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Middle East

India Pakistan Ceasefire Trump बोले “US ने Nuclear War रोका”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान (India Pakistan) के बीच बढ़ते तनाव को रोकते हुए संभावित परमाणु युद्ध (Nuclear War) को टालने में अमेरिका की अहम भूमिका निभाई। ट्रंप ने कहा कि उनकी सख्त व्यापार नीति और राजनयिक दबाव के चलते दोनों देशों ने संघर्ष विराम (Ceasefire) को स्वीकार किया। Trump का दावा: “हमने रोका India-Pakistan Nuclear War Trump के अनुसार, उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों देशों से सीधा संपर्क किया और चेतावनी दी कि “हम उन देशों से व्यापार नहीं कर सकते जो एक-दूसरे पर मिसाइल फेंक रहे हैं।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अगर अमेरिका ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो यह मामला परमाणु संघर्ष में बदल सकता था। 🇮🇳 भारत का जवाब: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से टूटा पाकिस्तान का हौसला भारत सरकार ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह संघर्ष विराम अमेरिका के दबाव से नहीं, बल्कि भारत की सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक रणनीति का नतीजा है। भारतीय सैन्य सूत्रों के अनुसार, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” (Operation Sindoor) लॉन्च किया। इसके तहत पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन कार्रवाइयों से पाकिस्तान की स्थिति कमजोर हुई और उसे बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gaza

Gaza Conflict अमेरिका का 60 दिन का Ceasefire Plan और Hostage Release

अमेरिका ने पेश किया 60 दिन का Gaza Ceasefire Plan गाज़ा (Gaza) संघर्षविराम के लिए अमेरिका (US) ने पेश किया 60 दिन का Ceasefire Proposal, हो सकती है Hostage और Prisoner की बड़ी अदला-बदली वाशिंगटन/तेल अवीव/गाज़ा – अमेरिका (US) ने गाज़ा संघर्ष (Gaza Conflict) को रोकने और मानवीय संकट को कम करने के लिए एक 60 दिन के Temporary Ceasefire का प्रस्ताव दिया है। इस प्लान (Plan) के तहत इज़राइल (Israel) और हमास (Hamas) के बीच बंधकों (Hostages) और कैदियों (Prisoners) की बड़ी अदला-बदली (Swap) हो सकती है। Key Highlights इस US Proposed Ceasefire Plan के: Middle East में Diplomatic Efforts: इस प्लान को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden), मिस्र (Egypt) और कतर (Qatar) ने समर्थन दिया है। इज़राइल ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, और हमास भी जल्द ही अपनी प्रतिक्रिया देगा। Challenges: हालाँकि यह प्रस्ताव मानवीय राहत और संघर्ष विराम के लिए बड़ा कदम है, लेकिन Hamas का निरस्त्रीकरण (Disarmament) और Israel की पूरी वापसी (Complete Withdrawal) अभी भी विवादित मुद्दे बने हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tariff

Trump Tariff Court Decision भारत को मिली राहत, अमेरिका के दबाव से छुटकारा

अमेरिका की एक बड़ी अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा लगाए गए कुछ अंतरराष्ट्रीय टैरिफ (Import Tariffs) को गैरकानूनी करार दिया है। इस फैसले से भारत को व्यापारिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। अब भारत को अमेरिकी टैरिफ के भारी दबाव से कुछ हद तक छुटकारा मिल गया है। क्या है मामला? अमेरिका की Court of International Trade ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत जो “Retaliatory”, “Worldwide” और “Trafficking” टैरिफ लगाए थे, वे कानून के दायरे से बाहर हैं। कोर्ट ने इन्हें अवैध घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद अमेरिका अब भारत जैसे देशों पर उन Tariff के आधार पर दबाव नहीं बना सकता, जो कि IEEPA के अंतर्गत नहीं आते हैं। पहले भारत पर 26% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी गई थी, जिससे भारत पर संवेदनशील सेक्टर जैसे एग्रीकल्चर (Agriculture) को खोलने का दबाव बनाया जा रहा था। किन टैरिफ पर रहेगा असर और किन पर नहीं? इस फैसले का असर केवल उन्हीं टैरिफ पर पड़ेगा जो IEEPA के तहत लगाए गए थे। स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो पार्ट्स पर जो 25% ड्यूटी लगाई गई थी, वह अब भी बरकरार है। इसका मतलब यह है कि इन क्षेत्रों के भारतीय निर्यातकों को अभी कोई राहत नहीं मिलेगी। व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया व्हाइट हाउस ने कहा है कि सरकार राष्ट्रीय आपात स्थितियों से निपटने के लिए सभी उपलब्ध Executive Powers का इस्तेमाल करती रहेगी। इससे साफ है कि आने वाले समय में अमेरिका इस फैसले को चुनौती दे सकता है या नई रणनीति बना सकता है। भारत को क्या फायदा होगा? इस फैसले से भारत को अमेरिका के साथ व्यापारिक वार्ता में बेहतर स्थिति मिली है। अब भारत पर तत्काल टैरिफ लगाने का खतरा नहीं है और वह अपने हितों के अनुसार रणनीति बना सकता है। यह कदम भारत के लिए ट्रेड पॉलिसी (Trade Policy) को लेकर एक पॉजिटिव संकेत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Elon Musk

Elon Musk का इस्तीफा ट्रंप सरकार से Exit का कारण बना ‘Big Beautiful Bill’

टेक जगत के दिग्गज Elon Musk ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन से इस्तीफा दे दिया है। वे Department of Government Efficiency (DOGE) के प्रमुख के तौर पर सरकारी सुधारों में जुटे थे, लेकिन अब उन्होंने अपनी भूमिका से हटने का ऐलान कर दिया है। Elon Musk का Government Exit – जानिए क्या बोले मस्क एलन मस्क ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर लिखा: Elon Musk vs Trump’s Big Beautiful Bill – असहमति की असली वजह मस्क के इस्तीफे का मुख्य कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘One Big Beautiful Bill’ बताया जा रहा है। यह एक विशाल कर और आव्रजन सुधार प्रस्ताव है, जिसे लेकर मस्क ने नाराजगी जताई। उन्होंने बिल को ‘Massive Spending Bill’ करार दिया और कहा: “कोई बिल बड़ा हो सकता है या खूबसूरत – लेकिन दोनों एक साथ नहीं।” यह बयान ट्रंप सरकार की नीतियों पर मस्क की असहमति को स्पष्ट करता है। क्यों नाखुश थे Elon Musk? कौन होगा Elon Musk का DOGE में अगला Successor? DOGE के अगले प्रमुख को लेकर अटकलें शुरू हो चुकी हैं। विवेक रामास्वामी का नाम संभावित विकल्पों में सामने आया है, लेकिन आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। Musk Returns to Tesla & SpaceX – अब फोकस बिजनेस पर सरकारी भूमिका से बाहर निकलने के बाद एलन मस्क अब पूरी तरह से Tesla, SpaceX और अन्य कंपनियों पर ध्यान देंगे। उनका इस्तीफा इस बात का संकेत है कि सरकारी सुधारों में प्राइवेट सेक्टर की अप्रोच को अपनाना आसान नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dmitry Medvedev

World War 3 की चेतावनी, रूस के Dmitry Medvedev ने Trump को दी सख्त नसीहत

बढ़ते तनाव के बीच रूस की चेतावनी रूस के दिमित्री मेदवेदेव (Dmitry Medvedev) ने अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) को चेतावनी दी है कि अगर पश्चिमी देश, खासकर अमेरिका, रूस के खिलाफ उकसावे की कार्रवाई जारी रखते हैं, तो यह स्थिति World War 3 (तीसरे विश्व युद्ध) में बदल सकती है। Trump की टिप्पणी पर रूस की तीखी प्रतिक्रिया हाल ही में ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में कहा कि रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करना व्लादिमीर पुतिन की “भयानक गलती” थी और उन्होंने इस संघर्ष को जल्द खत्म करने की जरूरत बताई। इसके जवाब में मेदवेदेव ने कहा कि: Ukraine-Russia War बन सकता है Global Crisis रूस का कहना है कि अमेरिका और नाटो (NATO) देश यूक्रेन को हथियार और समर्थन देकर इस युद्ध को अनावश्यक रूप से खींच रहे हैं। मेदवेदेव की यह चेतावनी सीधे तौर पर पश्चिमी देशों को दी गई है कि अगर रूस को सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ा, तो उसका जवाब भी बेहद गंभीर होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Social Media Vetting

US Visa में Social Media Vetting इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए नई परेशानी

अगर आप अमेरिका (USA) में पढ़ाई करने की सोच रहे हैं, तो अब वीजा (US Student Visa) पाना पहले से ज्यादा मुश्किल हो सकता है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एक नई पॉलिसी लागू की है, जिसके तहत अब सोशल मीडिया वेटिंग (Social Media Vetting) की जाएगी। अब छात्रों के Facebook, Instagram, X (Twitter), YouTube जैसी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को वीजा अप्रूवल से पहले गहराई से जांचा जाएगा। क्या होता है Social Media Vetting? Social Media Vetting का मतलब है वीजा अप्लाई करने वाले छात्रों की ऑनलाइन गतिविधियों की जांच करना। इसमें देखा जाएगा: अगर किसी की प्रोफाइल में संदिग्ध कंटेंट पाया गया तो उसका वीजा रिजेक्ट किया जा सकता है। US Embassy ने क्यों रोके नए Visa Interview Appointments? US State Department ने दुनिया भर की सभी अमेरिकी एंबेसी और कॉन्सुलेट्स को निर्देश दिया है कि वे फिलहाल नई F, M और J कैटेगरी की वीजा अपॉइंटमेंट्स (Visa Appointments) को अस्थायी रूप से रोक दें। पहले से तय इंटरव्यू अभी भी होंगेनई अपॉइंटमेंट्स रुक गई हैंइस दौरान सोशल मीडिया वेटिंग के लिए नई गाइडलाइंस बनाई जाएंगी विदेशी छात्र और Universities में बढ़ी चिंता अमेरिका के टॉप कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ ने चिंता जताई है कि इससे: छात्रों को डर है कि उनकी सोशल मीडिया एक्टिविटी के आधार पर वीजा रिजेक्ट किया जा सकता है, भले ही उनकी नीयत साफ हो। ट्रंप प्रशासन की दलील: “सुरक्षा पहले” अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि: “हमारे पास यह अधिकार है कि कौन अमेरिका में दाखिल होगा। सोशल मीडिया से हमें लोगों की सोच, इरादे और खतरे का आकलन करने में मदद मिलती है।” लेकिन आलोचक कह रहे हैं कि यह पॉलिसी freedom of speech और privacy rights का उल्लंघन है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Apple

Trump का Apple को झटका, India में बने iPhone पर लगेगा 25% टैरिफ, सभी Smartphone Brands पर असर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने Apple और अन्य स्मार्टफोन कंपनियों (Smartphone Brands) को बड़ा झटका देते हुए ऐलान किया है कि अगर iPhone या अन्य स्मार्टफोन्स का निर्माण भारत (India) या किसी और देश में किया गया है, तो अमेरिका में उन्हें बेचने पर 25% का भारी टैरिफ (Import Tariff) लगेगा। ट्रंप ने साफ किया कि उनका यह फैसला सिर्फ Apple तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी कंपनियों पर लागू होगा। उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही Tim Cook से कह दिया था – आप भारत में iPhone बना सकते हैं, लेकिन अगर आप अमेरिका में बेचना चाहते हैं, तो टैरिफ देना होगा।” iPhone के लिए Airlift: Apple ने भारत से भेजे 600 टन डिवाइसेस Apple ने ट्रंप के इस टैरिफ प्लान को भांपते हुए भारत से लगभग 600 टन iPhones को अमेरिका एयरलिफ्ट कर भेजा है ताकि जून के अंत से पहले स्टॉक भर सकें। जानकारों का मानना है कि यह कदम संभावित टैरिफ से पहले की रणनीति है। सिर्फ Apple नहीं, सभी ब्रांड्स पर असर Donald Trump ने स्पष्ट कहा कि यह टैरिफ नीति केवल Apple पर लागू नहीं होगी। “अगर हम सिर्फ Apple पर टैरिफ लगाते हैं और Samsung को छूट देते हैं, तो यह अनुचित होगा,” उन्होंने कहा। इसका मतलब है कि सैमसंग, शाओमी, ओप्पो, वीवो जैसी कंपनियां भी इस नीति के दायरे में आएंगी। 🇮🇳 India की Manufacturing Strategy पर असर भारत सरकार की PLI (Production Linked Incentive) योजना के तहत Apple, Samsung जैसी कंपनियों ने भारत में बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू की है। इससे भारत ग्लोबल स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है। लेकिन अब अमेरिका के इस फैसले से भारत में बने iPhones की कीमत या बिक्री पर असर पड़ सकता है। भारत सरकार ने ट्रंप के इस बयान पर “wait and watch” की नीति अपनाई है। वाणिज्य विभाग के डायरेक्टर जनरल संतोश सारंगी ने कहा कि सरकार स्थिति पर नज़र रख रही है और जरूरत पड़ने पर प्रतिक्रिया देगी। क्या होगा असर? – Price Hike या Profit Loss विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में टैरिफ लागू होने पर दो ही रास्ते होंगे – या तो iPhones की कीमतें बढ़ेंगी, या Apple को अपने मुनाफे में कटौती करनी पड़ेगी। दोनों ही स्थितियाँ यूजर्स और ब्रांड्स के लिए मुश्किलें पैदा करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mohammad Yunus resignation news

Bangladesh Political Crisis: अंतरिम PM Mohammad Yunus के इस्तीफे की अटकलें तेज

Bangladesh Political Crisis 2025: बांग्लादेश की सियासत एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री प्रोफेसर Mohammad Yunus के इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई हैं। आधी रात को बीबीसी बांग्ला सेवा की एक रिपोर्ट ने इस खबर को हवा दी, जिसमें नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के प्रमुख Nahid Islam के हवाले से कहा गया कि यूनुस इस्तीफे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। Nahid, जो कभी यूनुस के सलाहकार रह चुके हैं, ने मीडिया से बातचीत में कहा, “सर को लगता है कि राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है, जिससे वह काम नहीं कर पा रहे हैं।” गौरतलब है कि Nahid ने इसी साल यूनुस से अलग होकर अपनी पार्टी NCP की स्थापना की थी। क्या है Mohammad Yunus resignation news की वजह? दरअसल, हाल के दिनों में यूनुस सरकार और देश की सैन्य व्यवस्था के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब यूनुस सरकार ने विदेश सचिव Mohammad Jashim Uddin को पद से हटा दिया — जबकि उन्हें महज 8 महीने पहले ही सितंबर 2024 में नियुक्त किया गया था। Jashim ने सरकार की उस योजना का विरोध किया था जिसमें Rohingya शरणार्थियों के लिए मानवीय कॉरिडोर बनाने की बात कही गई थी। यह योजना यूनुस और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Khalil-ur-Rahman द्वारा लाई गई थी, जिसका मकसद म्यांमार के रखाइन राज्य से भागकर आए रोहिंग्याओं को मानवीय सहायता देना था। सेना क्यों है विरोध में? यहीं से विवाद ने गंभीर मोड़ ले लिया। बांग्लादेश की सेना ने Myanmar से Bangladesh तक प्रस्तावित humanitarian corridor का कड़ा विरोध किया। सेना का कहना है कि इस कॉरिडोर से देश की sovereignty यानी राष्ट्रीय स्वायत्तता पर खतरा मंडरा रहा है और इसका कोई ठोस कूटनीतिक लाभ भी नहीं दिख रहा। सेना प्रमुख द्वारा हाल ही में की गई एक प्रेस ब्रीफिंग को यूनुस सरकार के लिए “Final Warning” के रूप में देखा गया, जिसने राजनीतिक संकट को और गहरा कर दिया। Yunus की छवि पर सवाल सरकार की कूटनीतिक अस्थिरता और सेना से खुला टकराव यूनुस की छवि को भी नुकसान पहुंचा रहा है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर काफी public discourse शुरू हो चुका है। सत्ताधारी खेमे में भी दो फाड़ नजर आ रही है — एक पक्ष यूनुस के साथ है, तो दूसरा उनकी नीतियों को देश के लिए खतरा मानता है आगे क्या? Bangladesh Interim Government Crisis अब ऐसे मोड़ पर है, जहां से लौटना आसान नहीं लगता। अगर यूनुस इस्तीफा देते हैं, तो यह बांग्लादेश के इतिहास में एक और अस्थिर अध्याय होगा। वहीं, अगर वे दबाव में बिना इस्तीफा दिए कार्यकाल पूरा करते हैं, तो उन्हें सेना, राजनीतिक दलों और जनता — तीनों को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी। Mohammad Yunus के इस्तीफे की खबरें सिर्फ एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि Bangladesh के राजनीतिक और कूटनीतिक भविष्य की दिशा तय कर सकती हैं। Rohingya शरणार्थियों को लेकर लिए गए फैसले, सेना से मतभेद और विदेश नीति की खामियों ने इस पूरे संकट को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में इस पर देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी रहेंगी।
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Drone Attack

Drone Attack in Moscow: मॉस्को एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, DMK सांसद Kanimozhi का Delegation बाल-बाल बचा

मॉस्को, 23 मई 2025: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच मॉस्को एयरपोर्ट (Moscow Airport) पर एक बड़ा ड्रोन हमला (Drone Attack) उस समय हुआ जब DMK सांसद कनिमोझी (Kanimozhi) के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल (Indian Delegation) रूस पहुंचने वाला था। हमले के कुछ ही समय पहले यह प्रतिनिधिमंडल विनुकोवो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Vnukovo International Airport) पर लैंड करने वाला था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। Drone Attack के चलते रूस में हड़कंप रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी एयर डिफेंस सिस्टम (Russian Air Defense) ने मॉस्को की ओर आ रहे तीन ड्रोन (Three Drones) को समय रहते मार गिराया। इस हमले के बाद मॉस्को के तीन बड़े हवाई अड्डों – Vnukovo, Domodedovo और Sheremetyevo – पर कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक लगाई गई थी, लेकिन अब सभी हवाई सेवाएं बहाल कर दी गई हैं। एक ही सप्ताह में 485 ड्रोन हमले इस घटना से पहले, रूस ने दावा किया था कि 19 से 22 मई के बीच उसने 485 यूक्रेनी ड्रोन (Ukrainian Drones) को मार गिराया है। इन हमलों में मॉस्को, रियाज़ान और येल्त्स जैसे इलाकों को निशाना बनाया गया। येल्त्स के एक प्लांट से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि रियाज़ान की ऑयल रिफाइनरी में भारी आग लग गई थी। विदेशी डेलीगेशन पर बढ़ते खतरे ड्रोन हमले की टाइमिंग बेहद संवेदनशील थी क्योंकि उसी समय भारतीय सांसदों का डेलीगेशन रूस में लैंड कर रहा था। हालांकि, किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी सदस्य सुरक्षित हैं। यह घटना अंतरराष्ट्रीय डेलीगेशन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है। रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन की भूमिका Russia-Ukraine War में अब ड्रोन हमले एक महत्वपूर्ण रणनीतिक हथियार बन चुके हैं। ये हमले न केवल सैन्य, बल्कि नागरिक इलाकों और उद्योगों को भी निशाना बना रहे हैं। इससे रूस की सुरक्षा तैयारियों की भी पोल खुल रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Harvard

Harvard Indian Students News: ट्रंप की कार्रवाई से 788 भारतीय छात्र संकट में SEVP रद्द

वॉशिंगटन, मई 2025 — अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त नीति के चलते Harvard University की SEVP (Student and Exchange Visitor Program) सर्टिफिकेशन रद्द कर दी गई है। इस फैसले से यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे 788 भारतीय छात्रों की शिक्षा और भविष्य पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। क्या है मामला? ट्रंप प्रशासन ने आरोप लगाया है कि हार्वर्ड ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़ी गतिविधियों—खासकर कैंपस में हुए राजनीतिक विरोध प्रदर्शन—की उचित रिपोर्टिंग नहीं की। इस कारण यूनिवर्सिटी की SEVP मान्यता को निलंबित कर दिया गया है, जिससे अब वह नए या मौजूदा विदेशी छात्रों को वैध रूप से पढ़ा नहीं सकती। 🇮🇳 भारतीय छात्रों पर असर 72 घंटे में वापसी का मौका Harvard को अमेरिका सरकार की ओर से 6 प्रमुख शर्तों के साथ 72 घंटे का समय दिया गया है, जिनमें यह स्पष्ट करना शामिल है कि यूनिवर्सिटी ने किन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई की। यदि यूनिवर्सिटी इन शर्तों को पूरा करती है, तो उसकी SEVP मान्यता बहाल की जा सकती है। कोर्ट से आंशिक राहत इस बीच कैलिफोर्निया की एक फेडरल अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसके तहत हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीज़ा को रद्द किया जाना था। अदालत ने कहा कि हर छात्र के मामले को व्यक्तिगत रूप से जांचा जाना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

जंतर-मंतर पर ‘मैं हूं कॉकरोच’ नारा बना चर्चा का विषय: 5 घंटे का विरोध प्रदर्शन, उम्मीद से कम भीड़; ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन में क्या हासिल हुआ?

Jantar Mantar पर ‘मैं हूं कॉकरोच’ नारा बना चर्चा का विषय: 5 घंटे का विरोध प्रदर्शन, उम्मीद से कम भीड़; ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन में क्या हासिल हुआ?

दिल्ली के jantar mantar पर एक अनोखा और चर्चा में रहने वाला विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जहां ‘मैं भी अन्ना’ की तर्ज पर प्रदर्शनकारियों ने खुद को ‘मैं हूं कॉकरोच’ कहते हुए नारे लगाए। करीब 5 घंटे तक चले इस प्रोटेस्ट में उम्मीद के मुकाबले कम भीड़ नजर आई, जिससे आयोजन को लेकर कई सवाल भी उठने लगे। अनोखे नाम से चर्चा में आया प्रदर्शन प्रदर्शनकारियों ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले यह विरोध दर्ज कराया। उनका दावा था कि यह प्रदर्शन सिस्टम और राजनीति के प्रति नाराजगी दिखाने का एक अलग तरीका है। हालांकि, नाम और थीम को लेकर सोशल मीडिया पर भी जमकर बहस छिड़ गई। भीड़ उम्मीद से कम, चर्चा ज्यादा आयोजकों को जहां बड़ी भीड़ की उम्मीद थी, वहीं मौके पर उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही। इसके बावजूद पूरे कार्यक्रम ने मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर काफी ध्यान खींचा। आखिर क्या मिला इस प्रदर्शन से? प्रदर्शन खत्म होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि इस विरोध से हासिल क्या हुआ। कुछ लोगों ने इसे creative protest बताया, तो कुछ ने इसे सिर्फ attention-grabbing स्टंट करार दिया। जंतर-मंतर फिर बना विरोध का केंद्र दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बना रहा, जहां अलग-अलग विचारधाराओं और मुद्दों को लेकर लोग अपनी आवाज उठाते दिखे।
कुर्सी(chair) पर ज्यादा देर बैठना बन रहा खतरा: हर दिन बढ़ रहे स्लिप डिस्क के मामले, बिना दर्द के भी पहुंच रहा नुकसान

कुर्सी(chair) पर ज्यादा देर बैठना बन रहा खतरा: हर दिन बढ़ रहे स्लिप डिस्क के मामले, बिना दर्द के भी पहुंच रहा नुकसान

आज की बदलती लाइफस्टाइल में लंबे समय तक कुर्सी (chair) पर बैठकर काम करना आम बात हो गई है, लेकिन यही आदत अब सेहत के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक हर दिन 4 से 5 नए मामले ऐसे सामने आ रहे हैं, जिनमें लोग स्लिप डिस्क (Slipped Disc) की समस्या से जूझ रहे हैं। बिना दर्द के भी हो रहा बड़ा नुकसान चौंकाने वाली बात यह है कि कई मरीजों में शुरुआत में कोई तेज दर्द नहीं होता, इसलिए बीमारी का पता देर से चलता है। जब तक लक्षण समझ में आते हैं, तब तक समस्या गंभीर हो चुकी होती है और कुछ मामलों में यह लकवे (Paralysis) तक पहुंच जाती है। खराब पोश्चर और लगातार बैठना बड़ी वजह विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक गलत तरीके से बैठना, लगातार स्क्रीन के सामने काम करना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी इस बीमारी के मुख्य कारण हैं। खासकर ऑफिस वर्कर्स, स्टूडेंट्स और ड्राइवर ज्यादा जोखिम में हैं। किन बातों का रखें ध्यान डॉक्टर सलाह देते हैं कि:
UP में लौटेगी भीषण गर्मी: 9 से 11 जून तक लू का अलर्ट, तापमान में 6 डिग्री तक बढ़ोतरी की संभावना

UP में लौटेगी भीषण गर्मी: 9 से 11 जून तक लू का अलर्ट, तापमान में 6 डिग्री तक बढ़ोतरी की संभावना

UP में एक बार फिर मौसम ने करवट ले ली है। जहां कुछ दिन राहत भरी बारिश और हल्की हवाओं से लोगों को सुकून मिला था, वहीं अब प्रदेश में भीषण गर्मी की वापसी होने जा रही है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 9 जून से 11 जून के बीच कई जिलों में लू (Heatwave) का असर देखने को मिलेगा। तापमान में तेज बढ़ोतरी की संभावना मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में प्रदेश के तापमान में करीब 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इन जिलों में सबसे ज्यादा असर लू का असर खासतौर पर पश्चिमी और मध्य यूपी के जिलों में ज्यादा देखने को मिल सकता है। कई इलाकों में दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। स्वास्थ्य को लेकर सावधानी जरूरी डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, हल्के कपड़े पहनें और धूप से खुद को बचाकर रखें। बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखने की जरूरत है। कब मिलेगी राहत? फिलहाल 11 जून के बाद मौसम में हल्का बदलाव आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।
“श्रीराम कृष्णन का बड़ा ऐलान: डोनाल्ड Trumph के AI पॉलिसी सलाहकार पद से देंगे इस्तीफा”

“Sriram krishnan का बड़ा ऐलान: डोनाल्ड Trumph के AI पॉलिसी सलाहकार पद से देंगे इस्तीफा”

तकनीकी दुनिया से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है।Sriram krishnan ने घोषणा की है कि वे डोनाल्ड ट्रंप के AI पॉलिसी सलाहकार पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब वे अपने व्यक्तिगत और प्रोफेशनल लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहते हैं, इसलिए इस जिम्मेदारी को आगे जारी रखना संभव नहीं होगा। श्रीराम कृष्णन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति और तकनीकी सलाह के क्षेत्र में एक अनुभवी विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान AI से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। उनके इस फैसले के बाद टेक और पॉलिसी जगत में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे निजी निर्णय बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि इससे AI नीति से जुड़ी टीम में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि अभी तक उनकी तरफ से आगे की योजनाओं को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।
हमारी पोस्ट हटाई जा सकती है, हमें नहीं मिटाया जा सकता: jantar-mantar से अभिजीत दीपके का सरकार पर तीखा हमला”

हमारी पोस्ट हटाई जा सकती है, हमें नहीं मिटाया जा सकता: jantar-mantar से अभिजीत दीपके का सरकार पर तीखा हमला”

jantar-mantar पर एक कार्यक्रम के दौरान अभिजीत दीपके ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि भले ही सोशल मीडिया या प्लेटफॉर्म से उनकी पोस्ट हटा दी जाए, लेकिन उनकी आवाज और विचारों को खत्म नहीं किया जा सकता। अभिजीत दीपके ने अपने संबोधन में कहा, “हमारी पोस्ट हटाई जा सकती है, लेकिन हमें मिटाया नहीं जा सकता।” उनके इस बयान ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा और माहौल काफी गरम हो गया। उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में विचारों को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन लोग अब पहले से ज्यादा जागरूक हैं और सच को सामने लाने से नहीं डरते। जंतर-मंतर पर हुई इस सभा में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, जहां वक्ताओं ने अपने विचार रखे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर अपनी चिंता भी जताई। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक बयान के रूप में देख रहे हैं।

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