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Bangladesh

Bangladesh Election 2026 Tarique Rahman की सत्ता में वापसी की तैयारी

Bangladesh में राजनीतिक बदलाव की हवा बह रही है। लगभग 20 साल बाद BNP (Bangladesh Nationalist Party) ने चुनावी मैदान में जीत दर्ज की है और अब देश की जनता के सामने नए नेतृत्व की उम्मीदें हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की संभावना बहुत मजबूत दिखाई दे रही है। इतिहास में एक बड़ा मोड़ यह जीत BNP के लिए सिर्फ सत्ता में वापसी नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है। अगर तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह देश को 35 साल बाद पहला पुरुष प्रधानमंत्री देगा। पिछले तीन दशकों में देश की राजनीति में दो प्रमुख महिला नेता—शेख हसीना और खालिदा जिया— का वर्चस्व रहा है। Tarique Rahman का राजनीतिक सफर तारिक रहमान BNP के संस्थापक पूर्व राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। पार्टी में लंबे समय से उन्हें वास्तविक नेतृत्वकर्ता माना जाता रहा है। विदेश में रहने के बावजूद उन्होंने पार्टी की रणनीति और चुनावी तैयारी में अहम भूमिका निभाई। जनता की उम्मीदें और चुनौतियाँ नई सरकार के गठन के बाद जनता की नजरें इन मुख्य मुद्दों पर रहेंगी: बांग्लादेश के इस नए राजनीतिक अध्याय में जनता की आशाएँ और नेतृत्व की जिम्मेदारी दोनों ही बहुत बड़ी हैं। तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना न सिर्फ BNP के लिए, बल्कि पूरे देश के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India

Dal vs Deal India-US Trade Agreement में Pulses पर क्यों अटक गई बात? समझिए Red Line Strategy

India-US Trade Agreement 2026 इस समय वैश्विक व्यापार की सबसे चर्चित खबरों में से एक है। जहां एक तरफ दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ “दाल” यानी pulses इस समझौते की सबसे संवेदनशील कड़ी बनकर सामने आई। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि व्हाइट हाउस को अपनी फैक्टशीट में बदलाव करना पड़ा? और क्यों कहा जा रहा है कि भारत की “Red Line” के आगे अमेरिका को झुकना पड़ा? क्या है India-US Trade Deal 2026? फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम (interim) व्यापार समझौते की घोषणा हुई। इस डील का मुख्य उद्देश्य: अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर लगने वाले ऊंचे टैरिफ कम करने पर सहमति जताई। बदले में भारत भी कुछ अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार खोलने को तैयार हुआ। कागज पर यह डील “win-win” दिख रही थी। लेकिन असली कहानी यहां से शुरू होती है। ‘Dal’ क्यों बनी सबसे बड़ा मुद्दा? भारत दुनिया के सबसे बड़े दाल उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल है। दाल सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि: शुरुआती अमेरिकी फैक्टशीट में “certain pulses” पर टैरिफ में राहत का उल्लेख किया गया था। इसका मतलब यह माना गया कि भारत अमेरिकी दालों के लिए अपना बाजार अधिक खोल सकता है। यहीं से विवाद शुरू हुआ। किसानों और कृषि संगठनों को आशंका थी कि अगर अमेरिकी दालें कम शुल्क पर भारत आएंगी, तो घरेलू बाजार में कीमतें गिर सकती हैं। इससे स्थानीय किसानों को सीधा नुकसान होगा। भारत की ‘Red Line’ क्या थी? ट्रेड नेगोशिएशन में “Red Line” का मतलब होता है — वह सीमा जिसे कोई देश पार नहीं करेगा। भारत ने साफ संकेत दिया कि: White House ने क्या बदला? विवाद बढ़ने और भारत की सख्त स्थिति के बाद व्हाइट हाउस ने अपनी फैक्टशीट में संशोधन किया। बदलाव इस प्रकार थे: “Certain Pulses” का उल्लेख हटाया गया नई फैक्टशीट में दालों का सीधा जिक्र नहीं किया गया। इससे यह संकेत गया कि pulses पर कोई बाध्यकारी प्रतिबद्धता नहीं है। “Committed” से “Intends” पहले कहा गया था कि भारत 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने के लिए committed है। बाद में इसे बदलकर “intends to buy” कर दिया गया।यह भाषा कानूनी और राजनीतिक रूप से कम कठोर मानी जाती है। डिजिटल टैक्स पर भी नरमी डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने जैसी सख्त भाषा को भी नरम किया गया। इन संशोधनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका ने भारत की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी स्थिति में बदलाव किया। किसानों की प्रतिक्रिया और घरेलू राजनीति डील की शुरुआती खबर के बाद कई किसान संगठनों ने चिंता जताई। कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए। विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए कि क्या यह समझौता कृषि क्षेत्र को प्रभावित करेगा। क्या यह Trump का U-Turn था? अमेरिकी राजनीतिक हलकों में भी इस बदलाव पर चर्चा हुई। कुछ विश्लेषकों ने इसे “softening of stance” यानी रुख नरम करना बताया। ट्रंप प्रशासन पर अमेरिकी कृषि लॉबी का दबाव था कि भारत अपना बाजार खोले। लेकिन भारत के स्पष्ट रुख के कारण दस्तावेज़ की भाषा बदलनी पड़ी। इसलिए कई रिपोर्टों में इसे “Trump took his finger off India’s sensitive pulse” जैसी अभिव्यक्ति दी गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Election 2026 चुनाव के साथ Referendum क्यों? India की बढ़ी चिंता

Bangladesh में 12 फरवरी 2026 को होने वाला आम चुनाव इस बार सिर्फ सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक मोड़ भी माना जा रहा है। खास बात यह है कि आम चुनाव के साथ-साथ एक राष्ट्रीय Referendum (जनमत संग्रह) भी कराया जा रहा है। यानी जनता को एक ही दिन दो बड़े फैसले लेने हैं — नई सरकार चुनना और संविधान में प्रस्तावित बदलावों पर अपनी मुहर लगाना। यह पूरा घटनाक्रम न सिर्फ बांग्लादेश के लिए अहम है, बल्कि पड़ोसी देश भारत भी इसे बेहद करीब से देख रहा है। क्या है ‘July Charter’ Referendum? इस बार के Referendum में मतदाताओं से “July Charter” नाम के एक सुधार पैकेज पर हां या ना में वोट देने को कहा जाएगा। यह चार्टर 2024 के राजनीतिक उथल-पुथल और जनआंदोलनों के बाद तैयार किया गया था। इसमें मुख्य प्रस्ताव शामिल हैं: सरकार का कहना है कि ये बदलाव लोकतंत्र को संतुलित और पारदर्शी बनाएंगे। हालांकि, विपक्ष और कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि इतने बड़े संवैधानिक बदलावों को एक ही “हां या ना” सवाल में समेटना मतदाताओं के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। राजनीतिक मुकाबला: कौन है मैदान में? इस चुनाव में मुख्य मुकाबला BNP (Bangladesh Nationalist Party) और जमात-ए-इस्लामी जैसे दलों के बीच सिमटता दिख रहा है। राजनीतिक माहौल काफी ध्रुवीकृत हो चुका है। पिछले कुछ वर्षों में युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और शासन को लेकर असंतोष ने राजनीतिक बहस को तेज किया है। यही वजह है कि यह चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बल्कि नीति और व्यवस्था में बदलाव की मांग से भी जुड़ा हुआ है। अल्पसंख्यक सुरक्षा और सामाजिक तनाव चुनाव से पहले कुछ क्षेत्रों में हिंसा और तनाव की घटनाएं सामने आई हैं। अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। कुछ संगठनों ने सुरक्षा की गारंटी मिलने तक चुनाव बहिष्कार की बात भी कही है। ऐसे माहौल में प्रशासन के लिए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान कराना बड़ी चुनौती बन गया है। India क्यों है Concerned? भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पिछले एक दशक में काफी मजबूत हुए हैं — चाहे वह व्यापार हो, कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स हों या सुरक्षा सहयोग। भारत की चिंता के मुख्य कारण हैं: नई दिल्ली आधिकारिक तौर पर इसे बांग्लादेश का आंतरिक मामला मानती है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। क्या दांव पर लगा है? यह चुनाव और Referendum मिलकर बांग्लादेश की लोकतांत्रिक संरचना को नई दिशा दे सकते हैं।अगर जनता July Charter को मंजूरी देती है, तो देश की संवैधानिक व्यवस्था में बड़े बदलाव संभव हैं।अगर इसे खारिज किया जाता है, तो राजनीतिक अनिश्चितता और बहस लंबी खिंच सकती है। साफ है कि 12 फरवरी सिर्फ एक मतदान तिथि नहीं, बल्कि Bangladesh के भविष्य का फैसला करने वाला दिन है। दक्षिण एशिया की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले महीनों में कई नए समीकरण पैदा कर सकता है — और इसी वजह से ढाका से लेकर नई दिल्ली तक सबकी नजरें इस चुनाव पर टिकी हुई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Canada स्कूल शूटिंग से कांपा टंबलर रिज, शूटर समेत 9 मृत; प्रधानमंत्री ने विदेश दौरा छोड़ा

कनाडा ( Canada) से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के छोटे से शहर टंबलर रिज (Tumbler Ridge) में एक स्कूल के भीतर हुई गोलीबारी में शूटर समेत 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कम से कम 25 लोग घायल हैं। यह घटना न सिर्फ कनाडा बल्कि वैश्विक स्तर पर स्कूलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। क्या है पूरा मामला? यह घटना 10 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 1:20 बजे (स्थानीय समय) हुई। टंबलर रिज सेकेंडरी स्कूल में उस समय पढ़ाई चल रही थी। इस स्कूल में कक्षा 7 से 12 तक के करीब 175 छात्र पढ़ते हैं। अचानक एक हथियारबंद व्यक्ति स्कूल परिसर में दाखिल हुआ और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी की आवाज सुनते ही स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। छात्र और शिक्षक जान बचाने के लिए क्लासरूम में छिप गए। कुछ बच्चों ने खिड़कियों से बाहर भागने की कोशिश की, तो कुछ फर्श पर लेटकर मदद का इंतजार करते रहे। मौत और घायलों की स्थिति पुलिस के अनुसार, इस हमले में 9 लोगों की मौत हुई है, जिनमें खुद शूटर भी शामिल है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि शूटर ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या की।इसके अलावा 25 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर लगातार उनकी जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। पूरे इलाके में दहशत घटना के तुरंत बाद पूरे इलाके में लॉकडाउन लगा दिया गया। पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की कई टीमें मौके पर पहुंचीं। बाद में हालात काबू में आने पर लॉकडाउन हटाया गया, लेकिन शहर में अब भी डर और सन्नाटा है। स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सभी स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री Mark Carney का बड़ा फैसला इस दर्दनाक घटना के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने गहरा शोक जताया। उन्होंने कहा कि यह हमला “दिल तोड़ देने वाला” है और देश इस मुश्किल घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने अपना Germany Visit रद्द कर दिया। उन्हें जर्मनी में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेना था, लेकिन उन्होंने कहा कि इस समय उनकी प्राथमिकता अपने देश के लोगों के साथ रहना है। जांच जारी, कई सवाल बाकी पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि शूटर ने यह कदम क्यों उठाया। उसका मकसद क्या था, हथियार उसे कहां से मिला और क्या वह किसी मानसिक दबाव में था—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Indian-Style Promises in Bangladesh Polls किसान कार्ड, Skill Development

Bangladesh एक बार फिर ऐसे चुनावी मोड़ पर खड़ा है, जहाँ सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा, लोकतांत्रिक भरोसा और सामाजिक नीतियों का भविष्य तय होना है।12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव से पहले जो सबसे दिलचस्प बात सामने आ रही है, वह है — चुनावी वादों की भाषा और मॉडल, जो कई मायनों में भारत के चुनावी एजेंडे से मिलती-जुलती दिखाई दे रही है। किसान कार्ड, कौशल विकास, मिड-डे मील जैसी योजनाओं ने इस चुनाव को सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति से जुड़ा बड़ा मुद्दा बना दिया है। चुनाव की पृष्ठभूमि: सत्ता बदली, सियासत बदली यह चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि यह शेख हसीना और अवामी लीग के सत्ता से बाहर होने के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव है। लंबे समय तक सत्ता में रही अवामी लीग इस बार चुनावी मैदान में नहीं है, और देश का राजनीतिक केंद्र पूरी तरह बदल चुका है। अब मुख्य मुकाबला है: साथ ही, इसी चुनाव के साथ संवैधानिक जनमत संग्रह (Referendum) भी हो रहा है, जिसने चुनाव को और ज्यादा अहम बना दिया है। Indian-Style Promises: क्या वाकई ‘नकल’, या बदलती राजनीति? BNP के चुनावी घोषणापत्र ने सबसे ज्यादा सुर्खियाँ बटोरी हैं। वजह साफ है — इसमें शामिल कई वादे भारतीय चुनावों की याद दिलाते हैं। प्रमुख वादे जो चर्चा में हैं: यही कारण है कि मीडिया में यह सवाल उठ रहा है —क्या बांग्लादेश (Bangladesh)भारतीय चुनावी मॉडल को कॉपी कर रहा है? असल में, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सीधी “नकल” नहीं, बल्कि लोकप्रिय और परखे हुए वेलफेयर मॉडल को अपनाने की रणनीति है। जनता का मूड: वादों से आगे भी सवाल हालांकि घोषणापत्र आकर्षक हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत थोड़ी अलग तस्वीर दिखाती है। मतदाता सिर्फ योजनाएँ नहीं देख रहे, वे पूछ रहे हैं: पिछले कुछ महीनों में BNP और जमात समर्थकों के बीच झड़पों ने इन सवालों को और गहरा कर दिया है। India और China फैक्टर भी मैदान में इस चुनाव में विदेश नीति भी एक अहम मुद्दा बन गई है। यानी यह चुनाव सिर्फ ढाका की राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की कूटनीति से भी जुड़ा है। Bangladesh Election 2026 अब केवल सत्ता की लड़ाई नहीं रह गया है।यह चुनाव तय करेगा कि: किसान कार्ड, कौशल विकास और मिड-डे मील जैसे वादे सुनने में परिचित लग सकते हैं, लेकिन असली परीक्षा उनकी ज़मीन पर अमल की होगी। 12 फरवरी को आने वाला फैसला सिर्फ सरकार नहीं चुनेगा, बल्कि यह बताएगा कि बांग्लादेश किस रास्ते पर चलना चाहता है — वादों के भरोसे या बदलाव की उम्मीद के साथ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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US Tariff Cut का असर India–US Trade Deal से AYUSH और Nutraceutical Industry में नई जान

भारत और अमेरिका के बीच हुए India–US Interim Trade Deal 2025 ने भारतीय AYUSH और Nutraceutical सेक्टर के लिए नए अवसरों के दरवाज़े खोल दिए हैं। इस समझौते के तहत अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ में भारी कटौती की गई है, जिससे खासतौर पर आयुर्वेद, हर्बल और न्यूट्रास्यूटिकल कंपनियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी टैरिफ में कटौती से राहत अब तक भारतीय AYUSH और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों पर अमेरिका में लगभग 50 प्रतिशत तक टैरिफ लग रहा था। इस कारण भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया था।नए अंतरिम व्यापार समझौते के बाद यह टैरिफ करीब 18 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है, जिससे भारतीय उत्पाद अब पहले की तुलना में ज्यादा किफायती दामों पर उपलब्ध हो सकेंगे। AYUSH और Nutraceutical सेक्टर क्यों है खास? भारत का AYUSH सेक्टर — जिसमें आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और हर्बल उत्पाद शामिल हैं — दुनियाभर में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अमेरिका जैसे बड़े बाजार मेंअश्वगंधा, हल्दी, अदरक, नीम, हर्बल एक्सट्रैक्ट्स और आयुर्वेदिक सप्लीमेंट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ में कटौती से भारतीय कंपनियों को न केवल लागत में राहत मिलेगी, बल्कि वे अमेरिकी ब्रांड्स और अन्य देशों के सप्लायर्स के साथ बेहतर तरीके से मुकाबला कर पाएंगी। निर्यात में तेजी की उम्मीद आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का AYUSH निर्यात अमेरिका को लगभग 688 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। नए टैरिफ स्ट्रक्चर के लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में इस आंकड़े के और बढ़ने की संभावना है। Pharmanza Herbal जैसी कंपनियों का मानना है कि यह बदलाव छोटे और मझोले निर्यातकों के लिए भी बड़ा मौका साबित होगा, जो अब तक ऊंचे टैक्स के कारण अमेरिकी बाजार में कदम रखने से हिचकिचा रहे थे। सिर्फ AYUSH नहीं, कई सेक्टर होंगे मजबूत India–US Interim Trade Deal का असर केवल AYUSH और न्यूट्रास्यूटिकल तक सीमित नहीं है।इससे टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स और होम डेकोर जैसे कई भारतीय निर्यात सेक्टरों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं भारत ने भी अमेरिका से आने वाले कुछ औद्योगिक और चुनिंदा कृषि उत्पादों पर टैरिफ में आंशिक राहत देने पर सहमति जताई है, जबकि संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है। भारतीय ब्रांड्स के लिए क्या बदलेगा? इस व्यापार समझौते के बाद भारतीय कंपनियों को हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Islamabad

Islamabad Blast शिया समुदाय पर लक्षित आत्मघाती हमला

इस्लामाबाद, पाकिस्तान — शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को इस्लामाबाद (Islamabad) के तरलाई इलाके में स्थित शिया मस्जिद इमाम बारगाह (Imambargah) में जुमे की नमाज़ के दौरान एक भयानक आत्मघाती विस्फोट (Suicide Blast) हुआ। घटना के समय मस्जिद में भारी भीड़ थी, और विस्फोट के कारण 10 लोगों की मौत हुई जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना का विवरण स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हमलावर ने मस्जिद के मुख्य द्वार पर खुद को विस्फोट कर लिया। धमाके की आवाज पूरे इलाके में सुनी गई और मलबा चारों ओर बिखर गया।लोग खून से लथपथ और घायल स्थिति में बाहर भागते दिखे। तत्काल पुलिस और राहत टीमें (Rescue Teams) मौके पर पहुंची और घायल लोगों को अस्पताल ले जाया गया। मुख्य बिंदु: सुरक्षा और प्रतिक्रिया (Security & Response) इस्लामाबाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और इमरजेंसी (Emergency) घोषित कर दी। सुरक्षा एजेंसियाँ घटनास्थल पर फोरेंसिक जांच कर रही हैं। अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है, लेकिन प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट है कि यह धार्मिक समुदाय को निशाना बनाने वाला आतंकी हमला (Targeted Terror Attack) था। सामाजिक और मानवीय प्रभाव (Social & Human Impact) यह हमला न केवल इस्लामाबाद बल्कि पूरे पाकिस्तान में शिया समुदाय और अन्य धार्मिक समूहों के लिए चिंता का विषय बन गया है।घायलों के परिवार सदमे में हैं और स्थानीय प्रशासन उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा रहा है। स्थानीय लोग और विश्व समुदाय इस हमले की निंदा कर रहे हैं। सामाजिक मीडिया पर भी “Prayers for Islamabad” और “Shia Mosque Blast” ट्रेंड कर रहा है। इस्लामाबाद में यह आत्मघाती हमला पाकिस्तान में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की संवेदनशीलता को उजागर करता है।स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी जारी की है और जनता से शांति बनाए रखने का आग्रह किया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ajit Doval की बैकडोर बातचीत के बाद बनी अमेरिकी ट्रेड डील

Ajit Doval की बैकडोर बातचीत के बाद बनी अमेरिकी ट्रेड डील

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) Ajit Doval की बैकडोर कूटनीति के बाद ही अमेरिका के साथ यह समझौता संभव हो पाया। सूत्रों के मुताबिक, डोभाल ने साफ शब्दों में विदेश मंत्री से कहा था कि भारत किसी दबाव में नहीं झुकेगा और जरूरत पड़ी तो डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति पद से हटने तक इंतजार करेगा। बताया जा रहा है कि उस समय अमेरिका की ओर से भारत पर ट्रेड डील को जल्द मंजूरी देने का दबाव बनाया जा रहा था। लेकिन भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी और मजबूती से अपनी शर्तों पर बातचीत जारी रखी। सूत्रों का कहना है कि डोभाल की रणनीति यही थी कि बिना जल्दबाजी किए संतुलित और सम्मानजनक समझौता किया जाए, ताकि भारत के किसानों, उद्योगों और छोटे व्यापारियों के हित सुरक्षित रह सकें। इस बैकडोर बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत की दिशा बदली और आखिरकार एक ऐसी ट्रेड डील पर सहमति बनी, जिसमें भारत की शर्तों को भी महत्व दिया गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम दिखाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर किसी भी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपने हितों के साथ मजबूती से खड़ा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Iran ने अमेरिका को चेतावनी दी US Warship और Fighter Jet के खौफनाक दृश्य

ईरान (Iran) और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच तेहरान के Enghelab चौक में ईरान ने एक विशाल पोस्टर जारी कर अमेरिका को सैन्य कार्रवाई से बचने की कड़ी चेतावनी दी है। पोस्टर में US युद्धपोत (Aircraft Carrier) और Fighter Jet को ध्वस्त और समुद्र में खून बहते हुए दिखाया गया है। पोस्टर पर अंग्रेज़ी में लिखा है:“If you sow the wind, you will reap the whirlwind”(जो बुवाई करेगा, तूफान काटेगा) — यह स्पष्ट संदेश है कि किसी भी आक्रामक कदम का जवाब ईरान द्वारा दिया जाएगा। क्यों बढ़ रहा है तनाव? पोस्टर का संदेश विशेषज्ञों के अनुसार यह पोस्टर सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है। इसमें दिखाए गए ध्वस्त युद्धपोत और नष्ट विमान, समुद्र में खून के दृश्य के साथ, यह संदेश देते हैं कि यदि वास्तविक टकराव हुआ तो परिणाम भयंकर होंगे। यह ईरान द्वारा अमेरिका और उसके सहयोगियों को भेजी गई सख्त चेतावनी है। अंतरराष्ट्रीय नजर अंतरराष्ट्रीय समुदाय फिलहाल सैन्य टकराव रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। अमेरिका और Iran दोनों ही अपनी तैयारियों में लगे हैं, लेकिन किसी भी अप्रत्याशित कदम से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमेरिका

अमेरिका में 5 साल के बच्चे की हिरासत US Immigration Action ने इंसानियत पर सवाल खड़े किए

अमेरिका से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत, कानून और बच्चों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिनेसोटा राज्य में एक पाँच साल के बच्चे को उसके पिता के साथ इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया। यह सब उस वक्त हुआ, जब बच्चा रोज़ की तरह स्कूल से घर लौट रहा था। घटना क्या थी? कोलंबिया हाइट्स इलाके में पाँच साल का लियाम कोनेजो रामोस अपने पिता एड्रियन अलेक्जेंडर कोनेजो एरियस के साथ प्री-स्कूल से लौट रहा था। तभी अमेरिकी इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के एजेंटों ने उनकी गाड़ी रुकवाई और दोनों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद पिता और बेटे को टेक्सास के एक डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। बच्चे को “चारा” बनाने का आरोप स्थानीय स्कूल अधिकारियों और समुदाय के लोगों का कहना है कि एजेंटों ने बच्चे को जानबूझकर अपने साथ रखा ताकि घर के अन्य लोगों को बाहर बुलाया जा सके। इस दावे ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। कई लोगों का कहना है कि एक छोटे बच्चे को इस तरह की कार्रवाई में घसीटना अमानवीय है और उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। सरकार का जवाब होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और ICE ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि बच्चा किसी तरह से निशाना नहीं था और कार्रवाई का उद्देश्य केवल पिता को हिरासत में लेना था। एजेंसी के मुताबिक, बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अधिकारी को उसके साथ रखा गया। कानूनी स्थिति पर सवाल परिवार के समर्थकों और वकीलों का कहना है कि इस परिवार का अमेरिका में शरण (asylum) का मामला पहले से चल रहा था और उन्हें देश से निकालने का कोई अंतिम आदेश नहीं मिला था। ऐसे में अचानक हिरासत में लेना कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। लोगों की प्रतिक्रिया और विरोध घटना सामने आते ही स्थानीय स्कूल प्रशासन, सामाजिक संगठनों और कई नेताओं ने ICE की कार्रवाई की आलोचना की। उनका कहना है कि इससे प्रवासी परिवारों में डर का माहौल बनता है और बच्चों की पढ़ाई व भावनात्मक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। कई माता-पिता ने चिंता जताई कि अगर स्कूल से लौटते बच्चों के साथ ऐसा हो सकता है, तो कोई भी सुरक्षित नहीं है। इंसानियत बनाम कानून यह मामला सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियों और उनके लागू होने के तरीकों पर बड़ा सवाल है। आलोचकों का कहना है कि कानून लागू करना ज़रूरी है, लेकिन बच्चों को ऐसी सख्त कार्रवाई में शामिल करना न तो नैतिक है और न ही मानवीय। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ग्वालियर: साइबर ठगी के पैसों से खरीदा 50 ग्राम का सोने का सिक्का, ज्वेलर्स का बैंक खाता हुआ फ्रीज

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम को वैध बनाने का एक नया तरीका सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक युवक ने सराफा बाजार स्थित ‘गहना जेम्स एंड ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड’ से 50 ग्राम का सोने का सिक्का खरीदा और उसका भुगतान कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम के जरिए ऑनलाइन किया। बाद में इस लेनदेन के चलते ज्वेलर्स का बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया। ऑनलाइन ट्रांसफर से किया लाखों रुपये का भुगतान पुलिस के मुताबिक, झांसी रोड स्थित माधव नगर निवासी सराफा कारोबारी अजय मंगल का लश्कर सराफा बाजार में ज्वेलरी शोरूम है। बताया गया कि 4 अप्रैल 2026 को अभिषेक परिहार नाम का युवक शोरूम पहुंचा और 50 ग्राम का सोने का सिक्का खरीदने का सौदा किया। उसने अग्रिम भुगतान के रूप में 1 लाख रुपये NEFT और 10 हजार रुपये IMPS के माध्यम से जमा कराए। अगले दिन, 5 अप्रैल, वह दोबारा शोरूम पहुंचा और 5 लाख रुपये, 1.41 लाख रुपये ऑनलाइन बैंक ट्रांसफर तथा 52,900 रुपये नकद देकर पूरा भुगतान किया। इसके बाद कारोबारी ने जीएसटी का बिल जारी कर सोने का सिक्का उसे सौंप दिया। 20 दिन बाद बैंक खाता हुआ फ्रीज करीब 20 दिन बाद, 24 अप्रैल को ज्वेलर्स का बैंक खाता अचानक होल्ड कर दिया गया। बैंक ने ई-मेल के माध्यम से बताया कि खाते में आई 5.10 लाख रुपये की राशि को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के निर्देश पर फ्रीज किया गया है। इसके बाद 4 जून को बेंगलुरु साइबर क्राइम पुलिस का नोटिस मिला। नोटिस में बताया गया कि सोने के सिक्के के भुगतान में इस्तेमाल किए गए 5.10 लाख रुपये, बेंगलुरु के एक कारोबारी से हुई 14 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का हिस्सा थे। पुलिस के अनुसार, ठगों ने कथित रूप से ठगी की रकम सीधे ज्वेलर्स के खाते में ट्रांसफर कर सोने का सिक्का खरीद लिया। पुलिस ने दर्ज किया मामला मामले की जानकारी मिलने के बाद अजय मंगल ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान खरीदारी के समय जमा कराए गए आधार कार्ड से पता चला कि आरोपी अभिषेक परिहार बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के घोसीपुरा का निवासी है। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले सीएसपी लश्कर किरण अहिरवार ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपी की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि शोरूम का सीसीटीवी बैकअप केवल 15 से 20 दिन तक सुरक्षित रहता है, इसलिए घटना के फुटेज उपलब्ध नहीं हो सके। हालांकि आधार कार्ड के विवरण और साइबर ट्रेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

भरतपुर: REET में पास कराने के नाम पर लिए 5 लाख, पैसे वापस मांगने पर ठेकेदार की हत्या; 14 महीने बाद हुआ खुलासा

भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले में करीब 14 महीने पहले लापता हुए ठेकेदार प्रहलाद बैरवा हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, REET-2021 परीक्षा में प्रहलाद की पत्नी को पास कराने का झांसा देकर 5 लाख रुपये लेने के बाद जब आरोपी रकम लौटाने के दबाव में आए तो उन्होंने प्रहलाद की हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद दोनों आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया। उनकी निशानदेही पर धौलपुर के जंगल से शव के अवशेष भी बरामद किए गए हैं। कोर्ट जाते समय हुए थे लापता भरतपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश मीणा ने बताया कि वैर निवासी ठेकेदार प्रहलाद बैरवा 26 मार्च 2025 को कोर्ट जाने के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। अगले दिन उनकी पत्नी पूनम बैरवा ने वैर थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया था। मामले की जांच के लिए कई पुलिस टीमें गठित की गईं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इस दौरान परिजनों ने कई बार प्रदर्शन कर मामले के खुलासे की मांग भी की थी। REET में पास कराने का झांसा बना हत्या की वजह पुलिस जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में पूनम बैरवा REET परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान आरोपी धर्मेंद्र जाखड़ ने परीक्षा में पास कराने का दावा करते हुए प्रहलाद से 5 लाख रुपये ले लिए। जब परीक्षा का परिणाम आया और पूनम सफल नहीं हुईं तो प्रहलाद ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार, लगातार पैसों की मांग से परेशान होकर धर्मेंद्र ने अपने साथी विनोद मीणा के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। अपहरण के बाद जंगल में की हत्या पुलिस के अनुसार, 26 मार्च 2025 को आरोपियों ने प्रहलाद का कथित रूप से अपहरण कर उन्हें धौलपुर के जंगल में ले गए, जहां गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने के उद्देश्य से शव को जंगल में दफना दिया गया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल से शव के अवशेष बरामद किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद खुला राज जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की, लेकिन वे लगातार गुमराह करते रहे। इसके बाद पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया। पुलिस का कहना है कि टेस्ट के बाद आरोपियों ने हत्या की बात स्वीकार की, जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अन्य लेन-देन की भी जांच जारी पुलिस ने बताया कि मामले में अन्य आर्थिक लेन-देन के पहलुओं की भी जांच की जा रही है। वहीं, करीब 25 दिन पहले एसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान प्रहलाद की पत्नी पूनम बैरवा ने आरोप लगाया था कि उनके पति ने धर्मेंद्र जाखड़ को 4.50 लाख रुपये और राजेश कुमार गर्ग को 15 लाख रुपये उधार दिए थे। उन्होंने दावा किया कि रकम वापस मांगने को लेकर पहले से विवाद चल रहा था और इस संबंध में धोखाधड़ी का मामला भी अदालत में विचाराधीन है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान, अपराध और देश की ताज़ा एवं विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत पदक से चूका, स्विमिंग और बॉक्सिंग में बढ़ीं उम्मीदें

ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स के दूसरे दिन भारत को पैरा पावरलिफ्टिंग के पहले मेडल इवेंट में निराशा हाथ लगी। पुरुष लाइटवेट वर्ग में अशोक कुमार मलिक पदक से मामूली अंतर से चूकते हुए चौथे स्थान पर रहे, जबकि परमजीत कुमार छठे स्थान पर रहे। हालांकि स्विमिंग, जिम्नास्टिक्स और बॉक्सिंग में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने पदकों की उम्मीदें बरकरार रखी हैं। पैरा पावरलिफ्टिंग में अशोक चौथे स्थान पर पुरुष लाइटवेट फाइनल में नौ बार के राष्ट्रीय चैंपियन अशोक कुमार मलिक ने पहली कोशिश में 195 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। दूसरी कोशिश में उन्होंने 200 किलोग्राम की अपनी व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (Personal Best) लिफ्ट पूरी कर 143.8 अंक हासिल किए। तीसरे प्रयास में 205 किलोग्राम वजन उठाने में असफल रहने के कारण वह चौथे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए। वहीं परमजीत कुमार ने पहले प्रयास में 176 किलोग्राम वजन उठाकर 135.6 अंक अर्जित किए। इसके बाद 179 किलोग्राम वजन उठाने के दोनों प्रयास असफल रहे और वह छठे स्थान पर रहे। अब महिला लाइटवेट वर्ग में जसप्रीत कौर और सुमन देवी, जबकि महिला हेवीवेट में कस्तूरी राजामणि तथा पुरुष हेवीवेट में झंडू कुमार और सुधीर भारत की ओर से पदक की चुनौती पेश करेंगे। स्विमिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने बनाई फाइनल और सेमीफाइनल में जगह भारत के लिए अच्छी खबर स्विमिंग से आई। इस स्पर्धा में कुल आठ प्रतिभागी होने के कारण दोनों भारतीय तैराक फाइनल में पहुंच गए हैं। वहीं स्टार तैराक श्रीहरि नटराज ने पुरुष 50 मीटर बैकस्ट्रोक हीट में 25.52 सेकेंड का समय निकालते हुए अपनी हीट में पांचवां और कुल मिलाकर 14वां स्थान हासिल किया। इसके साथ उन्होंने सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया। जिम्नास्टिक्स में भारत मजबूत स्थिति में आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स की पुरुष टीम ऑलराउंड स्पर्धा में दो उपकरणों के बाद भारत सब-डिवीजन-2 में सिंगापुर के बाद दूसरे स्थान पर चल रहा है। भारतीय टीम में तपन मोहंती, स्वाथिश केपी, तपेश्वरनाथ दास और योगेश्वर सिंह शामिल हैं। बॉक्सिंग में आज से भारत का अभियान बॉक्सिंग में भारत की ओर से जदुमणि सिंह पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग के राउंड ऑफ-32 मुकाबले में स्कॉटलैंड के आरोन कुलेन का सामना करेंगे। वहीं ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन को महिला 75 किलोग्राम वर्ग में बाय मिला है, जिससे वह सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार दोनों सेमीफाइनल में हारने वाले खिलाड़ियों को भी कांस्य पदक दिया जाता है। ऐसे में लवलीना का कम से कम ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित हो गया है। जूडो में भारत को झटका भारत की जूडो खिलाड़ी तूलिका मान को पिछले 12 महीनों में तीन बार वेयरअबाउट्स नियम के उल्लंघन के कारण NADA ने अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इसके चलते उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया है। इससे पहले पुरुष 73 किलोग्राम वर्ग के अरुण कुमार भी प्रतियोगिता से बाहर हो चुके हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स, भारतीय खिलाड़ियों और खेल जगत की हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com

Gold Price Today: सोना ₹824 सस्ता, चांदी में मामूली तेजी; जानें आज के ताजा भाव

नई दिल्ली। घरेलू सर्राफा बाजार में 24 जुलाई को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी के दाम में हल्की बढ़त देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 824 रुपये घटकर 1,43,781 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। वहीं, एक किलोग्राम चांदी की कीमत 241 रुपये बढ़कर 2,22,721 रुपये हो गई। इससे पहले सोना 1,44,605 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,22,480 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। इस साल कीमतों में रहा बड़ा उतार-चढ़ाव वर्ष 2026 में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। चांदी की बात करें तो— आगे क्या रह सकता है रुख? कमोडिटी विशेषज्ञ अजय केडिया के अनुसार, सोना और चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अवसर हो सकता है। हालांकि उन्होंने सलाह दी कि निवेशकों को एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध (SIP या किस्तों में) निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए, ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सके। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो साल के अंत तक सोना 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.80 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। सोना-चांदी, शेयर बाजार, निवेश और बिजनेस से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com

NEET पेपर लीक मामला: शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्शन, NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त, दर्ज होंगे आपराधिक केस

नई दिल्ली। देशभर में NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। समाचार एजेंसी ANI के सूत्रों के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही इन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। यह कार्रवाई परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। एक दिन पहले हुए थे बड़े प्रशासनिक फेरबदल इससे पहले गुरुवार को केंद्र सरकार ने 17 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और पदोन्नति के आदेश जारी किए थे। सबसे बड़ा बदलाव शिक्षा मंत्रालय में हुआ, जहां 1994 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया। उन्होंने विनीत जोशी का स्थान लिया है, जिन्हें पंचायती राज मंत्रालय का सचिव बनाया गया है। इसके अलावा 1995 बैच के IAS अधिकारी टी.के. अनिल कुमार को पदोन्नत कर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। पेपर लीक पर सरकार लगातार दे रही सख्त संदेश पिछले कुछ दिनों में केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों पर लगातार कड़े रुख के संकेत दिए हैं। 24 जुलाई: सख्त कानून लाने का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक जैसे अपराधों को रोकने के लिए कड़े दंड का प्रावधान करने वाला विधेयक संसद में लाया जाएगा। 23 जुलाई: फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पेपर लीक मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए। 21 जुलाई: “पेपर लीक घोर पाप है” एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पेपर लीक युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय है। उन्होंने बताया कि मामले में अब तक 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही राज्यों से भी इस तरह की घटनाओं को रोकने में सहयोग की अपील की गई। युवाओं के भविष्य पर सरकार का फोकस सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से प्रशासनिक कार्रवाई, कानूनी सुधार और जांच प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। देश, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी हर बड़ी और विश्वसनीय खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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