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Ajit Pawar

Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar Plane Crash बारामती में लैंडिंग के दौरान बड़ा हादसा

महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार महाराष्ट्र के डिप्टी मुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) का एक विमान हादसे में निधन हो गया। यह दर्दनाक दुर्घटना पुणे जिले के बारामती में लैंडिंग के दौरान हुई, जिसमें विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई। कैसे हुआ Ajit Pawar Plane Crash? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अजित पवार जिस छोटे विमान (Charter Aircraft) से यात्रा कर रहे थे, वह बारामती एयरस्ट्रिप पर उतरने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह ज़मीन से टकराकर क्रैश हो गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के तुरंत बाद मौके पर दमकल और राहत दल पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। विमान में कौन-कौन सवार थे? इस दुर्घटना में: सभी की मौके पर ही मौत हो गई। किसी भी यात्री को बचाया नहीं जा सका। बारामती जा रहे थे Ajit Pawar बताया जा रहा है कि अजित पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे, जहां उन्हें कुछ स्थानीय कार्यक्रमों और बैठकों में शामिल होना था। बारामती उनका गृह क्षेत्र भी माना जाता है, जिससे यह हादसा और भी भावनात्मक हो गया है। हादसे की वजह क्या थी? फिलहाल दुर्घटना के सटीक कारणों की पुष्टि नहीं हुई है।संभावित कारणों में: DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) और अन्य जांच एजेंसियां मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं। देशभर में शोक की लहर Ajit Pawar Death News सामने आने के बाद महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में शोक का माहौल है। राजनीतिक नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने इस दुर्घटना को अपूरणीय क्षति बताया है। सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई है। राजनीति के लिए बड़ा झटका Ajit Pawar को महाराष्ट्र की राजनीति का एक मजबूत और निर्णायक चेहरा माना जाता था। उनका अचानक इस तरह जाना राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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EU

भारत‑EU Trade Deal 2026 मोदी बोले “दुनियाभर में इसकी चर्चा हो रही है”

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लगभग 20 साल की बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक Trade Deal / Free Trade Agreement (FTA) पर आज सहमति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार देते हुए कहा कि यह समझौता भारत और EU दोनों के लिए बड़े आर्थिक अवसर लेकर आएगा। FTA से भारत और EU को क्या मिलेगा? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह डील दुनियाभर में चर्चा का विषय बन रही है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और निवेश के अवसर बढ़ेंगे।” अमेरिका की प्रतिक्रिया इस डील को लेकर अमेरिका ने अपनी नाराजगी जताई। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता कुछ मामलों में अमेरिकी हितों के विपरीत हो सकता है। विशेष रूप से रूस से तेल आयात और टैरिफ नीतियों को लेकर अमेरिका ने आपत्ति व्यक्त की है। पिछले कुछ समय से अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ और व्यापारिक तनाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में भारत ने EU के साथ यह समझौता कर अपने विकल्प मजबूत किए हैं। Global Impact और भविष्य विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता वैश्विक व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत और EU के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करेगा और दुनिया के व्यापारिक संतुलन पर असर डाल सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह डील सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक आर्थिक पहचान को और मजबूत करेगी।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Alankar Agnihotri

Alankar Agnihotri बरेली CM Office में विवाद और सस्पेंशन

उत्तर प्रदेश के बरेली में City Magistrate अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने 26 जनवरी को अचानक अपने पद से इस्तीफा (resignation) दे दिया, जिससे प्रशासन में हलचल मच गई। उन्होंने यह कदम मुख्य रूप से नई UGC नियमों और प्रशासनिक नीतियों के विरोध में उठाया। उनके इस्तीफे के बाद, उन्होंने इसे “काला कानून” बताते हुए इसकी वापसी की मांग की। Allegations और Administrative Response इस्तीफा देने के तुरंत बाद, Alankar Agnihotri ने आरोप लगाया कि उन्हें बरेली DM कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया। उनका कहना था कि उन्हें कार्यालय में रोका गया और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जान का खतरा महसूस हुआ। वहीं, प्रशासन ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि मजिस्ट्रेट को सिर्फ बातचीत के लिए बुलाया गया था। किसी तरह का बंधक बनाने या अपमान करने का मामला नहीं था। Suspension और Departmental Inquiry उत्तर प्रदेश सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) को सस्पेंड कर दिया। उनके खिलाफ departmental inquiry शुरू कर दी गई है। सरकार के मुताबिक प्रारंभिक तौर पर उनका व्यवहार अनुशासनहीन प्रतीत हुआ। सस्पेंड के दौरान उन्हें सीमित भत्ता मिलेगा। धरना और विरोध सस्पेंशन के बाद, Alankar Agnihotri कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि जब तक DM यह स्पष्ट नहीं करेंगे कि उन्हें अपमानजनक शब्द किसने कहे, धरना जारी रहेगा। मजिस्ट्रेट ने इसे अपनी न्याय की लड़ाई और प्रशासन पर विश्वासघात का प्रतीक बताया। विवाद के मुख्य पहलू यह मामला न केवल बरेली प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है, बल्कि राज्य सरकार की संवेदनशीलता और अधिकारी-सरकारी नीतियों पर सवाल भी उठा रहा है। अब देखना होगा कि departmental inquiry और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UGC

UGC New Rules विवाद शिक्षा नीति से सियासत तक, बीजेपी में असंतोष और विपक्ष की चुप्पी

University Grants Commission (UGC) के नए नियम इन दिनों सिर्फ शिक्षा जगत में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां आमतौर पर ऐसे मुद्दों पर विपक्ष सबसे पहले मोर्चा खोलता है, इस बार तस्वीर उलटी है। सत्तारूढ़ बीजेपी के भीतर ही असहजता और विरोध के स्वर उभर रहे हैं, जबकि विपक्ष अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रहा है। यह पूरा विवाद अब केवल नियमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संघीय ढांचे, राज्यों के अधिकार और आने वाले चुनावों की राजनीति से भी जुड़ गया है। UGC New Rules पर बीजेपी के अंदर विरोध क्यों? UGC के नए नियमों को लेकर सबसे बड़ा सवाल राज्यों की भूमिका पर उठ रहा है। शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है, यानी इसमें केंद्र और राज्य दोनों को अधिकार हैं। लेकिन नए प्रावधानों से यह धारणा बन रही है कि केंद्र सरकार का दखल राज्यों के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा व्यवस्था में बढ़ जाएगा। खास तौर पर कुलपतियों की नियुक्ति, प्रशासनिक ढांचे और अकादमिक स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर कई राज्य सरकारें खुद को असहज महसूस कर रही हैं। यही वजह है कि बीजेपी-शासित राज्यों के कुछ नेता भी खुलकर या अंदरखाने इन नियमों पर सवाल उठा रहे हैं। उनकी चिंता सिर्फ सैद्धांतिक नहीं है। ज़मीनी हकीकत यह है कि विश्वविद्यालयों में अगर शिक्षक संगठनों या छात्र समूहों का विरोध तेज़ होता है, तो उसका सीधा असर राज्य सरकारों और स्थानीय नेतृत्व पर पड़ेगा। चुनावी सालों में कोई भी नेता ऐसा जोखिम नहीं लेना चाहता। पार्टी के भीतर एक और खींचतान भी साफ दिखती है। एक धड़ा मानता है कि उच्च शिक्षा में एकरूपता और तेज़ सुधार के लिए केंद्रीकरण ज़रूरी है। वहीं दूसरा धड़ा इसे “ओवर-रेगुलेशन” और संघीय ढांचे पर हमला बता रहा है। इसी टकराव ने बीजेपी के अंदर विरोध को हवा दी है। विपक्ष की चुप्पी के मायने क्या हैं? विपक्ष की चुप्पी पहली नज़र में अजीब लगती है, लेकिन इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति दिखती है। पहली बात, UGC के नियम आम जनता के लिए तकनीकी और जटिल हैं। यह ऐसा मुद्दा नहीं है जो तुरंत भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा करे। विपक्ष शायद इंतज़ार कर रहा है कि शिक्षक संगठन, छात्र संघ या राज्य सरकारें पहले खुलकर विरोध करें, ताकि इसे जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके। दूसरी बात, विपक्ष बीजेपी के भीतर उभर रही दरार को अपने आप गहराने देना चाहता है। अगर सत्तारूढ़ पार्टी अपने ही फैसले पर बंटी हुई दिखती है, तो विपक्ष के लिए यह राजनीतिक रूप से फायदेमंद है। ऐसे में सीधे हमला करने के बजाय “वेट एंड वॉच” की नीति ज्यादा सुरक्षित मानी जा रही है। तीसरी वजह राज्यों की राजनीति से जुड़ी है। तमिलनाडु और केरल जैसे विपक्ष-शासित राज्यों में केंद्र के शिक्षा में हस्तक्षेप का विरोध पहले से ही होता रहा है। वहां यह मुद्दा नया नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष फिलहाल महंगाई, बेरोज़गारी, जाति जनगणना और किसानों जैसे हाई-वोल्टेज मुद्दों पर ज्यादा फोकस कर रहा है। राजनीति में इसके संकेत क्या हैं? इस पूरे विवाद से तीन बड़े संकेत मिलते हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India

India-EU Summit 2026 राजघाट विज़िट से लेकर Trade Deal तक, दिल्ली में सुरक्षा और ट्रैफिक अलर्ट

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में आज का दिन खास बन गया। राजधानी दिल्ली में 16वां India-EU Summit आयोजित हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और EU के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने माहौल को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। एक तरफ राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि, तो दूसरी ओर ट्रेड डील और रणनीतिक साझेदारी पर बड़ी बातचीत — आज का हर पल सुर्खियों में है। राजघाट दौरा: सुरक्षा के चलते ट्रैफिक पर असर सुबह EU नेताओं के राजघाट पहुंचने से पहले ही दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कई इलाकों में ट्रैफिक कर्फ्यू और डायवर्जन लागू कर दिए थे।बहादुर शाह ज़फर मार्ग, ITO चौक, दिल्ली गेट, शांतिवन चौक, IP फ्लाईओवर और असफ अली रोड जैसे रास्तों पर कुछ घंटों तक गाड़ियों की आवाजाही सीमित रही। राजघाट में EU प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। यह पल सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि भारत-EU संबंधों में सम्मान और साझेदारी का प्रतीक भी माना गया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही यात्रियों से अपील की थी कि वे सुबह के समय इन मार्गों से बचें और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। कई लोगों को दफ्तर और स्कूल पहुंचने में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे एक अहम अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए जरूरी कदम बताया। Summit की बड़ी तस्वीर: रिश्तों में नया अध्याय राजघाट कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन से मुलाकात की। बातचीत में व्यापार, निवेश, क्लाइमेट चेंज, टेक्नोलॉजी, डिफेंस और ग्लोबल सिक्योरिटी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। उर्सुला वॉन डर लेयेन ने कहा कि“एक मजबूत और सफल भारत पूरी दुनिया के लिए स्थिरता और समृद्धि लेकर आता है।”उनके इस बयान को दोनों पक्षों के बीच बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है। Free Trade Agreement: दो दशकों बाद बड़ी उम्मीद इस शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा फोकस रहा India-EU Free Trade Agreement (FTA)। करीब 20 साल से अटका यह समझौता अब अंतिम दौर में पहुंचता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अगर यह डील अगले कुछ महीनों में औपचारिक रूप से साइन हो जाती है, तो इससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग, IT, फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है। EU पहले से ही भारत का एक प्रमुख ट्रेड पार्टनर है, और यह समझौता रिश्तों को नई ऊंचाई दे सकता है। Republic Day से Summit तक: मजबूत होता भरोसा गौर करने वाली बात यह भी है कि EU नेताओं ने 26 जनवरी को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया था। परेड देखने के बाद ही यह साफ हो गया था कि इस बार का India-EU Summit सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी साझेदारी की नींव रखने वाला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Uttarakhand

Uttarakhand Temple बदरीनाथ-केदारनाथ में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक का प्लान

उत्तराखंड (Uttarakhand ) के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आ सकता है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। यह प्रस्ताव समिति की आगामी बोर्ड बैठक में पेश किया जाएगा। BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, इस कदम का मकसद देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं और मंदिरों की पवित्रता को बनाए रखना है। उनका कहना है कि परंपरागत रूप से इन धामों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश नहीं होता था, लेकिन समय के साथ यह नियम ढीला पड़ गया। अब समिति इसे फिर से सख्ती से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। Gangotri Dham में पहले ही लागू हो चुका है बैन इस फैसले की पृष्ठभूमि में गंगोत्री धाम का उदाहरण भी अहम माना जा रहा है। वहां पहले ही गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाई जा चुकी है। श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया था और इसका उद्देश्य मंदिर की धार्मिक गरिमा की रक्षा बताया गया था। अब गंगोत्री के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ में भी इसी तरह के नियम लागू करने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। इससे संकेत मिलते हैं कि चारधाम यात्रा से जुड़े प्रमुख स्थलों पर प्रवेश नियम और सख्त हो सकते हैं। अभी फैसला नहीं, सिर्फ प्रस्ताव महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है, कोई अंतिम निर्णय नहीं। BKTC की बोर्ड बैठक में इस पर चर्चा होगी और यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो आगे राज्य सरकार और प्रशासन के साथ समन्वय कर इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। समिति के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह का नियम लागू करने से पहले कानूनी पहलुओं और सामाजिक प्रभावों पर भी विचार किया जाएगा। समर्थन और विरोध, दोनों तरफ प्रतिक्रियाएँ इस प्रस्ताव को लेकर प्रतिक्रियाएँ मिलीजुली हैं।समर्थकों का कहना है कि इससे मंदिरों की पवित्रता और परंपराएं सुरक्षित रहेंगी। उनका मानना है कि चारधाम जैसे तीर्थस्थलों को केवल श्रद्धा और आस्था के नजरिए से देखा जाना चाहिए। वहीं आलोचकों का तर्क है कि ऐसा कदम सामाजिक समावेशन और धार्मिक सौहार्द के खिलाफ जा सकता है। कुछ लोग इसे संवैधानिक दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं। आगे क्या हो सकता है? फिलहाल सबकी निगाहें BKTC की बोर्ड बैठक पर टिकी हैं।अगर प्रस्ताव पास होता है, तो बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर परिसर में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर औपचारिक रोक लग सकती है। यह फैसला न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी बड़ी बहस को जन्म दे सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का केंद्र बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शंकराचार्य

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाया संगम स्नान का मुद्दा Deputy CM Keshav Maurya का बयान

प्रयागराज माघ मेले (Prayagraj Magh Mela 2026) में इस बार धार्मिक और राजनीतिक तनाव (Religious & Political Tension) देखने को मिला। मामला तब गरमा गया जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) को संगम में स्नान करने से रोका गया और प्रशासन के साथ उनका विवाद तेज हो गया। इस घटना ने सिर्फ धार्मिक समुदाय ही नहीं बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी। विवाद की पृष्ठभूमि (Background of the Controversy) स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 18 जनवरी से मेला प्रशासन (Mela Administration) के खिलाफ विरोध करना शुरू किया। उनका कहना था कि बिना सम्मान और माफी के वह संगम में स्नान (Holy Dip in Sangam) नहीं करेंगे। इस बीच उनके शिविर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई और प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे लगाए। स्वामी ने प्रशासन की चूक को सार्वजनिक रूप से उठाया और शांतिपूर्ण समाधान की मांग की। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का डिप्टी सीएम पर बयान इस विवाद के बीच स्वामी ने डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य (Deputy CM Keshav Maurya) की तारीफ की। उन्होंने कहा: “ऐसे समझदार नेता को दबाया नहीं जाना चाहिए। उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री होना चाहिए।” यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। स्वामी ने मौर्य को संयमित और समझदार नेतृत्व वाला नेता बताया और प्रशासन की गलतियों को सुधारने की क्षमता पर भी जोर दिया। डिप्टी CM केशव मौर्य का रुख (Deputy CM Keshav Maurya’s Response) केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि वे स्वामी से औपचारिक मुलाकात नहीं करेंगे, लेकिन उन्होंने सकारात्मक संवाद की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की गलती की जांच होगी और विवाद को शांति से सुलझाना चाहिए। मौर्य ने स्वामी को आग्रह किया कि वे संगम में स्नान कर लोगों को एक सकारात्मक संदेश (Positive Message) दें। सुरक्षा और प्रशासनिक पहलू (Security & Administrative Aspect) स्वामी के शिविर के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई और कुछ समूहों के तनावपूर्ण रुझान के चलते प्रशासन सतर्क है। यह विवाद अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है। सियासी और सामाजिक प्रभाव (Political & Social Impact) प्रयागराज माघ मेले का यह विवाद केवल स्नान और धार्मिक अधिकार तक सीमित नहीं है। यह प्रशासनिक फैसलों, राजनीतिक संदेशों और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन का जीवंत उदाहरण बन चुका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Manali

Manali Snow Alert 2026 ट्रैफिक जाम और फंसे Tourist का हाल

हिमाचल प्रदेश का मनाली (Manali) और कुल्लू क्षेत्र इस समय भारी बर्फबारी और ट्रैफिक जाम की चपेट में है। 26 जनवरी के लॉन्ग वीकेंड पर बर्फ देखने आए tourists को यहां का नज़ारा बेहद रोमांचक तो लग रहा था, लेकिन असली चुनौती तब आई जब सड़कों पर लंबा जाम और फंसे वाहन सामने आए। Kullu-Manali Highway पर Traffic Jam का तांडव भारी हिमपात और वीकेंड ट्रैफिक के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग 3 (NH3) पर 8 से 15 किलोमीटर तक लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। कई यात्रियों को सिर्फ 15 किलोमीटर की दूरी तय करने में 10-12 घंटे का समय लग गया। ट्रैफिक के बीच कई पर्यटक बर्फ में अपने सामान के साथ पैदल चलने को मजबूर हुए। Tourists की मुश्किलें स्थानीय लोगों ने भी आगे आकर बर्फ में फंसे पर्यटकों को गर्म चाय और मदद प्रदान की। प्रशासन की तैयारी और उपाय मौसम विभाग की चेतावनी मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बर्फबारी/बारिश की संभावना के लिए चेतावनी जारी की है। पर्यटकों को सलाह दी जा रही है कि वे सड़कें खुलने और मौसम अनुकूल होने पर ही यात्रा करें। Social Media पर वायरल दृश्य सोशल मीडिया पर भी Manali की कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिनमें ट्रैफिक जाम, बर्फ में फंसे लोग और हिमाचल की सर्दी का नज़ारा साफ दिखाई दे रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Republic Day

Republic Day परेड 2026 कर्तव्य पथ पर रचा गया इतिहास, New India की नई पहचान

कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस (Republic Day ) की परेड इस बार सिर्फ एक सरकारी समारोह नहीं, बल्कि बदलते भारत की कहानी बन गई। परंपरा के रंग, आधुनिक तकनीक की चमक और समावेशिता का संदेश — सब कुछ एक ही मंच पर दिखाई दिया। इस साल की परेड में कई ऐसे पल रहे, जो लंबे समय तक याद रखे जाएंगे। दो Chief Guest, एक मंच Republic Day के इतिहास में पहली बार दो मुख्य अतिथि आमंत्रित किए गए। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन की मौजूदगी ने भारत-यूरोप रिश्तों की मजबूती को नए स्तर पर पहुंचाया। दर्शकों के बीच यह चर्चा का बड़ा विषय रहा कि एक साथ दो वैश्विक नेता भारत के लोकतंत्र के इस उत्सव में शामिल हुए। महिला कमांडेंट के पीछे पूरा पुरुष दस्ता CRPF की पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व जब सहायक कमांडेंट सिमरन बाला ने किया, तो तालियों की गूंज खुद परेड से ज्यादा तेज़ थी। यह सिर्फ एक परेड मूव नहीं था, बल्कि उस बदलाव का संकेत था, जिसमें महिलाएं अब हर मोर्चे पर नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। सेना का लाइव युद्ध प्रदर्शन इस बार परेड में सेना ने ‘बैटल एरे फॉर्मेशन’ के जरिए युद्ध जैसी स्थिति का लाइव डेमो दिखाया। आधुनिक हथियार, तेज़ मूवमेंट और रणनीतिक अभ्यास ने लोगों को रोमांचित कर दिया। कई दर्शकों के लिए यह पल परेड का सबसे दमदार हिस्सा साबित हुआ। ड्रोन से लेकर ब्रह्मोस तक AI आधारित सिस्टम, ड्रोन, रोबोटिक यूनिट्स, ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल जैसी प्रणालियों की झलक ने यह साफ कर दिया कि भारत अब रक्षा तकनीक में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। दो कूबड़ वाले ऊंट भी बने आकर्षण परेड में दो कूबड़ वाले बेक्ट्रियन ऊंटों की मौजूदगी ने सभी का ध्यान खींचा। यह नज़ारा जितना अनोखा था, उतना ही यह संदेश भी देता था कि कठिन इलाकों में तैनाती के लिए सेना किस तरह पारंपरिक और आधुनिक संसाधनों का संतुलन बना रही है। थीम: ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ इस साल की थीम “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” रही। झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के ज़रिए राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक यात्रा, आज़ादी की लड़ाई में उसकी भूमिका और आज के भारत में उसकी अहमियत को खूबसूरती से दिखाया गया। झांकियां और कलाकारों की भव्य प्रस्तुति करीब 2500 कलाकारों ने मंच संभाला और 30 से ज्यादा झांकियों ने भारत की विविधता, संस्कृति और विकास की कहानी सुनाई। डिजिटल इंडिया, महिला सशक्तिकरण, हरित ऊर्जा और स्टार्टअप इंडिया जैसे विषयों पर आधारित झांकियां खास तौर पर चर्चा में रहीं। नई सैन्य इकाइयों की पहली झलक ‘भैरव बटालियन’ और ‘शक्तिबान रेजिमेंट’ जैसी नई इकाइयों को पहली बार परेड में शामिल किया गया। यह भारत की बदलती सुरक्षा रणनीति और नई पीढ़ी की सैन्य ताकत का संकेत माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Republic Day

Republic Day India 77वां गणतंत्र दिवस वायुसेना का ‘Sindoor Formation’ और नई मिसाइल की झलक

देश ने आज 77वां गणतंत्र दिवस (Republic Day) पूरे जोश, गर्व और भावनात्मक माहौल में मनाया। सुबह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद कर्तव्य पथ पर भव्य परेड में भारत की सैन्य शक्ति, स्वदेशी तकनीक और सांस्कृतिक विविधता की शानदार झलक देखने को मिली। शहीदों को नमन से शुरू हुआ गणतंत्र दिवस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित किया और देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों को नमन किया। यह क्षण भावुक भी था और प्रेरणादायक भी, जिसने पूरे समारोह को गरिमा और गंभीरता प्रदान की। कर्तव्य पथ पर भव्य परेड, विदेशी मेहमान भी रहे मौजूद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अध्यक्षता में आयोजित परेड में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। यह भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रिश्तों का संकेत माना गया। ‘Sindoor Formation’ में वायुसेना का दमदार फ्लायपास्ट भारतीय वायुसेना ने इस बार ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ नाम से खास फ्लायपास्ट किया। राफेल, सुखोई-30, मिग-29 और जगुआर जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों ने जब आसमान में एक साथ उड़ान भरी, तो पूरा कर्तव्य पथ तालियों से गूंज उठा। कुल 29 विमानों और हेलीकॉप्टरों ने हिस्सा लिया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वदेशी Hypersonic Glide Missile का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन परेड का सबसे चर्चित आकर्षण डीआरडीओ की स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का डेब्यू रहा। यह मिसाइल बेहद तेज रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम है और दुश्मन के रडार से बचना इसके लिए मुश्किल माना जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की दिशा में एक बड़ा कदम है। त्रि-सेवा झांकियां और सैन्य शक्ति की झलक थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त झांकियों में ब्रह्मोस, आकाश और अन्य आधुनिक हथियार प्रणालियां प्रदर्शित की गईं। हर झांकी भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और तकनीकी प्रगति की कहानी कह रही थी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिखी भारत की विविधता करीब 2,500 कलाकारों ने देश के अलग-अलग राज्यों की लोकसंस्कृति, नृत्य और संगीत की प्रस्तुति दी। इस वर्ष की थीम ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति को समर्पित रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस रंगारंग कार्यक्रम में खोया नजर आया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chandigarh के एलांते मॉल में हंगामा, खाने में कीड़ा मिलने का आरोप

Chandigarh के एलांते मॉल में हंगामा, खाने में कीड़ा मिलने का आरोप

Chandigarh के Elante Mall के फूड कोर्ट में उस वक्त हंगामा हो गया, जब एक ग्राहक ने खाने में कीड़ा मिलने का आरोप लगाया। ग्राहक का कहना है कि उसने चाइनीज डिश ऑर्डर की थी, जिसमें उसे कीड़ा नजर आया। उसने इस घटना का वीडियो भी दिखाया, जिसके बाद मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी बढ़ गई। मामले के बढ़ने पर संबंधित कैफे के मैनेजर (GM) ने स्थिति संभालने की कोशिश की। उन्होंने ग्राहक से माफी मांगी और कहा कि इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। घटना के बाद फूड कोर्ट में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अन्य ग्राहकों ने भी खाने की क्वालिटी और सफाई को लेकर चिंता जताई। यह मामला एक बार फिर फूड सेफ्टी और हाइजीन को लेकर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त जांच और कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
Parshuram Jayanti पर इंदौर में भव्य शोभायात्रा, मुख्यमंत्री ने किए बड़े ऐलान

Parshuram Jayanti पर इंदौर में भव्य शोभायात्रा, मुख्यमंत्री ने किए बड़े ऐलान

Indore में Parshuram Jayanti के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और पूरा शहर भक्तिमय माहौल में रंगा नजर आया। यह शोभायात्रा Sarv Brahmin Samaj की ओर से आयोजित की गई, जिसमें पारंपरिक झांकियां, बैंड-बाजे और धार्मिक उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Mohan Yadav भी शामिल हुए। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए तीर्थ स्थलों के विकास और सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं। उनका कहना था कि सरकार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। इस मौके पर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज को एकजुट करने का भी संदेश देता नजर आया।
तन्वी कोलते बनीं Bigg Boss Marathi 6 की विनर, राकेश-विशाल को मिली हार

तन्वी कोलते बनीं Bigg Boss Marathi 6 की विनर, राकेश-विशाल को मिली हार

रियलिटी शो Bigg Boss Marathi 6 का फिनाले काफी रोमांचक रहा। इस सीजन की ट्रॉफी Tanvi Kolte ने अपने नाम कर ली। शो के आखिरी मुकाबले में कई मजबूत कंटेस्टेंट्स के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। Rakesh और Vishal भी फाइनल तक पहुंचे, लेकिन अंत में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस शो को Salman Khan के पॉपुलर रियलिटी शो के फॉर्मेट से जोड़ा जाता है, जिसकी वजह से दर्शकों में इसका क्रेज काफी ज्यादा रहता है। तन्वी कोलते की जीत के बाद उनके फैंस में खुशी की लहर है। पूरे सीजन में उनकी परफॉर्मेंस और स्ट्रॉन्ग पर्सनैलिटी को दर्शकों ने काफी पसंद किया। फिनाले एपिसोड में इमोशंस, ड्रामा और एंटरटेनमेंट का जबरदस्त तड़का देखने को मिला, जिसने दर्शकों को आखिरी तक बांधे रखा।
महिला आरक्षण के समर्थन में BJP की रैली, सीएम बोले- विशेष सत्र बुलाया जाएगा

महिला आरक्षण के समर्थन में BJP की रैली, सीएम बोले- विशेष सत्र बुलाया जाएगा

Bhopal में महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। BJP ने इस मुद्दे के समर्थन में आज आक्रोश रैली निकालने का ऐलान किया है। रैली से पहले मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीर है और जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। उनका कहना है कि महिलाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए और इसमें किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। सीएम ने Indian National Congress पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष महिलाओं के अधिकारों को रोकने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है और आम लोगों की नजरें भी अब आने वाले फैसलों पर टिकी हुई हैं।
ई-रिक्शा में महिला के 5 लाख के जेवर चोरी, Gwalior में वारदात

ई-रिक्शा में महिला के 5 लाख के जेवर चोरी, Gwalior में वारदात

Gwalior में एक हैरान करने वाली चोरी की घटना सामने आई है। शादी में जा रही एक महिला के करीब 5 लाख रुपये के जेवर ई-रिक्शा में सफर के दौरान चोरी हो गए। जानकारी के अनुसार, महिला आराम से ई-रिक्शा में बैठकर अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। रास्ते में गड्ढों और खराब सड़क के कारण रिक्शा में बार-बार झटके लग रहे थे। इसी दौरान किसी ने मौके का फायदा उठाकर बैग से जेवर पार कर दिए। महिला को चोरी का पता तब चला जब वह अपने गंतव्य पर पहुंची। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और यात्रियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर भीड़भाड़ या खराब रास्तों पर सफर करते समय अपने सामान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

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