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राष्ट्रपति भवन में ‘एट होम’ रिसेप्शन, PM मोदी समेत 650 मेहमान हुए शामिल

नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान परिसर में पारंपरिक ‘एट होम’ रिसेप्शन का आयोजन किया। समारोह में करीब 650 मेहमान शामिल हुए, जिनमें लगभग 100 VVIP अतिथि रहे। समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, CJI सूर्यकांत, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला समेत केंद्रीय मंत्री, राजनयिक और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां पहुंचीं। पैरा-क्रिकेटर आमिर हुसैन लोन को भी विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के गायन से हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव समेत कई प्रमुख नेता भी समारोह में मौजूद रहे। पत्नी के साथ पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपनी पत्नी सविता कोविंद के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी समारोह में मौजूद रहे। पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और CJI सूर्यकांत ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दी श्रद्धांजलि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इससे पहले राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी मौजूद रहे। लाल किले पर पहली बार गूंजा वंदे मातरम् इस साल स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम् का गायन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में भी राष्ट्रगीत का उल्लेख किया। PM मोदी ने कहा कि आज हर दिल वंदे मातरम् की लय पर धड़क रहा है। उन्होंने तिरंगे और राष्ट्रगीत को स्वतंत्रता दिवस की भावना से जोड़ते हुए कहा कि वंदे मातरम् की आवाज पूरे देश में गूंज रही है।
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यूपी में बाढ़ का संकट: 11 नदियां चेतावनी बिंदु के पार, चित्रकूट-उन्नाव में घरों तक पहुंचा पानी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के चलते कई नदियां उफान पर हैं। गंगा, यमुना और शारदा समेत 11 नदियां चेतावनी बिंदु पार कर चुकी हैं। कई जिलों में बाढ़ का पानी कॉलोनियों और घरों तक पहुंच गया है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ा चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। कई कॉलोनियों और घरों तक पानी पहुंच गया है। रामघाट की सीढ़ियां पूरी तरह डूब गई हैं। नदी के किनारे बने आरोग्यधाम पुल के ऊपर से भी मंदाकिनी का पानी बह रहा है। उन्नाव में घरों में घुसा गंगा का पानी उन्नाव में गंगा नदी का पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया है। कई घरों में पानी भरने के बाद लोग छतों पर रहने को मजबूर हैं। बाढ़ प्रभावित गलियों में नावों के जरिए लोगों की आवाजाही हो रही है। शुक्रवार को उच्च शिक्षा राज्यमंत्री और जिले की प्रभारी मंत्री रजनी तिवारी स्टीमर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। वाराणसी में 100 से ज्यादा छोटे मंदिर जलमग्न वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों पर बने 100 से ज्यादा छोटे मंदिर पानी में डूब गए हैं। हरिश्चंद्र घाट का शवदाह स्थल भी जलमग्न हो गया है। संभल में मकान की छत गिरी, 7 लोग दबे संभल में बारिश के दौरान एक मकान की छत गिर गई। हादसे में परिवार के 7 लोग मलबे में दब गए। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से दो लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। चित्रकूट में सबसे ज्यादा बारिश पिछले 24 घंटे में प्रदेश में सबसे ज्यादा 41.5 मिलीमीटर बारिश चित्रकूट में दर्ज की गई। शनिवार सुबह लखनऊ, बाराबंकी और आसपास के इलाकों में भी बारिश हुई। करीब एक घंटे की तेज बारिश के बाद मौसम खुल गया। मौसम विभाग ने रविवार को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। मानसून फिर हो सकता है सक्रिय लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। यह झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ के क्षेत्रों से गुजर रहा है और आगे बढ़ने के साथ कमजोर हो रहा है। हालांकि, इसके प्रभाव से उत्तर भारत में मानसून के एक बार फिर सक्रिय होने की संभावना है। इसका व्यापक असर उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है और कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
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सोनिया गांधी पर वंदे मातरम् रोकने की कोशिश का आरोप, कांग्रेस बोली- खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं

नई दिल्ली: कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। भाजपा ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर वंदे मातरम् के गायन को रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कार्यक्रम का वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि गीत की शुरुआती पंक्तियों के बाद सोनिया गांधी ने इसे रोकने का संकेत दिया। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी पूरे गायन के दौरान असहज नजर आए। कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज कर दिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सोनिया गांधी वंदे मातरम् रोकने की कोशिश नहीं कर रही थीं। उनके मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे काफी देर से खड़े थे। सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी लाने का इशारा कर रही थीं। जयराम रमेश ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाया गया और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई। 1937 से कांग्रेस कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की परंपरा जयराम रमेश ने कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदे मातरम् के इस्तेमाल को लेकर चर्चा हुई थी। बैठक में महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू और सी. राजगोपालाचारी समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे। रमेश के अनुसार, रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की शुरुआती पंक्तियां गाने की परंपरा तय हुई थी। वंदे मातरम् को लेकर नए नियमों पर भी विवाद यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् और राष्ट्रगान को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में दोनों के गायन और बजाने के दौरान तय प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा गया है। सरकार के निर्देशों के अनुसार, अगर किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् और जन गण मन दोनों गाए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम् और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। यदि किसी राज्य का अपना राज्य गीत भी हो, तो क्रम राज्य गीत, वंदे मातरम् और फिर जन गण मन का होगा। 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी। बाद में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् गाया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रीय चेतना और आंदोलन का प्रमुख प्रतीक बन गया। संसद में भी हो चुकी है वंदे मातरम् पर बहस वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद में भी इस गीत को लेकर विशेष चर्चा हुई थी। उस दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच गीत के इतिहास और इसके इस्तेमाल को लेकर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली थी। भाजपा ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् के कुछ हिस्सों को लेकर आपत्ति जताने का आरोप लगाया था, जबकि कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया था।
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PM मोदी के 75 मिनट के भाषण में सबसे ज्यादा 111 बार आया ‘भारत’, युवाओं का 52 बार जिक्र

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से करीब 75 मिनट का स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया। भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने कई मुद्दों और वर्गों का जिक्र किया। शब्दों के इस्तेमाल के लिहाज से ‘भारत’ सबसे ज्यादा बार बोला गया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में ‘भारत’ का 111 बार इस्तेमाल किया, जबकि ‘दुनिया’ शब्द का 62 बार जिक्र किया। युवाओं को 52 बार किया संबोधित पीएम मोदी ने अपने भाषण में युवाओं पर खास जोर दिया। उन्होंने ‘युवा’, ‘नौजवान’ और ‘युवा शक्ति’ जैसे शब्दों के जरिए युवाओं का कुल 52 बार जिक्र किया। वहीं संबोधन के दौरान ‘मेरे प्यारे देशवासियो’ 40 बार कहा गया। ‘साथियो’ का इस्तेमाल 10 बार हुआ। इसके अलावा ‘मेरे प्यारे युवाओं’, ‘देश सेवक’ और ‘भाई-बहनों’ जैसे संबोधन भी एक-एक बार बोले गए। नक्सलवाद, गरीबी और डिजिटल का भी बार-बार जिक्र प्रधानमंत्री के भाषण में नक्सलवाद, गरीबी, डिजिटल और लाल किले जैसे शब्द भी कई बार सुनाई दिए। ‘देशवासियो’ के बाद ‘परिवारजनों’ भी रहा पसंदीदा संबोधन ‘देशवासियो’ लंबे समय से पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों का प्रमुख संबोधन रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, उन्होंने 2025 में करीब 50 बार, 2024 में 30 बार, 2023 में 15 बार और 2022 में 40 से ज्यादा बार इसका इस्तेमाल किया था। वहीं ‘परिवारजनों’ भी प्रधानमंत्री के भाषणों में प्रमुख संबोधन रहा है। 2023 में उन्होंने इसका करीब 50 बार इस्तेमाल किया था। ‘साथियो’ शब्द का इस्तेमाल भी पिछले वर्षों के मुकाबले अलग-अलग रहा। 2025 में करीब 35 बार, 2024 में 30 बार, 2023 में 5 बार और 2022 में करीब 8 बार इसका इस्तेमाल हुआ था। लाल किले से लगातार 13वीं बार संबोधन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल लाल किले से लगातार 13वीं बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित किया। हालांकि, लगातार सबसे ज्यादा स्वतंत्रता दिवस भाषण देने का रिकॉर्ड अभी भी जवाहरलाल नेहरू के नाम है। नेहरू ने लाल किले से लगातार 17 बार स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित किया था।
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स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे की रोशनी से सजा जयपुर नगर निगम मुख्यालय, सेल्फी पॉइंट बना आकर्षण

जयपुर: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजधानी जयपुर देशभक्ति के रंग में रंगी नजर आ रही है। शहर के सरकारी कार्यालयों और प्रमुख स्थानों को तिरंगे और आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। इनमें टोंक रोड स्थित नगर निगम मुख्यालय की सजावट लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। नगर निगम मुख्यालय को इस बार पहली बार इतने आकर्षक अंदाज में सजाया गया है कि यहां से गुजरने वाले लोग रुककर तस्वीरें और सेल्फी ले रहे हैं। खास बात यह है कि सजावट देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ जयपुर घूमने आए देशी-विदेशी पर्यटक भी यहां पहुंच रहे हैं। पहली बार बनाया गया सेल्फी पॉइंट नगर निगम मुख्यालय के बाहर स्वतंत्रता दिवस की थीम पर पहली बार आम जनता के लिए विशेष सेल्फी पॉइंट तैयार किया गया है। इसे तिरंगे और देशभक्ति से जुड़ी सजावट के साथ आकर्षक रूप दिया गया है। सुबह से ही यहां लोगों की आवाजाही देखने को मिल रही है। लोग तिरंगे के साथ फोटो और सेल्फी लेकर स्वतंत्रता दिवस की यादों को कैमरे में कैद कर रहे हैं। CM भजनलाल के कटआउट से स्वच्छता का संदेश नगर निगम मुख्यालय की सजावट में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कटआउट भी लगाए गए हैं। इनके जरिए लोगों को स्वच्छ और सुंदर जयपुर का संदेश दिया जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस की सजावट के साथ ‘स्वच्छ जयपुर, सुंदर जयपुर’ की थीम को भी प्रमुखता दी गई है। नगर निगम की ओर से शहरवासियों को स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने की कोशिश की गई है। रात में रोशनी से और खूबसूरत दिख रहा मुख्यालय दिन में तिरंगे और देशभक्ति से जुड़ी सजावट लोगों का ध्यान खींच रही है, वहीं रात में रंग-बिरंगी रोशनी से नगर निगम मुख्यालय की खूबसूरती और बढ़ गई है। टोंक रोड से गुजरने वाले लोगों को भी दूर से ही रोशनी से सजा निगम मुख्यालय नजर आ रहा है। यही वजह है कि कई लोग यहां कुछ देर रुककर तस्वीरें ले रहे हैं। सरकारी कार्यालय भी तिरंगे से सजे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जयपुर के अन्य सरकारी कार्यालयों और प्रमुख स्थानों पर भी विशेष सजावट की गई है। कई जगह तिरंगे, लाइटिंग और देशभक्ति से जुड़े संदेश लगाए गए हैं। निजी संस्थानों और प्रतिष्ठानों ने भी अपने परिसरों को स्वतंत्रता दिवस की थीम पर सजाया है। हालांकि, इस बार नगर निगम मुख्यालय का सेल्फी पॉइंट और आकर्षक लाइटिंग लोगों के बीच खास चर्चा का विषय बनी हुई है।
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PM Modi

PM Modi का बड़ा संदेश: ‘दिमागी नक्सल’ को पहचानें, Women Reservation पर राजनीति न करें

80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए विकास, सुरक्षा, युवा शक्ति और महिला सशक्तिकरण को लेकर कई अहम बातें कहीं। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए ऐसी विचारधाराओं से सतर्क रहने की बात कही, वहीं महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक दलों से मिलकर आगे बढ़ने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन वैचारिक स्तर पर चुनौती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने समाज से ऐसे लोगों को पहचानने और अलग-थलग करने की बात कही, जिन्हें वे ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं। महिला आरक्षण पर राजनीति छोड़ने की अपील पीएम मोदी के भाषण में Women Reservation भी प्रमुख मुद्दा रहा। उन्होंने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था को जल्द लागू करने की दिशा में सहयोग किया जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक श्रेय की चिंता किए बिना महिलाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने विपक्ष समेत सभी दलों से साथ आने की अपील की। Youth Power पर बड़ा फोकस प्रधानमंत्री ने युवाओं को भारत के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कई घोषणाएं कीं। उन्होंने अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI Training देने की बात कही। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए Free Online Coaching की पहल का भी ऐलान किया। पीएम मोदी ने युवाओं के सपनों को गति देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के फंड का भी जिक्र किया। उनका संदेश साफ था कि युवा केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि देश के विकास में नेतृत्व करने वाले बनें। 2047 तक Viksit Bharat का रोडमैप स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में Viksit Bharat@2047 प्रधानमंत्री के भाषण का बड़ा केंद्र रहा। उन्होंने भारत को आर्थिक, तकनीकी और औद्योगिक रूप से मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया। पीएम मोदी ने विकास के लिए ‘शक्ति की सप्त धारा’ का विजन सामने रखा, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस प्रोडक्शन तथा ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया गया। Self-Reliance और Make in India पर जोर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, Make in India और Vocal for Local को आगे बढ़ाने की अपील की। सेमीकंडक्टर, ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को उन्होंने भविष्य के भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया। देश की एकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश पीएम मोदी ने अपने संबोधन में देश की एकता को मजबूत रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास की यात्रा तभी सफल होगी, जब समाज मिलकर आगे बढ़े और देश के हित को प्राथमिकता दे। बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के प्रति भी प्रधानमंत्री ने संवेदना जताई और मुश्किल समय में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिया। PM Modi Speech का बड़ा संदेश क्या रहा? लाल किले से प्रधानमंत्री का भाषण कई मुद्दों को एक साथ जोड़ता नजर आया। एक तरफ दिमागी नक्सल को लेकर चेतावनी और दूसरी तरफ Women Reservation पर सभी दलों से सहयोग की अपील रही। इसके साथ ही AI, Youth Power, आत्मनिर्भरता और 2047 के विकसित भारत का विजन भी भाषण में प्रमुखता से सामने आया। पीएम मोदी के संदेश का फोकस यही रहा कि भारत को आने वाले वर्षों में मजबूत बनाने के लिए युवा शक्ति, महिला भागीदारी, तकनीक, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय एकता को साथ लेकर चलना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon का कहर: MP के 12 जिलों में बारिश का Alert, Himachal की 114 Roads बंद; Odisha में Flood

देश के कई हिस्सों में मानसून (Monsoon) ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश में भारी बारिश को लेकर Alert जारी किया गया है, हिमाचल प्रदेश में बारिश के साथ Landslide ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं और ओडिशा में बाढ़ का असर हजारों लोगों तक पहुंच गया है। अलग-अलग राज्यों में बिगड़े हालात के बीच प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। MP में 12 जिलों में Heavy Rain का Alert मध्य प्रदेश में मानसून एक्टिव होने के बाद कई इलाकों में तेज बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश का Alert जारी किया है। कुछ इलाकों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और आंधी की स्थिति भी बन सकती है। लगातार बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन ने भी संवेदनशील इलाकों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर राहत व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। हिमाचल में Landslide ने रोकी रफ्तार हिमाचल प्रदेश में बारिश के साथ पहाड़ों से मलबा गिरने की घटनाएं लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। कई स्थानों पर Landslide के कारण 114 सड़कें बंद होने की जानकारी सामने आई है। इससे कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण सड़क पर मलबा आने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में लोगों को बिना जरूरी काम के संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन और सड़क बहाली से जुड़े विभाग बंद रास्तों को खोलने में जुटे हैं। Odisha में Flood से 41 हजार लोग प्रभावित ओडिशा में भी भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति ने चिंता बढ़ा दी है। राज्य के कई इलाकों में पानी भरने और नदियों के जलस्तर बढ़ने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 41 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। तीन राज्यों में बारिश, लेकिन चुनौतियां अलग-अलग मानसून की इस बारिश ने तीनों राज्यों में अलग-अलग तरह की चुनौती खड़ी कर दी है। MP में Heavy Rain और जलभराव, हिमाचल में Landslide और बंद सड़कें, जबकि ओडिशा में Flood और प्रभावित आबादी प्रशासन के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। बारिश के इस दौर में लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि वे मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के अपडेट पर नजर रखें। खासकर नदी-नालों, पहाड़ी रास्तों और जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखना जरूरी है। Weather Alert के बीच सावधानी जरूरी मानसून के दौरान कुछ घंटों में हालात बदल सकते हैं। इसलिए मौसम खराब होने पर गैर-जरूरी यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लें। फिलहाल तीनों राज्यों में राहत और निगरानी का काम जारी है और आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति पर सबकी नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Free Online Coaching

Youth के लिए मोदी सरकार का बड़ा कदम: Free Online Coaching से लेकर AI Training तक

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं के लिए कई अहम बातें कहीं। लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में पीएम मोदी ने Free Online Coaching और AI Training को लेकर बड़ा ऐलान किया। सरकार का लक्ष्य अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को Artificial Intelligence की ट्रेनिंग देने का है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा बढ़ाने की बात कही गई है। इन घोषणाओं का सीधा संबंध उन लाखों छात्रों से है, जो बेहतर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महंगे कोचिंग संस्थानों का सहारा लेते हैं। खासकर छोटे शहरों और सामान्य परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। महंगी कोचिंग के बोझ को कम करने की कोशिश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आज कई परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन चुकी है। अच्छे संस्थानों की फीस के अलावा छात्रों को रहने, खाने और आने-जाने पर भी काफी खर्च करना पड़ता है। यही वजह है कि कई प्रतिभाशाली विद्यार्थी संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं। पीएम मोदी ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए Free Online Coaching की दिशा में पहल की बात कही। ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई की सुविधा मिलने पर विद्यार्थियों को अपने शहर से बाहर जाने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, इस पहल के तहत कौन-कौन सी परीक्षाएं शामिल होंगी, Registration कैसे होगा और Coaching किस Platform पर उपलब्ध कराई जाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी सरकार की ओर से अलग से सामने आनी बाकी है। 1 करोड़ युवाओं को मिलेगी AI Training आज Artificial Intelligence केवल टेक्नोलॉजी की दुनिया तक सीमित नहीं है। शिक्षा से लेकर बिजनेस, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर तक AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में युवाओं को AI Skills से जोड़ना भविष्य के रोजगार के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है। इसका मकसद युवाओं को नई तकनीक की समझ देना और उन्हें बदलते Job Market के लिए तैयार करना है। पहले से चल रहे AI कार्यक्रमों को मिलेगा नया Push भारत में AI Education को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से पहले भी कई पहल शुरू की गई हैं। इनमें YUVA AI for ALL जैसे कार्यक्रम शामिल हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को AI की बुनियादी जानकारी उपलब्ध कराना है। सरकार के अनुसार इस तरह के Free Learning Programs के जरिए बड़ी संख्या में लोग AI की शुरुआती समझ हासिल कर रहे हैं। अब एक करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य इस दिशा में बड़े स्तर पर विस्तार का संकेत देता है। छोटे शहरों के छात्रों के लिए बड़ी उम्मीद Free Online Coaching का सबसे बड़ा फायदा उन विद्यार्थियों को हो सकता है, जो बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करने का खर्च नहीं उठा सकते। अगर अच्छी Faculty, Study Material और Test Series ऑनलाइन एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होती है, तो छोटे शहरों के छात्रों को भी बेहतर तैयारी का मौका मिल सकता है। यही इस घोषणा का मानवीय पहलू भी है—प्रतिभा किसी एक शहर की मोहताज नहीं होनी चाहिए। सुविधा और संसाधन अगर ऑनलाइन पहुंचते हैं, तो पढ़ाई के अवसरों का दायरा काफी बड़ा हो सकता है। Education से Employment तक सरकार का फोकस पीएम मोदी की इन घोषणाओं में एक तरफ शिक्षा को ज्यादा सुलभ बनाने की कोशिश दिखाई देती है, वहीं दूसरी तरफ युवाओं को Future Skills से जोड़ने पर जोर है। Free Coaching छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद कर सकती है, जबकि AI Training उन्हें नई तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करने की दिशा में कदम है। हालांकि, इन योजनाओं की सफलता केवल घोषणा तक सीमित नहीं रहेगी। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण Content, प्रशिक्षित Teachers, मजबूत Digital Infrastructure और देश के दूरदराज इलाकों तक इंटरनेट की पहुंच जरूरी होगी। युवाओं के लिए क्या बदलेगा? अगर इन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो आने वाले समय में छात्रों को Coaching और AI Skills के लिए पहले की तुलना में ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए Free Online Education एक बड़ी राहत बन सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

Independence Day 2026: लाल बांधनी पगड़ी में PM Modi, 13 साल के Looks में हर बार दिखी नई झलक

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन देशभर की नजरों में रहता है। लेकिन हर साल एक और चीज लोगों का ध्यान खींचती है—PM Modi का Independence Day Look। इस बार प्रधानमंत्री लाल रंग की पारंपरिक राजस्थानी बांधनी पगड़ी में नजर आए। पगड़ी के रंग और डिजाइन ने उनके पूरे लुक में देशी रंग भर दिया। सफेद कुर्ता-पायजामा के साथ लाल बांधनी पगड़ी में प्रधानमंत्री का अंदाज बेहद पारंपरिक नजर आया। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक उनके इस लुक की चर्चा देखने को मिली। लाल राजस्थानी पगड़ी ने खींचा लोगों का ध्यान इस बार प्रधानमंत्री मोदी की पगड़ी में राजस्थान की मशहूर बांधनी कला की झलक देखने को मिली। लाल रंग और पारंपरिक पैटर्न ने इसे खास बना दिया। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर भारतीय परंपरा से जुड़े परिधान को जगह देना भी लोगों के लिए आकर्षण का विषय रहा। PM Modi के पहनावे में क्षेत्रीय संस्कृति की झलक पहले भी कई बार दिखाई देती रही है। यही वजह है कि उनके Independence Day Look का इंतजार भाषण की तरह ही खास रहता है। 13 साल में हर बार दिखा नया अंदाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में पहली बार लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित किया था। तब से अब तक उनके पहनावे में लगातार बदलाव देखने को मिला है। खास तौर पर उनकी पगड़ी और साफा हर साल अलग रंग और डिजाइन में नजर आया। कभी चमकीले रंगों ने ध्यान खींचा, तो कभी पारंपरिक भारतीय शैलियों ने। इन अलग-अलग लुक में भारत के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति की झलक दिखाई देती रही है। यही सिलसिला इस बार भी जारी रहा और राजस्थान की बांधनी पगड़ी ने प्रधानमंत्री के Independence Day Look को अलग पहचान दे दी। PM Modi के लुक में दिखती है भारतीय संस्कृति प्रधानमंत्री मोदी का स्वतंत्रता दिवस का पहनावा केवल एक Style Statement नहीं रहता। उनके कपड़ों में अक्सर भारत की लोक परंपराओं, हस्तशिल्प और क्षेत्रीय संस्कृति की झलक दिखाई देती है। इस बार राजस्थानी बांधनी पगड़ी ने भी इसी सांस्कृतिक जुड़ाव को सामने रखा। बांधनी राजस्थान और गुजरात की प्रसिद्ध पारंपरिक रंगाई कला है, जिसमें कपड़े पर छोटे-छोटे पैटर्न बनाए जाते हैं। हर साल क्यों चर्चा में रहता है PM का साफा? स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की पगड़ी की खास बात यह है कि इसमें हर बार कुछ नया देखने को मिलता है। रंग, डिजाइन और शैली में बदलाव के कारण लोगों की नजर उनके लुक पर भी रहती है। प्रधानमंत्री के 13 साल के Independence Day Looks पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि पगड़ी के जरिए अलग-अलग भारतीय परंपराओं को सामने लाने की कोशिश रही है। इस बार लाल राजस्थानी बांधनी पगड़ी ने एक बार फिर इस परंपरा को आगे बढ़ाया। लाल किले से संदेश के साथ दिखी परंपरा की झलक स्वतंत्रता दिवस देश के लिए गर्व और उत्सव का दिन है। ऐसे में प्रधानमंत्री का पारंपरिक भारतीय पहनावा समारोह की तस्वीरों को और खास बना देता है। इस बार लाल पगड़ी में नजर आए पीएम मोदी का लुक भी इसी वजह से चर्चा में रहा। PM Modi Independence Day Look में इस बार राजस्थान की बांधनी परंपरा की झलक देखने को मिली। 13 वर्षों से चले आ रहे इस सिलसिले में हर साल की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री का अंदाज अलग रहा और उनकी लाल राजस्थानी पगड़ी ने समारोह में भारतीय संस्कृति का रंग जोड़ दिया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Independence Day

Vande Mataram से गूंजा Red Fort: Independence Day पर PM Modi ने बताया आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप

स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने आने वाले वर्षों की दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर बड़ा संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) पर जोर देते हुए कहा कि अब देश को अपनी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने की मानसिकता से बाहर निकलना होगा। प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में भारत की बदलती तस्वीर का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने करीब 12 साल में विकास की रफ्तार को नई दिशा दी है। उन्होंने तकनीक, उत्पादन, अर्थव्यवस्था और देश की बढ़ती वैश्विक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब बड़े लक्ष्य तय करने की स्थिति में पहुंच चुका है। दूसरे देशों पर निर्भर नहीं, अपनी ताकत पर भरोसा पीएम मोदी के भाषण में Self-Reliant India सबसे अहम संदेशों में रहा। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी जरूरत की चीजों के लिए बाहरी निर्भरता कम करनी होगी। इसके लिए देश में उत्पादन बढ़ाना, नई तकनीक विकसित करना और युवाओं को अवसर देना जरूरी है। प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि अपनी क्षमता इतनी मजबूत करना है कि भारत वैश्विक स्तर पर मजबूती से खड़ा हो सके। 12 साल में बदली देश की रफ्तार प्रधानमंत्री ने बीते 12 वर्षों की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने कई क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है। सड़क, रेलवे, डिजिटल टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में हुए बदलावों को उन्होंने देश की बढ़ती क्षमता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत को अब छोटे सपनों तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। देश के सामने बड़े लक्ष्य हैं और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी ताकत से काम करना होगा। 2047 तक Viksit Bharat का लक्ष्य लाल किले से प्रधानमंत्री ने Viksit Bharat@2047 के संकल्प को भी दोहराया। भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। इस लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका को प्रधानमंत्री ने खास तौर पर रेखांकित किया। नई पीढ़ी की ऊर्जा, innovation और technology को भारत के अगले चरण के विकास से जोड़कर देखा गया। पहली बार Red Fort से गूंजा Vande Mataram इस स्वतंत्रता दिवस समारोह की सबसे खास बातों में से एक लाल किले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गायन रहा। राष्ट्रगीत की प्रस्तुति ने समारोह के माहौल को भावनात्मक बना दिया। आजादी के आंदोलन से गहराई से जुड़ा ‘वंदे मातरम्’ जब लाल किले से गूंजा, तो समारोह में मौजूद लोगों के साथ देशभर में इसे देखने-सुनने वालों के लिए भी यह पल खास बन गया। Youth Power को बताया भारत की बड़ी ताकत प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत के सपने को देश की युवा शक्ति से जोड़ते हुए युवाओं से innovation, entrepreneurship और technology के क्षेत्र में आगे आने की अपील की। आज का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि नए अवसर और नए कारोबार पैदा करने वाला भी बन सकता है। भारत की बड़ी युवा आबादी को देश की आर्थिक और तकनीकी ताकत में बदलना आने वाले वर्षों की अहम चुनौती और संभावना दोनों है। आत्मनिर्भरता के साथ दुनिया में मजबूत भूमिका प्रधानमंत्री के संबोधन का सार केवल देश के भीतर विकास तक सीमित नहीं रहा। संदेश यह भी था कि भारत अपनी क्षमताओं को मजबूत करते हुए दुनिया में अपनी भूमिका और बढ़ाए। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर टेक्नोलॉजी और रक्षा क्षेत्र तक भारत की घरेलू क्षमता बढ़ाने पर जोर आने वाले समय में भी जारी रहने के संकेत मिले। इसका सीधा असर रोजगार, निवेश और देश की आर्थिक ताकत पर पड़ सकता है। स्वतंत्रता दिवस पर PM Modi का बड़ा संदेश इस बार लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी का संदेश तीन बड़े बिंदुओं के आसपास नजर आया—आत्मनिर्भर भारत, तेज विकास और Viksit Bharat@2047। वहीं पहली बार लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ की गूंज ने समारोह में देशभक्ति और इतिहास की भावना को और मजबूत किया। देश के सामने अब सवाल केवल विकास की गति का नहीं, बल्कि यह भी है कि भारत अपनी क्षमता का इस्तेमाल कितनी तेजी से करता है। प्रधानमंत्री का संदेश साफ था—भारत को अपनी ताकत पर भरोसा करना होगा और बड़े सपनों को पूरा करने के लिए मिलकर आगे बढ़ना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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