाराजगी जताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि UCC जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर विरोध का तरीका सोचने वाला विषय है। MP Assembly में UCC Bill पेश, सरकार ने बताया ऐतिहासिक कदम मध्य प्रदेश सरकार लंबे समय से Uniform Civil Code लागू करने की तैयारी में जुटी थी। सरकार का कहना है कि UCC का उद्देश्य देश और प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था तैयार करना है। प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान नियम लागू करने की बात कही जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे समाज में कानूनी समानता बढ़ेगी और विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले भी कह चुके हैं कि हर नागरिक को समान अधिकार मिलना चाहिए और कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए। Black Dress को लेकर विधानसभा में बढ़ा विवाद UCC विधेयक के दौरान कांग्रेस विधायक के काले कपड़ों में पहुंचने को बीजेपी ने विरोध के संकेत के रूप में देखा। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार का यह कदम जनता के हित और समानता से जुड़ा हुआ है। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इतने बड़े कानूनी बदलाव से पहले सरकार को सभी वर्गों, विशेषज्ञों और आम लोगों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए। विपक्ष ने UCC को लेकर सरकार से कई सवाल भी पूछे हैं। UCC को लेकर BJP और Congress की अलग-अलग राय बीजेपी का कहना है कि Uniform Civil Code से देश में समान नागरिक व्यवस्था मजबूत होगी और पुराने भेदभाव खत्म होंगे। पार्टी इसे सामाजिक सुधार से जोड़कर देख रही है। दूसरी ओर कांग्रेस का तर्क है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। पार्टी ने सरकार से विधेयक के सभी पहलुओं को स्पष्ट करने की मांग की है। MP में UCC पर आगे क्या होगा? अब सभी की नजरें विधानसभा में होने वाली बहस और आगे की प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। UCC Bill पर चर्चा के बाद ही यह साफ होगा कि इसे किस रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। मध्य प्रदेश में UCC अब सिर्फ एक कानून नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विधानसभा के अंदर और बाहर बीजेपी-कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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