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Mexico में ड्रग माफिया सरगना की मौत के बाद भड़की हिंसा: 25 सैनिकों समेत 32 की मौत, 20 बैंक फूंके

Mexico में ड्रग माफिया सरगना की मौत के बाद भड़की हिंसा: 25 सैनिकों समेत 32 की मौत, 20 बैंक फूंके

Mexico में एक बड़े ड्रग माफिया सरगना की मौत के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। देश के करीब 20 राज्यों में हिंसा भड़क उठी है। अब तक 32 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें 25 सैनिक भी शामिल हैं। कई जगह आगजनी, फायरिंग और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। गर्लफ्रेंड से मिली लोकेशन, फिर हुआ एनकाउंटर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों को ड्रग माफिया की लोकेशन उसकी गर्लफ्रेंड के जरिए मिली। इसके बाद ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें माफिया सरगना मारा गया। लेकिन उसकी मौत के बाद उसके गैंग के लोगों ने बदला लेने के लिए कई शहरों में हिंसा शुरू कर दी। 20 राज्यों में आगजनी और हमला हिंसा की लहर इतनी तेज रही कि करीब 20 राज्यों में सरकारी और निजी संपत्तियों को निशाना बनाया गया। 20 से ज्यादा बैंकों को आग के हवाले कर दिया गया। कई जगहों पर सड़कों को ब्लॉक किया गया और वाहनों में आग लगा दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने ऐसा डर और तनाव पहले कभी नहीं देखा। आम नागरिक अपने घरों में छिपने को मजबूर हो गए। स्कूल और बाजार बंद कर दिए गए हैं। सेना और पुलिस अलर्ट पर मेक्सिको सरकार ने हालात को काबू में करने के लिए सेना और पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की है। कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। आम लोगों पर सबसे ज्यादा असर इस हिंसा का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। रोज कमाने-खाने वाले लोगों का काम ठप हो गया है। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। मेक्सिको में ड्रग माफिया की जड़ें लंबे समय से मजबूत रही हैं। ऐसे में यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अपराध के खिलाफ लड़ाई कितनी चुनौतीपूर्ण है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tariff

Emergency Tariff Controversy कोर्ट का फैसला, लेकिन Trump का सख्त संदेश बरकरार

अमेरिका की राजनीति और वैश्विक व्यापार जगत में इस समय सबसे बड़ी चर्चा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इमरजेंसी टैरिफ (Emergency Tariff) को लेकर है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद इन टैरिफ की वसूली पर रोक लगा दी गई है। 24 फरवरी से अमेरिकी कस्टम विभाग ने संबंधित शुल्क लेना बंद कर दिया है। यह फैसला उन देशों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से अतिरिक्त आयात शुल्क का सामना कर रहे थे। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती — ट्रम्प की ओर से आई नई चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार माहौल को फिर से गर्म कर दिया है। क्या था पूरा मामला? ट्रम्प प्रशासन ने अपने कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे। तर्क यह दिया गया था कि ये कदम अमेरिकी उद्योग, रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी हैं। हालांकि, अदालत ने माना कि आपातकालीन शक्तियों का उपयोग इतने व्यापक व्यापारिक शुल्क लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर टैरिफ को अवैध ठहराते हुए उनकी वसूली रोकने का आदेश दिया गया। किन देशों को राहत? भारत, चीन समेत कई एशियाई और यूरोपीय देशों को इस फैसले से तत्काल राहत मिली है। इन देशों के निर्यातकों पर अतिरिक्त लागत का बोझ कम होगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों में स्थिरता आने की उम्मीद है। हालांकि, पहले से वसूले गए अरबों डॉलर के टैरिफ वापस होंगे या नहीं — इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है। यह आने वाले समय में कानूनी और कूटनीतिक बातचीत का अहम मुद्दा बन सकता है। ट्रम्प की सख्त चेतावनी फैसले के तुरंत बाद ट्रम्प ने कहा कि अगर कोई देश व्यापार समझौतों में “गेम खेलने” की कोशिश करता है या शर्तों से पीछे हटता है, तो अमेरिका और भी ऊंचे टैरिफ लगाने से नहीं हिचकेगा। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अन्य कानूनी रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बयान ने साफ कर दिया है कि व्यापारिक तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। Global Market पर असर इस घटनाक्रम का असर शेयर बाजारों में भी देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदार आपसी संवाद से रास्ता निकालते हैं, तो स्थिति सामान्य हो सकती है। लेकिन अगर बयानबाजी और सख्ती बढ़ी, तो नया Trade War शुरू होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। आगे क्या? फिलहाल टैरिफ वसूली पर रोक से निर्यातकों और उद्योग जगत को राहत जरूर मिली है। लेकिन ट्रम्प के ताजा बयान से यह साफ है कि व्यापार नीति आने वाले महीनों में अमेरिकी राजनीति का बड़ा मुद्दा बनी रहेगी। एक तरफ अदालत का फैसला संतुलन की बात करता है, तो दूसरी ओर सख्त चेतावनी यह संकेत देती है कि वैश्विक व्यापार की राह अभी भी आसान नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

US–Iran Tension तेज भारत ने अपने नागरिकों से कहा Safe Return की करें तैयारी

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए अहम एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिक जल्द से जल्द Iran छोड़ दें। यह सलाह ऐसे समय में आई है जब Tehran पर संभावित अमेरिकी हमले की आशंका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। क्या है पूरा मामला? Iran और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से तनाव बढ़ता जा रहा है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी और ईरान की ओर से कड़े बयान सामने आने के बाद स्थिति और संवेदनशील हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो Tehran समेत कुछ अहम ठिकाने निशाने पर आ सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में विदेश मंत्रालय भारत ने हालात की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया है। भारतीय दूतावास की अपील Tehran स्थित भारतीय दूतावास तेहरान ने एडवाइजरी जारी कर छात्रों, कामकाजी पेशेवरों, कारोबारियों और पर्यटकों समेत सभी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे उपलब्ध कमर्शियल फ्लाइट्स या अन्य सुरक्षित साधनों से तुरंत देश छोड़ने की तैयारी करें। दूतावास ने यह भी कहा है कि नागरिक अपने पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज तैयार रखें, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में जारी हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। पहले भी दी गई थी चेतावनी यह पहली बार नहीं है जब भारत ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने को कहा है। इससे पहले भी बढ़ते Iran–US tension के बीच गैर-जरूरी यात्रा से बचने और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई थी। लेकिन इस बार सीधे देश छोड़ने की सलाह स्थिति की गंभीरता को दिखाती है। आम भारतीयों की चिंता ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र और पेशेवर काम कर रहे हैं। कई परिवारों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है। सोशल मीडिया पर भी परिजनों की बेचैनी साफ देखी जा सकती है। सरकार की यह एडवाइजरी एहतियात के तौर पर जारी की गई है ताकि किसी भी संभावित संकट में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वैश्विक असर की आशंका अगर Tehran पर हमला होता है या सैन्य टकराव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ ईरान या अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। तेल आपूर्ति, हवाई सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में भारत का यह कदम समय रहते उठाया गया सावधानीपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM MODI से मिले ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत

PM MODI से मिले ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत

PM MODI ने ब्राजील के राष्ट्रपति Luiz Inacio Lula da Silva का राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत किया। पारंपरिक सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ यह मुलाकात खास रही। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक जारी है, जिसमें व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस सेक्टर पर खास चर्चा हो रही है। राष्ट्रपति लूला पहले ही संकेत दे चुके हैं कि ब्राजील की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी भारत में अपना प्लांट लगाने की योजना बना रही है। अगर यह योजना साकार होती है तो भारत में रोजगार और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बड़ी गति मिल सकती है। भारत और ब्राजील के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है। दोनों देश BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ काम करते रहे हैं। इस मुलाकात को वैश्विक स्तर पर भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सहयोग रक्षा उत्पादन, विमानन और औद्योगिक निवेश को नई दिशा दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की ठोस पहल है। आम लोगों के लिए भी यह खबर उम्मीद लेकर आई है—नई फैक्ट्रियां, नए निवेश और नए रोजगार के अवसर। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trade

Global Trade 18% से 10% पर आया भारत का टैरिफ, ट्रम्प की नई नीति लागू

अमेरिका की व्यापार नीति में एक बड़ा और अचानक बदलाव देखने को मिला है। Donald Trump ने सभी देशों से अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर 10% का नया यूनिवर्सल टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया जब इससे कुछ घंटे पहले ही Supreme Court of the United States ने एक पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत भारत पर 18% का विशेष टैरिफ लागू था। इस घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। क्या है पूरा मामला? पहले भारत से अमेरिका जाने वाले कुछ उत्पादों पर 18% तक का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। इससे भारतीय निर्यातकों—खासतौर पर स्टील, इंजीनियरिंग गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर—को सीधा असर झेलना पड़ रहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह 18% टैरिफ समाप्त हो गया। लेकिन उसी के तुरंत बाद 10% का नया सार्वभौमिक टैरिफ लागू करने की घोषणा ने तस्वीर बदल दी। भारत के लिए राहत या नई चुनौती? सीधी बात करें तो 18% से घटकर 10% होना भारत के लिए आंशिक राहत है।मतलब: लेकिन 10% टैरिफ पूरी तरह राहत नहीं है। इससे लागत बढ़ेगी और मुनाफे पर असर पड़ेगा। Global Trade पर क्या असर पड़ेगा? यह फैसला सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। सभी देशों पर समान 10% शुल्क लगाने से: विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। आम लोगों पर क्या असर? यह सवाल भी अहम है।अगर आयात महंगे होंगे तो अमेरिका में उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। वहीं भारत में निर्यात से जुड़े उद्योगों और कामगारों के लिए यह राहत और चिंता—दोनों का मिश्रण है। आगे क्या? अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत सरकार इस नए 10% टैरिफ को लेकर क्या रुख अपनाती है। क्या द्विपक्षीय व्यापार वार्ता तेज होगी? क्या कुछ सेक्टर को छूट मिल सकती है? फिलहाल इतना साफ है कि अमेरिका की यह नई टैरिफ नीति वैश्विक व्यापार संतुलन को प्रभावित करेगी, और भारत को भी अपनी रणनीति नए सिरे से तय करनी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

India-Pak Tension पर Trump का बड़ा दावा 200% टैरिफ की धमकी और 11 Fighter Jets की कहानी

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने दोनों देशों को 200% टैरिफ (Import Duty) लगाने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद हालात काबू में आए और संभावित युद्ध टल गया। यह बयान उन्होंने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां उन्होंने खुद को “शांति स्थापित करने वाला नेता” बताया। क्या है ट्रंप का दावा? Trump के अनुसार, मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हालात बेहद गंभीर थे। सीमा पर हवाई टकराव हो रहे थे और कई फाइटर जेट गिराए गए थे। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष में कुल 11 महंगे लड़ाकू विमान गिराए गए। उनका कहना है कि उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से सीधे बात की। ट्रंप ने कथित तौर पर कहा कि अगर लड़ाई जारी रही तो अमेरिका दोनों देशों पर 200% टैरिफ लगा देगा और व्यापारिक रिश्ते प्रभावित होंगे। Trump ने अपने अंदाज में कहा, “पैसे से बड़ी कोई ताकत नहीं होती।” उनका दावा है कि इसी आर्थिक दबाव के बाद संघर्ष रुक गया और लाखों लोगों की जान बची। भारत का क्या कहना है? भारत सरकार ने पहले भी ऐसे दावों को खारिज किया है। आधिकारिक बयान में कहा गया था कि संघर्षविराम (Ceasefire) दोनों देशों के बीच सीधे संवाद से हुआ था, न कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से। नई दिल्ली का साफ रुख है कि भारत और पाकिस्तान के मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इन्हें आपसी बातचीत से ही सुलझाया जाता है। जेट गिरने का दावा कितना सही? ट्रंप ने अलग-अलग मंचों पर जेट गिराए जाने की संख्या बदलकर बताई है—कभी 5, कभी 7 और अब 11। अब तक किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी या आधिकारिक सैन्य रिपोर्ट में 11 जेट गिरने की पुष्टि नहीं हुई है। यही कारण है कि उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। पृष्ठभूमि: मई 2025 का तनाव मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा था। रिपोर्टों के अनुसार, आतंकी घटना के बाद भारत ने सीमित सैन्य कार्रवाई की थी। इसके जवाब में सीमा पर गोलाबारी और हवाई गतिविधियां बढ़ीं। कुछ दिनों बाद दोनों देशों ने संघर्षविराम की घोषणा की और हालात धीरे-धीरे सामान्य हुए। राजनीतिक संदेश या कूटनीतिक सच? विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति और उनकी विदेश नीति की छवि से भी जुड़ा हो सकता है। वे अक्सर खुद को मजबूत आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति वाला नेता बताते रहे हैं। हालांकि, भारत की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट है—किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि सीधे संवाद से तनाव कम हुआ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Karachi

Karachi Gas Leak Tragedy सुबह 4 बजे हुए धमाके ने ली 16 लोगों की जान

पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। सोल्जर बाजार इलाके में तड़के हुए भीषण गैस धमाके (Gas Explosion) में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। धमाका इतना शक्तिशाली था कि एक रिहायशी इमारत का बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा और कई परिवार कुछ ही सेकंड में तबाही का शिकार हो गए। सुबह की शांति टूटी, चीखों से गूंजा इलाका यह हादसा सोल्जर बाजार की गुल राणा कॉलोनी में सुबह करीब 4:15 बजे हुआ। उस वक्त ज्यादातर लोग घरों में सो रहे थे, जबकि कुछ परिवार रमज़ान के चलते सहरी की तैयारी में जुटे थे। अचानक हुए जोरदार धमाके ने पूरे इलाके को हिला दिया। लोगों ने बताया कि पहले तेज धमाके की आवाज आई, फिर इमारत गिरने की गड़गड़ाहट और उसके बाद मदद के लिए पुकारती आवाजें। स्थानीय निवासियों ने बिना समय गंवाए मलबा हटाना शुरू कर दिया। कई लोग अपने हाथों से पत्थर और ईंटें हटाते दिखे, क्योंकि हर किसी को उम्मीद थी कि शायद कोई अभी भी जिंदा हो। क्या था Blast का कारण? प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि धमाका गैस रिसाव (Gas Leakage) या सिलेंडर फटने की वजह से हुआ। पुलिस अधिकारियों के अनुसार फिलहाल किसी आतंकी एंगल के संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि अंतिम पुष्टि फोरेंसिक जांच के बाद ही की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने इलाकों में जर्जर गैस पाइपलाइन और अनियमित कनेक्शन अक्सर बड़े हादसों की वजह बनते हैं। यह घटना भी उसी लापरवाही की ओर इशारा कर रही है। Rescue Operation कई घंटों तक जारी धमाके के तुरंत बाद Rescue 1122, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया गया। बचावकर्मी घंटों तक मलबे में दबे लोगों को निकालते रहे। अस्पतालों में भर्ती घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार कुछ की हालत गंभीर है। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, और कुछ अब भी अपनों की तलाश में अस्पतालों और घटनास्थल के बीच भटक रहे हैं। प्रशासन की प्रतिक्रिया स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अगर किसी प्रकार की लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tarique Rahman

Tarique Rahman Swearing-in में PM Modi को Invite करने की तैयारी BNP का बड़ा संकेत

बांग्लादेश (Bangladesh) की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हालिया संसदीय चुनावों में Bangladesh Nationalist Party (BNP) को स्पष्ट बहुमत मिला है और पार्टी के वरिष्ठ नेता Tarique Rahman देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। इसी बीच एक अहम कूटनीतिक संकेत सामने आया है—BNP की ओर से भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को शपथ ग्रहण समारोह (Swearing-in Ceremony) में आमंत्रित किए जाने की तैयारी चल रही है। क्या है पूरा मामला? सूत्रों के मुताबिक BNP नई सरकार की शुरुआत सकारात्मक संदेश के साथ करना चाहती है। पार्टी के कुछ नेताओं ने संकेत दिए हैं कि क्षेत्रीय देशों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित करने की योजना है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। हालांकि अभी तक औपचारिक निमंत्रण (Official Invitation) जारी नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भारत-बांग्लादेश रिश्तों के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है। चुनाव के बाद बढ़ा संवाद चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को फोन पर बधाई दी थी। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच मजबूत और सहयोगात्मक रिश्तों को आगे बढ़ाने की बात कही गई। BNP ने भी इस शुभकामना के लिए आभार जताया और संकेत दिया कि नई सरकार क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता देगी। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद सभी की नजर इस बात पर है कि नई सरकार भारत के साथ अपने संबंधों को किस दिशा में ले जाती है। India-Bangladesh Relations पर क्या असर पड़ेगा? भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार (Trade), सीमा सुरक्षा (Border Security), ऊर्जा सहयोग (Energy Cooperation) और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स जैसे कई रणनीतिक मुद्दे जुड़े हैं। ऐसे में अगर प्रधानमंत्री मोदी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होते हैं, तो यह दोनों देशों के बीच भरोसे और निरंतरता का मजबूत संदेश होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निमंत्रण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक संकेत हो सकता है कि ढाका (Dhaka) नई सरकार के तहत भारत के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध बनाए रखना चाहता है। लोगों की उम्मीदें भी जुड़ी बांग्लादेश और भारत के बीच केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते भी गहरे हैं। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों से लेकर व्यापार जगत तक—हर किसी की नजर इस नई शुरुआत पर टिकी है। नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत की भागीदारी अगर होती है, तो इसे दक्षिण एशिया (South Asia) की राजनीति में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Khalistan

Khalistan Terror Case Update US Federal Court का बड़ा फैसला, 24 साल की सजा

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहे खालिस्तानी टेरर प्लॉट केस (Khalistan Terror Case) में बड़ा फैसला सामने आया है। अमेरिकी अदालत ने भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को 24 साल की जेल की सजा सुनाई है। उन पर खालिस्तानी अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप था, जिसे उन्होंने अदालत में स्वीकार कर लिया। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक चर्चाओं का भी बड़ा विषय बन गया है। क्या था पूरा Murder Conspiracy मामला? अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कथित साजिश न्यूयॉर्क में रची गई थी, जहां पन्नू रह रहे थे। अभियोजन पक्ष का कहना है कि निखिल गुप्ता ने एक व्यक्ति को सुपारी देकर पन्नू की हत्या करवाने की योजना बनाई थी। हालांकि, जिसे गुप्ता ने ‘हिटमैन’ समझा, वह दरअसल अमेरिकी एजेंसी का एक गुप्त सहयोगी निकला। यहीं से पूरी साजिश का खुलासा हुआ और जांच एजेंसियों ने समय रहते कार्रवाई कर दी। अदालत में सुनवाई के दौरान गुप्ता ने हत्या की साजिश (Murder-for-Hire Plot) से जुड़े आरोपों को स्वीकार किया। अदालत ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध मानते हुए 24 वर्ष की सजा सुनाई। कोर्ट का सख्त रुख संघीय अदालत ने साफ कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका की धरती पर किसी व्यक्ति की हत्या की साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि इस तरह की योजना न केवल एक व्यक्ति बल्कि पूरे सिस्टम की सुरक्षा के लिए खतरा है। सजा संघीय कानूनों के तहत तय की गई और इसे एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। पन्नू क्यों हैं विवादों में? गुरपतवंत सिंह पन्नू लंबे समय से खालिस्तान की मांग को लेकर सक्रिय रहे हैं। भारत सरकार ने उन्हें आतंकवाद से जुड़े मामलों में नामित किया है। वहीं, अमेरिका में वे राजनीतिक गतिविधियों का दावा करते रहे हैं। यही वजह है कि यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा हुआ है। भारत-अमेरिका संबंधों पर असर इस केस ने दोनों देशों के रिश्तों में नई चर्चा को जन्म दिया है। राजनयिक स्तर पर बातचीत और जांच की प्रक्रिया जारी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मामले के दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं, खासकर सुरक्षा सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कानून के संदर्भ में। एक मानवीय पहलू भी कानूनी और राजनीतिक बहसों के बीच यह मामला यह भी याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय साजिशों के पीछे कई स्तरों पर जटिल नेटवर्क काम करते हैं। अदालत में गुनाह कबूल करने के बाद यह साफ है कि कानून की पकड़ से बच पाना आसान नहीं। यह फैसला न केवल न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षा एजेंसियां किस तरह समन्वय के साथ काम करती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BNP

PM Modi की बधाई के बाद BNP का पहला Reaction India के साथ क्या होगी नई Strategy

बांग्लादेश में हुए ताज़ा आम चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज करने वाली Bangladesh Nationalist Party (BNP) अब नई सरकार के गठन की तैयारी में जुट गई है। चुनाव परिणाम सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें ढाका पर टिक गईं, खासकर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर उत्सुकता रही। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने चुनावी जीत पर बधाई देते हुए दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने की इच्छा जताई। उनके संदेश के बाद BNP की ओर से भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पहला आधिकारिक बयान सामने आया है, जिसने आने वाले समय की कूटनीतिक दिशा का संकेत दे दिया है। PM Modi की बधाई, क्षेत्रीय सहयोग पर जोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में बांग्लादेश की जनता को शांतिपूर्ण और सफल चुनाव के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बेहद खास हैं, और दोनों देशों को मिलकर क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए काम करना चाहिए। यह संदेश सिर्फ औपचारिक बधाई नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में स्थिरता और साझेदारी की एक मजबूत झलक भी माना जा रहा है। BNP का जवाब: “समानता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि” बधाई संदेश के जवाब में BNP ने भारत का आभार जताया और साफ किया कि उसकी सरकार पड़ोसी देशों के साथ “आपसी सम्मान, समानता और राष्ट्रीय हित” के आधार पर रिश्ते आगे बढ़ाएगी। पार्टी के बयान में कहा गया कि नई सरकार संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाएगी। भारत के साथ व्यापार, सीमा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत जारी रहेगी, लेकिन राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। इस बयान से यह साफ है कि BNP टकराव की बजाय संवाद और संतुलन की नीति अपनाना चाहती है। India-Bangladesh Relations का भविष्य भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, ऊर्जा, ट्रांजिट और सुरक्षा सहयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन और कनेक्टिविटी परियोजनाएं भी क्षेत्रीय विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नई सरकार के आने के बाद कुछ नीतिगत प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, लेकिन रणनीतिक साझेदारी बरकरार रहने की संभावना अधिक है। आम लोगों की उम्मीदें भी जुड़ी सिर्फ राजनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के आम नागरिक भी स्थिर और मजबूत रिश्तों की उम्मीद रखते हैं। सीमा से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर व्यापार और आवाजाही के अवसर सीधे तौर पर उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं। बंपर जीत के बाद BNP का पहला बयान यह संकेत देता है कि ढाका और नई दिल्ली के बीच संवाद की डोर बनी रहेगी। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि नई सरकार अपने वादों को किस तरह नीतियों में बदलती है और भारत के साथ संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ग्वालियर: साइबर ठगी के पैसों से खरीदा 50 ग्राम का सोने का सिक्का, ज्वेलर्स का बैंक खाता हुआ फ्रीज

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम को वैध बनाने का एक नया तरीका सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक युवक ने सराफा बाजार स्थित ‘गहना जेम्स एंड ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड’ से 50 ग्राम का सोने का सिक्का खरीदा और उसका भुगतान कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम के जरिए ऑनलाइन किया। बाद में इस लेनदेन के चलते ज्वेलर्स का बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया। ऑनलाइन ट्रांसफर से किया लाखों रुपये का भुगतान पुलिस के मुताबिक, झांसी रोड स्थित माधव नगर निवासी सराफा कारोबारी अजय मंगल का लश्कर सराफा बाजार में ज्वेलरी शोरूम है। बताया गया कि 4 अप्रैल 2026 को अभिषेक परिहार नाम का युवक शोरूम पहुंचा और 50 ग्राम का सोने का सिक्का खरीदने का सौदा किया। उसने अग्रिम भुगतान के रूप में 1 लाख रुपये NEFT और 10 हजार रुपये IMPS के माध्यम से जमा कराए। अगले दिन, 5 अप्रैल, वह दोबारा शोरूम पहुंचा और 5 लाख रुपये, 1.41 लाख रुपये ऑनलाइन बैंक ट्रांसफर तथा 52,900 रुपये नकद देकर पूरा भुगतान किया। इसके बाद कारोबारी ने जीएसटी का बिल जारी कर सोने का सिक्का उसे सौंप दिया। 20 दिन बाद बैंक खाता हुआ फ्रीज करीब 20 दिन बाद, 24 अप्रैल को ज्वेलर्स का बैंक खाता अचानक होल्ड कर दिया गया। बैंक ने ई-मेल के माध्यम से बताया कि खाते में आई 5.10 लाख रुपये की राशि को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के निर्देश पर फ्रीज किया गया है। इसके बाद 4 जून को बेंगलुरु साइबर क्राइम पुलिस का नोटिस मिला। नोटिस में बताया गया कि सोने के सिक्के के भुगतान में इस्तेमाल किए गए 5.10 लाख रुपये, बेंगलुरु के एक कारोबारी से हुई 14 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का हिस्सा थे। पुलिस के अनुसार, ठगों ने कथित रूप से ठगी की रकम सीधे ज्वेलर्स के खाते में ट्रांसफर कर सोने का सिक्का खरीद लिया। पुलिस ने दर्ज किया मामला मामले की जानकारी मिलने के बाद अजय मंगल ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान खरीदारी के समय जमा कराए गए आधार कार्ड से पता चला कि आरोपी अभिषेक परिहार बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के घोसीपुरा का निवासी है। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले सीएसपी लश्कर किरण अहिरवार ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपी की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि शोरूम का सीसीटीवी बैकअप केवल 15 से 20 दिन तक सुरक्षित रहता है, इसलिए घटना के फुटेज उपलब्ध नहीं हो सके। हालांकि आधार कार्ड के विवरण और साइबर ट्रेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

भरतपुर: REET में पास कराने के नाम पर लिए 5 लाख, पैसे वापस मांगने पर ठेकेदार की हत्या; 14 महीने बाद हुआ खुलासा

भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले में करीब 14 महीने पहले लापता हुए ठेकेदार प्रहलाद बैरवा हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, REET-2021 परीक्षा में प्रहलाद की पत्नी को पास कराने का झांसा देकर 5 लाख रुपये लेने के बाद जब आरोपी रकम लौटाने के दबाव में आए तो उन्होंने प्रहलाद की हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद दोनों आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया। उनकी निशानदेही पर धौलपुर के जंगल से शव के अवशेष भी बरामद किए गए हैं। कोर्ट जाते समय हुए थे लापता भरतपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश मीणा ने बताया कि वैर निवासी ठेकेदार प्रहलाद बैरवा 26 मार्च 2025 को कोर्ट जाने के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। अगले दिन उनकी पत्नी पूनम बैरवा ने वैर थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया था। मामले की जांच के लिए कई पुलिस टीमें गठित की गईं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इस दौरान परिजनों ने कई बार प्रदर्शन कर मामले के खुलासे की मांग भी की थी। REET में पास कराने का झांसा बना हत्या की वजह पुलिस जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में पूनम बैरवा REET परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान आरोपी धर्मेंद्र जाखड़ ने परीक्षा में पास कराने का दावा करते हुए प्रहलाद से 5 लाख रुपये ले लिए। जब परीक्षा का परिणाम आया और पूनम सफल नहीं हुईं तो प्रहलाद ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार, लगातार पैसों की मांग से परेशान होकर धर्मेंद्र ने अपने साथी विनोद मीणा के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। अपहरण के बाद जंगल में की हत्या पुलिस के अनुसार, 26 मार्च 2025 को आरोपियों ने प्रहलाद का कथित रूप से अपहरण कर उन्हें धौलपुर के जंगल में ले गए, जहां गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने के उद्देश्य से शव को जंगल में दफना दिया गया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल से शव के अवशेष बरामद किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद खुला राज जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की, लेकिन वे लगातार गुमराह करते रहे। इसके बाद पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया। पुलिस का कहना है कि टेस्ट के बाद आरोपियों ने हत्या की बात स्वीकार की, जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अन्य लेन-देन की भी जांच जारी पुलिस ने बताया कि मामले में अन्य आर्थिक लेन-देन के पहलुओं की भी जांच की जा रही है। वहीं, करीब 25 दिन पहले एसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान प्रहलाद की पत्नी पूनम बैरवा ने आरोप लगाया था कि उनके पति ने धर्मेंद्र जाखड़ को 4.50 लाख रुपये और राजेश कुमार गर्ग को 15 लाख रुपये उधार दिए थे। उन्होंने दावा किया कि रकम वापस मांगने को लेकर पहले से विवाद चल रहा था और इस संबंध में धोखाधड़ी का मामला भी अदालत में विचाराधीन है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान, अपराध और देश की ताज़ा एवं विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत पदक से चूका, स्विमिंग और बॉक्सिंग में बढ़ीं उम्मीदें

ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स के दूसरे दिन भारत को पैरा पावरलिफ्टिंग के पहले मेडल इवेंट में निराशा हाथ लगी। पुरुष लाइटवेट वर्ग में अशोक कुमार मलिक पदक से मामूली अंतर से चूकते हुए चौथे स्थान पर रहे, जबकि परमजीत कुमार छठे स्थान पर रहे। हालांकि स्विमिंग, जिम्नास्टिक्स और बॉक्सिंग में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने पदकों की उम्मीदें बरकरार रखी हैं। पैरा पावरलिफ्टिंग में अशोक चौथे स्थान पर पुरुष लाइटवेट फाइनल में नौ बार के राष्ट्रीय चैंपियन अशोक कुमार मलिक ने पहली कोशिश में 195 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। दूसरी कोशिश में उन्होंने 200 किलोग्राम की अपनी व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (Personal Best) लिफ्ट पूरी कर 143.8 अंक हासिल किए। तीसरे प्रयास में 205 किलोग्राम वजन उठाने में असफल रहने के कारण वह चौथे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए। वहीं परमजीत कुमार ने पहले प्रयास में 176 किलोग्राम वजन उठाकर 135.6 अंक अर्जित किए। इसके बाद 179 किलोग्राम वजन उठाने के दोनों प्रयास असफल रहे और वह छठे स्थान पर रहे। अब महिला लाइटवेट वर्ग में जसप्रीत कौर और सुमन देवी, जबकि महिला हेवीवेट में कस्तूरी राजामणि तथा पुरुष हेवीवेट में झंडू कुमार और सुधीर भारत की ओर से पदक की चुनौती पेश करेंगे। स्विमिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने बनाई फाइनल और सेमीफाइनल में जगह भारत के लिए अच्छी खबर स्विमिंग से आई। इस स्पर्धा में कुल आठ प्रतिभागी होने के कारण दोनों भारतीय तैराक फाइनल में पहुंच गए हैं। वहीं स्टार तैराक श्रीहरि नटराज ने पुरुष 50 मीटर बैकस्ट्रोक हीट में 25.52 सेकेंड का समय निकालते हुए अपनी हीट में पांचवां और कुल मिलाकर 14वां स्थान हासिल किया। इसके साथ उन्होंने सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया। जिम्नास्टिक्स में भारत मजबूत स्थिति में आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स की पुरुष टीम ऑलराउंड स्पर्धा में दो उपकरणों के बाद भारत सब-डिवीजन-2 में सिंगापुर के बाद दूसरे स्थान पर चल रहा है। भारतीय टीम में तपन मोहंती, स्वाथिश केपी, तपेश्वरनाथ दास और योगेश्वर सिंह शामिल हैं। बॉक्सिंग में आज से भारत का अभियान बॉक्सिंग में भारत की ओर से जदुमणि सिंह पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग के राउंड ऑफ-32 मुकाबले में स्कॉटलैंड के आरोन कुलेन का सामना करेंगे। वहीं ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन को महिला 75 किलोग्राम वर्ग में बाय मिला है, जिससे वह सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार दोनों सेमीफाइनल में हारने वाले खिलाड़ियों को भी कांस्य पदक दिया जाता है। ऐसे में लवलीना का कम से कम ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित हो गया है। जूडो में भारत को झटका भारत की जूडो खिलाड़ी तूलिका मान को पिछले 12 महीनों में तीन बार वेयरअबाउट्स नियम के उल्लंघन के कारण NADA ने अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इसके चलते उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया है। इससे पहले पुरुष 73 किलोग्राम वर्ग के अरुण कुमार भी प्रतियोगिता से बाहर हो चुके हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स, भारतीय खिलाड़ियों और खेल जगत की हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com

Gold Price Today: सोना ₹824 सस्ता, चांदी में मामूली तेजी; जानें आज के ताजा भाव

नई दिल्ली। घरेलू सर्राफा बाजार में 24 जुलाई को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी के दाम में हल्की बढ़त देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 824 रुपये घटकर 1,43,781 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। वहीं, एक किलोग्राम चांदी की कीमत 241 रुपये बढ़कर 2,22,721 रुपये हो गई। इससे पहले सोना 1,44,605 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,22,480 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। इस साल कीमतों में रहा बड़ा उतार-चढ़ाव वर्ष 2026 में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। चांदी की बात करें तो— आगे क्या रह सकता है रुख? कमोडिटी विशेषज्ञ अजय केडिया के अनुसार, सोना और चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अवसर हो सकता है। हालांकि उन्होंने सलाह दी कि निवेशकों को एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध (SIP या किस्तों में) निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए, ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सके। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो साल के अंत तक सोना 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.80 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। सोना-चांदी, शेयर बाजार, निवेश और बिजनेस से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com

NEET पेपर लीक मामला: शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्शन, NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त, दर्ज होंगे आपराधिक केस

नई दिल्ली। देशभर में NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। समाचार एजेंसी ANI के सूत्रों के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही इन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। यह कार्रवाई परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। एक दिन पहले हुए थे बड़े प्रशासनिक फेरबदल इससे पहले गुरुवार को केंद्र सरकार ने 17 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और पदोन्नति के आदेश जारी किए थे। सबसे बड़ा बदलाव शिक्षा मंत्रालय में हुआ, जहां 1994 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया। उन्होंने विनीत जोशी का स्थान लिया है, जिन्हें पंचायती राज मंत्रालय का सचिव बनाया गया है। इसके अलावा 1995 बैच के IAS अधिकारी टी.के. अनिल कुमार को पदोन्नत कर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। पेपर लीक पर सरकार लगातार दे रही सख्त संदेश पिछले कुछ दिनों में केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों पर लगातार कड़े रुख के संकेत दिए हैं। 24 जुलाई: सख्त कानून लाने का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक जैसे अपराधों को रोकने के लिए कड़े दंड का प्रावधान करने वाला विधेयक संसद में लाया जाएगा। 23 जुलाई: फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पेपर लीक मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए। 21 जुलाई: “पेपर लीक घोर पाप है” एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पेपर लीक युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय है। उन्होंने बताया कि मामले में अब तक 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही राज्यों से भी इस तरह की घटनाओं को रोकने में सहयोग की अपील की गई। युवाओं के भविष्य पर सरकार का फोकस सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से प्रशासनिक कार्रवाई, कानूनी सुधार और जांच प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। देश, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी हर बड़ी और विश्वसनीय खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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