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पश्चिमी रिंग रोड मुआवजे को लेकर किसानों का प्रदर्शन, भोपाल कूच रोका; वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप

Indore: पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर करणी सेना परिवार और किसानों का आंदोलन सोमवार को तेज हो गया। ट्रैक्टरों के साथ भोपाल कूच के लिए निकले किसानों को शिप्रा चौराहे पर पुलिस और प्रशासन ने रोक दिया, जिसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। किसानों का आरोप है कि उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों के अनुसार इस कार्रवाई में सात किसान घायल हुए। इसके बाद किसान बरलाई जागीर में धरने पर बैठ गए और देर रात तक शिप्रा-सांवेर मार्ग पर डटे रहे। आंदोलन के दौरान किसानों ने सड़क किनारे भोजन बनाया और सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना के साथ सुंदरकांड का पाठ भी किया। करणी सेना परिवार के इंदौर जिलाध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने कहा कि किसान पिछले तीन वर्षों से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को करीब 50 ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने भोपाल जा रहे थे, लेकिन उन्हें बलपूर्वक रोक दिया गया। सिसोदिया ने दावा किया कि ग्रेटर रिंग रोड परियोजना से 39 गांवों के 991 किसान प्रभावित हो रहे हैं और लगभग 4,442 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के दायरे में है। उनका आरोप है कि जहां जमीन की बाजार कीमत एक करोड़ से साढ़े तीन करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक है, वहीं किसानों को केवल 18 लाख से 42 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जा रहा है। करणी सेना के सदस्य रवींद्र कन्नौजिया ने भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने डंपर लगाकर रास्ता बंद किया और वाटर कैनन व आंसू गैस का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि आंसू गैस का एक गोला उनके पैर के पास फटा, जिससे उन्हें चोट आई। वहीं किसान राम मकवाना का दावा है कि कार्रवाई में आठ से दस किसान घायल हुए, जिनमें कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। किसानों का कहना है कि वे इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों का स्वागत है, लेकिन उपजाऊ और सिंचित जमीन के बदले उचित मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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इंदौर में भतीजे ने की ताऊ की हत्या, पुलिस को गुमराह करने के लिए रची साजिश, 48 घंटे में गिरफ्तार

इंदौर के राजनगर क्षेत्र में नशे की लत, कर्ज और पारिवारिक विवाद के चलते एक 19 वर्षीय युवक ने अपने ताऊ की चाकू मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए पड़ोसी की दीवार पर खून से सने हाथों के निशान बनाए, ताकि शक किसी और पर जाए। हालांकि पुलिस ने 48 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मृतक की पहचान 50 वर्षीय कमल कुमावत के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में आरोपी चेतन कुमावत ने हत्या की बात स्वीकार कर ली। पूछताछ में कबूला जुर्म पुलिस के अनुसार, आरोपी चेतन कुमावत पहले संयुक्त परिवार में रहता था। बंटवारे के बाद ताऊ और उसके बीच रिश्ते खराब हो गए थे। पूछताछ में उसने बताया कि वह ब्राउन शुगर का आदी है और कर्ज में डूबा हुआ था। उसने ताऊ से पैसे मांगे, लेकिन उन्होंने देने से इनकार कर दिया। डीसीपी सुनील कुमार मेहता के मुताबिक, इसी बात से नाराज होकर चेतन ने रात करीब 2:30 बजे रसोई से चाकू उठाया और सो रहे ताऊ पर ताबड़तोड़ हमला कर उनकी हत्या कर दी। हत्या के बाद रची साजिश हत्या के बाद आरोपी ने अलमारी की चाबी तलाशने के लिए मृतक की जेब खंगाली, लेकिन नकदी नहीं मिली। शक से बचने के लिए उसने जेवरात को हाथ नहीं लगाया। इसके बाद उसने अपने खून से सने हाथ पड़ोसी की दीवार पर लगाए, ताकि ऐसा लगे कि आरोपी पड़ोसी के घर की ओर भागा है। वारदात के बाद उसने खून से सने कपड़े फेंक दिए, हाथ-पैर धोए और सो गया। सुबह किया सामान्य व्यवहार सुबह आरोपी रोज की तरह काम पर चला गया, लेकिन हाथ में चोट होने के कारण वापस घर लौट आया। इसके बाद वह ताऊ के कमरे में पहुंचा और शोर मचाकर परिजनों व पड़ोसियों को बुलाया। लोगों की मदद से कमल कुमावत को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पूरे हत्याकांड का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मामले में आगे की जांच जारी है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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UCC

MP Assembly UCC Bill पेश होते ही BJP-Congress आमने-सामने, Rameshwar Sharma ने साधा निशाना

मध्य प्रदेश की राजनीति में Uniform Civil Code (UCC) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार ने विधानसभा में UCC विधेयक पेश कर दिया है, जिसके बाद प्रदेश की सियासत गर्म हो गई है। जहां बीजेपी सरकार इसे समान अधिकार और एक कानून की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसकी प्रक्रिया और जरूरत को लेकर सवाल उठाए हैं। विधानसभा में UCC Bill पेश होने के दौरान उस समय माहौल और गरमा गया, जब कांग्रेस के एक विधायक काले कपड़े पहनकर सदन पहुंचे। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस पर नाराजगी जताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि UCC जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर विरोध का तरीका सोचने वाला विषय है। MP Assembly में UCC Bill पेश, सरकार ने बताया ऐतिहासिक कदम मध्य प्रदेश सरकार लंबे समय से Uniform Civil Code लागू करने की तैयारी में जुटी थी। सरकार का कहना है कि UCC का उद्देश्य देश और प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था तैयार करना है। प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान नियम लागू करने की बात कही जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे समाज में कानूनी समानता बढ़ेगी और विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले भी कह चुके हैं कि हर नागरिक को समान अधिकार मिलना चाहिए और कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए। Black Dress को लेकर विधानसभा में बढ़ा विवाद UCC विधेयक के दौरान कांग्रेस विधायक के काले कपड़ों में पहुंचने को बीजेपी ने विरोध के संकेत के रूप में देखा। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार का यह कदम जनता के हित और समानता से जुड़ा हुआ है। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इतने बड़े कानूनी बदलाव से पहले सरकार को सभी वर्गों, विशेषज्ञों और आम लोगों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए। विपक्ष ने UCC को लेकर सरकार से कई सवाल भी पूछे हैं। UCC को लेकर BJP और Congress की अलग-अलग राय बीजेपी का कहना है कि Uniform Civil Code से देश में समान नागरिक व्यवस्था मजबूत होगी और पुराने भेदभाव खत्म होंगे। पार्टी इसे सामाजिक सुधार से जोड़कर देख रही है। दूसरी ओर कांग्रेस का तर्क है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। पार्टी ने सरकार से विधेयक के सभी पहलुओं को स्पष्ट करने की मांग की है। MP में UCC पर आगे क्या होगा? अब सभी की नजरें विधानसभा में होने वाली बहस और आगे की प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। UCC Bill पर चर्चा के बाद ही यह साफ होगा कि इसे किस रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। मध्य प्रदेश में UCC अब सिर्फ एक कानून नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विधानसभा के अंदर और बाहर बीजेपी-कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
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खंडवा में सागर आरतानी बने भाजयुमो जिलाध्यक्ष, शुभम पटेल को मिली जिला महामंत्री की जिम्मेदारी

खंडवा। लंबे समय से लंबित भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर जारी इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। भाजपा युवा मोर्चा ने सागर आरतानी को खंडवा जिले का नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं, अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार रहे शुभम पटेल को संगठन ने जिला महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है। सागर आरतानी, पूर्व जिलाध्यक्ष अनूप पटेल की जगह अब युवा मोर्चा की कमान संभालेंगे। उनकी नियुक्ति को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर चर्चाएं चल रही थीं। सांसद गुट के समर्थन से मिली जिम्मेदारी जानकारी के मुताबिक, सागर आरतानी को सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का समर्थन प्राप्त था। संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर पहले से नाराज चल रहे सांसद पाटिल ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष गुटबाजी की शिकायत भी की थी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर सागर आरतानी के नाम का समर्थन करते हुए प्रदेश संगठन को उनका नाम भेजा था। शुभम पटेल को बनाया गया जिला महामंत्री दूसरी ओर, अध्यक्ष पद की दौड़ में एबीवीपी से जुड़े शुभम पटेल भी मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। उनके नाम पर संगठन के भीतर व्यापक सहमति बताई जा रही थी। हालांकि, अंतिम निर्णय में सागर आरतानी को जिलाध्यक्ष बनाया गया, जबकि संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए शुभम पटेल को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई। नियुक्ति को लेकर चली थी लंबी कवायद सागर आरतानी की दावेदारी के दौरान कुछ नेताओं ने उनके कारोबारी होने और संगठनात्मक अनुभव को लेकर सवाल उठाए थे। वहीं, समर्थकों ने तर्क दिया कि भाजपा पहले भी विभिन्न व्यापारिक पृष्ठभूमि के कार्यकर्ताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देती रही है। अंततः प्रदेश नेतृत्व ने दोनों प्रमुख दावेदारों को संगठन में अहम जिम्मेदारी देकर संतुलन साधने की कोशिश की है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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शराब पार्टी के बाद विवाद में युवक की मौत, परिजनों ने थाने के सामने किया चक्काजाम

ग्वालियर। ग्वालियर में दोस्तों के साथ हुई शराब पार्टी के बाद हुए विवाद ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। मामूली पैसों के विवाद में कथित धक्का लगने से घायल हुए 46 वर्षीय युवक की तीन दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने शव को थाने के सामने रखकर चक्काजाम किया और आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। माधोगंज थाना क्षेत्र के जामदार का बाड़ा निवासी मनोज सिसोदिया ने 17 जुलाई को अपने दोस्तों प्रवीण और सोनू काका के साथ शराब पार्टी की थी। पार्टी के बाद घर लौटे मनोज को याद आया कि उनके कुछ पैसे वहीं छूट गए हैं। जब वह पैसे लेने वापस पहुंचे तो इसी बात को लेकर तीनों के बीच विवाद हो गया। परिजनों का आरोप है कि कहासुनी के दौरान दोनों आरोपियों ने मनोज को धक्का दे दिया, जिससे वह नाली में गिर पड़े और उनका सिर पत्थर से टकरा गया। गंभीर रूप से घायल मनोज को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां तीन दिन तक उपचार के बाद रविवार को उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर सीधे माधोगंज थाने पहुंचे और सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन करते हुए पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। जांच के दौरान सामने आए CCTV फुटेज में तीनों दोस्त एक साथ जाते दिखाई दे रहे हैं। फुटेज में विवाद के बाद मनोज को धक्का लगने की घटना भी नजर आती है। वहीं, मनोज के गिरने के बाद दोनों आरोपी उन्हें उठाकर सहारा देते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी दिव्या तिवारी ने बताया कि CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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भाजयुमो ने 15 जिलों के जिला अध्यक्षों की घोषणा की, सात जिलों में महामंत्रियों की भी नियुक्ति

भोपाल। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने संगठन विस्तार के तहत मध्यप्रदेश के 15 जिलों में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा की है। इसके साथ ही सात जिलों में जिला महामंत्रियों के नाम भी घोषित किए गए हैं। जिन जिलों में जिला अध्यक्ष पद को लेकर अधिक दावेदार थे, वहां संगठन ने संतुलन बनाते हुए एक दावेदार को अध्यक्ष और दूसरे को महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है। इन जिलों में बनाए गए जिला अध्यक्ष सात जिलों में जिला महामंत्री भी घोषित भाजयुमो की इस नियुक्ति सूची को आगामी संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए पदाधिकारियों को संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और युवाओं को पार्टी से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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चलती ट्रेन में चढ़ते समय महिला फिसली, प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच गिरी, समय रहते बची जान

सागर। मध्य प्रदेश के सागर रेलवे स्टेशन पर शनिवार को बड़ा हादसा टल गया। प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर हावड़ा-इंदौर एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान एक महिला का पैर फिसल गया और वह ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच जा गिरी। घटना के बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई। यात्रियों की सतर्कता और रेल पुलिस की त्वरित कार्रवाई से महिला की जान बच गई। जानकारी के अनुसार, ट्रेन संख्या 22912 हावड़ा-इंदौर एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर-2 से रवाना होने ही वाली थी। इसी दौरान एक महिला यात्री दौड़कर ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही थी। ट्रेन चलने लगी थी, तभी महिला का संतुलन बिगड़ गया और वह प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच गिर गई। घटना देखकर यात्रियों ने तुरंत शोर मचाया और ट्रेन में सवार एक यात्री ने चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोक दिया। सूचना मिलते ही जीआरपी और आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस और यात्रियों की मदद से महिला को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस दौरान करीब 15 मिनट तक ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी रही। राहत की बात यह रही कि ट्रेन ने गति नहीं पकड़ी थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। प्राथमिक जांच के बाद महिला को सुरक्षित उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश न करें, क्योंकि ऐसी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
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गुना में रिश्तेदारों ने पैन कार्ड का किया दुरुपयोग, ट्रैक्टर लोन में फर्जी गारंटर बनाकर लाखों का कर्ज चढ़ाया

गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले में धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति के रिश्तेदारों ने उसकी जानकारी के बिना पैन कार्ड का इस्तेमाल कर ट्रैक्टर लोन में फर्जी गारंटर बना दिया। इस जालसाजी के कारण पीड़ित का सिबिल (CIBIL) स्कोर खराब हो गया और उसे वाहन फाइनेंस तक नहीं मिल सका। सिटी कोतवाली थाना पुलिस ने मामले की जांच के बाद पीड़ित के सगे जीजा सहित दो आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। स्कूटी खरीदने पहुंचे तो हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा पुलिस के अनुसार, आसमानी माता मंदिर के पास रहने वाले जगमोहन प्रजापति अक्टूबर 2024 में स्कूटी खरीदने एक शोरूम पहुंचे थे। फाइनेंस प्रक्रिया के दौरान जब उनका सिबिल स्कोर जांचा गया तो पता चला कि उनके नाम पर पहले से ट्रैक्टर और अन्य लोन चल रहे हैं, जिनकी कई किश्तें बकाया थीं। खराब सिबिल स्कोर के कारण उन्हें फाइनेंस नहीं मिला और अंततः पत्नी के नाम पर स्कूटी खरीदनी पड़ी। 2017 और 2021 में किया गया फर्जीवाड़ा बाद में इंडसइंड बैंक से जानकारी लेने पर सामने आया कि वर्ष 2017 में आरोपी देवेंद्र प्रजापति ने ट्रैक्टर खरीदते समय गारंटर के रूप में पीड़ित के पैन कार्ड का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया। इसके बाद 2021 में उसी ट्रैक्टर पर करीब 3.38 लाख रुपये का री-फाइनेंस लोन भी लिया गया, जिसमें भी पीड़ित के दस्तावेजों का उपयोग किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि लोन की किश्तें समय पर जमा नहीं होने से पूरा वित्तीय बोझ पीड़ित के रिकॉर्ड पर दर्ज हो गया। पुलिस ने दर्ज किया मामला पीड़ित की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्देश पर मामले की विस्तृत जांच की गई। बैंक से प्राप्त दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी देवेंद्र प्रजापति और पीड़ित के जीजा जगमोहन प्रजापति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 319(2) के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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CSMCL ओवरटाइम भुगतान मामले में पूर्व MD अरुणपति त्रिपाठी गिरफ्तार, 172 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता की जांच तेज

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में कथित 172 करोड़ रुपये के ओवरटाइम भुगतान घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रबंध संचालक (MD) अरुणपति त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि फर्जी भुगतान के बदले कमीशन लेने में उनकी भूमिका सामने आई है। अरुणपति त्रिपाठी को 17 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। शनिवार को उन्हें रायपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। मैनपावर एजेंसियों को करोड़ों का अतिरिक्त भुगतान EOW-ACB की जांच के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच कई मैनपावर एजेंसियों को कर्मचारियों के नाम पर नियमों से परे अतिरिक्त भुगतान किया गया। जांच के दायरे में सुमित फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्कफोर्स, ए-टू-जेड इंफ्रासर्विसेज, अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशंस जैसी कंपनियां शामिल हैं। जांच में सामने आया कि: का अतिरिक्त भुगतान किया गया। एजेंसियों के अनुसार कुल भुगतान लगभग 182.98 करोड़ रुपये तक पहुंचता है, जबकि प्राथमिकी में करीब 172 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता की जांच की जा रही है। ED की कार्रवाई के बाद दर्ज हुई थी FIR प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर कार्यालय ने 29 नवंबर 2023 को तीन लोगों से 28.80 लाख रुपये नकद जब्त किए थे। इसके बाद राज्य सरकार को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर EOW ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच एजेंसियों का आरोप है कि फर्जी बिल, बढ़े हुए भुगतान और कथित कमीशन नेटवर्क के जरिए सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया और इसका बड़ा हिस्सा नकद कमीशन के रूप में वापस लिया गया। 12 आरोपियों के खिलाफ पहले ही चार्जशीट इस मामले में पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया जा चुका है। अब अरुणपति त्रिपाठी से पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों को घोटाले से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय लेनदेन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी श्रृंखला की पड़ताल कर रही हैं। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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ग्वालियर में निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, 42 फीट ऊंचे हाइड्रोलिक रथ पर नगर भ्रमण

ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में शनिवार को इस्कॉन (ISKCON) की ओर से भगवान श्रीजगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। 42 फीट ऊंचे विशेष हाइड्रोलिक रथ पर सवार भगवान के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़े। “जय जगन्नाथ” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूब गया। रथयात्रा का शुभारंभ जीवाजी क्लब से हुआ। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भगवान की पूजा-अर्चना की और पारंपरिक छेरा पहंरा (स्वर्ण झाड़ू) सेवा निभाकर यात्रा को रवाना किया। 200 किलो प्राकृतिक फूलों से सजा रथ इस वर्ष की रथयात्रा कई मायनों में विशेष रही। 42 फीट ऊंचे हाइड्रोलिक रथ को लगभग 200 किलोग्राम प्राकृतिक फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने रस्सियों से रथ खींचते हुए भगवान जगन्नाथ की आराधना की। यात्रा में रूस से आए कीर्तन मंडल, वृंदावन के श्रद्धालु और दिल्ली का प्रसिद्ध माधवास रॉक बैंड हरे नाम संकीर्तन प्रस्तुत कर रहे हैं। इसके अलावा भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु और पंचतत्त्व की भव्य पालकी भी आकर्षण का केंद्र रही। इन मार्गों से होकर निकली रथयात्रा रथयात्रा जीवाजी क्लब से शुरू होकर अचलेश्वर, इंदरगंज, दाल बाजार, नया बाजार, लोहिया बाजार, महाराज बाड़ा, नई सड़क और लक्ष्मीगंज होते हुए गोयल वाटिका पहुंचेगी। यहां महाआरती, विशाल भंडारे और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ रथयात्रा का समापन होगा। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी और भक्ति भाव से सराबोर इस आयोजन ने ग्वालियर में आध्यात्मिक उत्सव का माहौल बना दिया। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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